Sambhal Violence: संभल हिंसा के मुख्य आरोपी मोहम्मद वारिस पर NSA, विधानसभा सत्र से पहले योगी सरकार का बड़ा एक्शन
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के संभल में जामा मस्जिद सर्वे के विरोध के दौरान हुई हिंसा के मामले में योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। विधानसभा के मानसून सत्र से पहले सरकार ने हिंसा के मुख्य आरोपियों में शामिल मोहम्मद वारिस के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की है। पुलिस के अनुसार, वारिस पर हिंसा के दौरान हथियार उपलब्ध कराने और गोलीबारी में दो लोगों की हत्या में शामिल होने के आरोप हैं।
गौरतलब है कि 24 नवंबर 2024 को संभल में जामा मस्जिद के सर्वे का विरोध करते हुए हिंसा भड़क गई थी। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी, जबकि 30 से अधिक पुलिसकर्मी और प्रशासनिक अधिकारी घायल हुए थे। घटना के बाद पुलिस ने 37 नामजद आरोपियों के अलावा करीब 3,750 अज्ञात लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज किए थे।
पुलिस का दावा है कि मोहम्मद वारिस हिंसा की साजिश में शामिल मुख्य आरोपियों में से एक है और वह कथित मास्टरमाइंड शारिक साठा का करीबी सहयोगी था। जांच एजेंसियों के अनुसार, वारिस ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर हिंसा के दौरान हथियार उपलब्ध कराए और भीड़ को उकसाने में अहम भूमिका निभाई।
मोहम्मद वारिस से पहले उसके दो अन्य कथित सहयोगियों मुल्ला अफरोज और मोहम्मद गुलाम के खिलाफ भी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की जा चुकी है। तीनों आरोपी फिलहाल जेल में बंद हैं। पुलिस का कहना है कि इन्हीं तीनों ने कथित तौर पर शारिक साठा के निर्देश पर हिंसा की साजिश को अंजाम दिया था।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान मुल्ला अफरोज और मोहम्मद गुलाम ने कथित रूप से स्वीकार किया था कि उन्होंने शारिक साठा के कहने पर हिंसा की योजना बनाई थी। पुलिस का दावा है कि इन बयानों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया गया और कई अहम सुराग मिले।
बताया जा रहा है कि संभल हिंसा से जुड़ी विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में सदन के पटल पर रखी जा सकती है। इससे पहले लखनऊ स्थित एडवाइजरी बोर्ड के समक्ष जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की ओर से पक्ष रखे जाने के बाद मोहम्मद वारिस पर NSA लगाने का निर्णय लिया गया।
जांच के दौरान पुलिस ने 19 जनवरी को कथित रूप से शारिक साठा के सहयोगी मुल्ला अफरोज समेत 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 25 जनवरी को मोहम्मद वारिस को गिरफ्तार किया गया, जबकि 20 फरवरी 2025 को मोहम्मद गुलाम को संभल रोडवेज बस अड्डे के पास से गिरफ्तार किया गया था।
पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया कि तीनों आरोपी हिंसा को संगठित करने और उसे उग्र बनाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। जांच एजेंसियों का दावा है कि मुल्ला अफरोज प्रॉपर्टी डीलिंग के साथ-साथ कथित रूप से शारिक साठा के लिए भी काम करता था। उस पर दिल्ली-एनसीआर से लग्जरी वाहन चोरी कर उन्हें पश्चिम बंगाल, असम और नेपाल तक पहुंचाने वाले नेटवर्क से जुड़े होने के भी आरोप हैं।
पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान मुल्ला अफरोज ने कथित रूप से बताया था कि लंबे समय से फरार चल रहा शारिक साठा ही हिंसा के पीछे था और उसी ने अपने सहयोगियों को हथियार उपलब्ध कराए थे। हालांकि, इन दावों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान ही होगी।
फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां पूरे मामले की जांच जारी रखे हुए हैं। प्रशासन का कहना है कि हिंसा में शामिल किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।