AI Rules: IT नियमों में बड़ा बदलाव, AI कंटेंट की लेबलिंग अनिवार्य, गैरकानूनी सामग्री हटाने की समयसीमा अब सिर्फ 3 घंटे
AI Rules: IT नियमों में बड़ा बदलाव, AI कंटेंट की लेबलिंग अनिवार्य, गैरकानूनी सामग्री हटाने की समयसीमा अब सिर्फ 3 घंटे
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डीपफेक तकनीक के बढ़ते दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियमों में अहम संशोधन किए हैं। नए नियमों के तहत अब एआई की मदद से तैयार किए गए किसी भी डिजिटल कंटेंट पर स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य होगा, ताकि आम लोग आसानी से पहचान सकें कि संबंधित सामग्री वास्तविक है या कृत्रिम रूप से बनाई गई है। इसके साथ ही सरकार या अदालत के आदेश मिलने पर गैरकानूनी डिजिटल सामग्री हटाने की समयसीमा 36 घंटे से घटाकर केवल 3 घंटे कर दी गई है। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य इंटरनेट को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा कि सरकार डीपफेक और एआई आधारित फर्जी सामग्री से उत्पन्न खतरों को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने बताया कि डीपफेक केवल नकली वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि एआई से तैयार ऑडियो, तस्वीरें और लिखित सामग्री भी इसके दायरे में आती हैं। इन्हें नियंत्रित करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के कानूनी और तकनीकी ढांचे को और मजबूत किया गया है।
नए प्रावधानों के अनुसार सोशल मीडिया कंपनियों को अपने उपयोगकर्ताओं को स्पष्ट रूप से बताना होगा कि फर्जी पहचान बनाना, भ्रामक जानकारी फैलाना, हिंसा को बढ़ावा देने वाली सामग्री साझा करना, अश्लील सामग्री प्रकाशित करना, बच्चों को नुकसान पहुंचाने वाली पोस्ट करना या एआई के माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति का रूप धारण करना कानून का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकेगी।
सरकार ने 50 लाख या उससे अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ताओं वाले बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी तय की हैं। ऐसे प्लेटफॉर्म को शिकायत अधिकारी नियुक्त करना, नियमित अनुपालन रिपोर्ट जारी करना, भारत में स्थानीय अधिकारियों की नियुक्ति करना और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय बनाए रखना अनिवार्य होगा। गंभीर मामलों में जांच एजेंसियों को आवश्यक तकनीकी सहयोग भी उपलब्ध कराना होगा।
संशोधित नियमों के तहत सबसे बड़ा बदलाव गैरकानूनी सामग्री हटाने की समयसीमा में किया गया है। अब सरकार या अदालत के आदेश के बाद ऐसी सामग्री अधिकतम तीन घंटे के भीतर हटानी होगी। इसके अलावा कुछ संवेदनशील मामलों में शिकायतों के निपटारे की समयसीमा 72 घंटे से घटाकर 36 घंटे कर दी गई है, जबकि अत्यंत संवेदनशील मामलों में यह अवधि 24 घंटे से घटाकर केवल 2 घंटे कर दी गई है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई डिजिटल मंच इन नियमों का पालन नहीं करता है तो उसे सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा समाप्त हो सकती है। इसके बाद संबंधित प्लेटफॉर्म के खिलाफ कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जा सकेगी।
सरकार के अनुसार भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), शिकायत अपीलीय समिति (GAC), सहयोग पोर्टल और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से डीपफेक और साइबर अपराधों के खिलाफ कार्रवाई को और प्रभावी बनाया गया है। नागरिक राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं तथा हेल्पलाइन 1930 के माध्यम से भी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
भारत एआई मिशन के तहत आईआईटी जोधपुर, आईआईटी मद्रास और आईआईटी खड़गपुर सहित कई प्रमुख संस्थानों में डीपफेक की पहचान करने वाली आधुनिक तकनीक विकसित की जा रही है। सरकार का कहना है कि कानून, तकनीक और जनजागरूकता के संयुक्त प्रयासों से एआई के दुरुपयोग पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जाएगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की विभिन्न धाराओं के तहत पहचान की चोरी, प्रतिरूपण, निजता का उल्लंघन, अश्लील सामग्री के प्रसार और अन्य गैरकानूनी डिजिटल गतिविधियों पर कार्रवाई की जा सकती है। वहीं भारतीय न्याय संहिता, 2023 में प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी, फर्जी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तैयार करना, दुष्प्रचार फैलाना और संगठित साइबर अपराध जैसे मामलों में भी सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। इन कानूनी व्यवस्थाओं का उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जवाबदेही बढ़ाना और नागरिकों को साइबर अपराधों से बेहतर सुरक्षा प्रदान करना है।
सरकार ने बताया कि हर वर्ष साइबर सुरक्षा जागरूकता माह, सुरक्षित इंटरनेट दिवस, स्वच्छता पखवाड़ा और साइबर जागरूकता दिवस जैसे अभियान चलाए जाते हैं। भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (CERT-In) समय-समय पर डीपफेक और एआई आधारित साइबर खतरों से बचाव के लिए दिशा-निर्देश जारी करती है। इसके अलावा सोशल मीडिया कंपनियों को धार्मिक मामलों, भ्रामक एआई सामग्री और बिना सहमति के साझा की गई अंतरंग तस्वीरों जैसे संवेदनशील विषयों पर भी अलग-अलग परामर्श जारी किए गए हैं।