Bihar By-Election: बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की बड़ी जीत, बीजेपी का 30 साल पुराना गढ़ ध्वस्त

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Bihar By-Election: बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की बड़ी जीत, बीजेपी का 30 साल पुराना गढ़ ध्वस्त

बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर करते हुए जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अपने पहले ही चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका देते हुए जीत हासिल की। लंबे समय से बीजेपी का अभेद्य किला मानी जाने वाली इस सीट पर मिली जीत को बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। जनसुराज पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जीत के बाद जश्न मनाया, जबकि भाजपा के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का विषय बन गया है।

बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा का मजबूत गढ़ रही है। वर्ष 1995 से इस सीट पर लगातार भाजपा का कब्जा रहा। 1995 से 2005 तक नितिन नवीन के पिता नवीन किशोर ने लगातार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। उस समय यह सीट पटना पश्चिम के नाम से जानी जाती थी। उनके निधन के बाद वर्ष 2006 के उपचुनाव में नितिन नवीन ने जीत दर्ज की और इसके बाद 2010, 2015, 2020 और 2025 में भी लगातार इस सीट पर भाजपा का परचम लहराया। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन के राज्यसभा जाने से यह सीट खाली हुई, जिसके कारण उपचुनाव कराया गया।

उपचुनाव में भाजपा ने अंतिम समय में अपना उम्मीदवार बदलते हुए नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतारा। वहीं राष्ट्रीय जनता दल ने एक बार फिर रेखा गुप्ता पर भरोसा जताया, जो पहले भी इस सीट से चुनाव लड़ चुकी थीं। दूसरी ओर जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर पहली बार स्वयं चुनाव मैदान में उतरे और उन्होंने इस सीट को अपनी राजनीतिक परीक्षा का केंद्र बनाया। पूरे देश की नजरें इस उपचुनाव पर टिकी थीं क्योंकि इसे बिहार की आगामी राजनीति का सेमीफाइनल माना जा रहा था।

चुनाव परिणाम ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया। भाजपा को पूरा भरोसा था कि बांकीपुर में उसका पारंपरिक वोट बैंक उसके साथ रहेगा। इस विधानसभा क्षेत्र में लगभग 33 प्रतिशत सवर्ण मतदाता हैं, जिनमें करीब 14 प्रतिशत कायस्थ समाज के वोटर शामिल हैं। भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा भी इसी समाज से थे और पार्टी को उम्मीद थी कि उसे एकतरफा समर्थन मिलेगा। लेकिन चुनाव परिणाम ने यह धारणा बदल दी और साफ संकेत दिया कि प्रशांत किशोर भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक में भी सेंध लगाने में सफल रहे।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रशांत किशोर ने अपने लंबे जनसंपर्क अभियान, संगठन निर्माण और स्थानीय मुद्दों को केंद्र में रखकर चुनाव लड़ने की रणनीति अपनाई। उन्होंने खुद को पारंपरिक राजनीति के विकल्प के रूप में पेश किया, जिसका असर मतदाताओं पर दिखाई दिया। पहली बार चुनाव लड़ते हुए भाजपा के मजबूत गढ़ में जीत हासिल करना जनसुराज पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है।

बांकीपुर उपचुनाव का यह परिणाम केवल एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बिहार की बदलती राजनीतिक तस्वीर का संकेत भी माना जा रहा है। इस जीत से जनसुराज पार्टी का मनोबल बढ़ा है, जबकि भाजपा और अन्य राजनीतिक दलों के लिए यह परिणाम आगामी चुनावों से पहले नई रणनीति बनाने का संदेश देता है।

 

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