Shiva Sharma Murder Case: मॉडल श्रद्धा दुबे समेत तीन आरोपियों को 24 अक्टूबर तक ट्रांजिट रिमांड, नागपुर से लखनऊ ला रही यूपी पुलिस
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के चर्चित और सनसनीखेज शिवा शर्मा हत्याकांड में फरार चल रही मुख्य आरोपी मॉडल व सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर श्रद्धा दुबे, उसकी सगी बहन रश्मि दुबे और उनके निजी ड्राइवर तनवीर अली उर्फ दानिश के खिलाफ कानून का शिकंजा कस गया है। महाराष्ट्र की नागपुर जिला अदालत ने उत्तर प्रदेश पुलिस और एसटीएफ की अर्जी को स्वीकार करते हुए तीनों आरोपियों को 24 अक्टूबर 2026 तक की ट्रांजिट रिमांड पर यूपी पुलिस को सौंप दिया है। अदालती मंजूरी मिलने के बाद लखनऊ पुलिस की विशेष टीम तीनों आरोपियों को कड़े सुरक्षा घेरे में सड़क मार्ग से लखनऊ लाने के लिए रवाना हो चुकी है। गौरतलब है कि लखनऊ पुलिस ने इन तीनों पर 50-50 हजार रुपये का नकद इनाम घोषित कर रखा था और वे वारदात के बाद से लगातार अपने ठिकाने बदल रहे थे।
यह सनसनीखेज मामला 9 अक्टूबर 2026 को उस वक्त उजागर हुआ था, जब लखनऊ के पॉश इलाके में स्थित अवध ग्रीन अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से संदिग्ध परिस्थितियों में गिरकर युवा कारोबारी शिवा शर्मा की मौत हो गई थी। मृतक की मां रंजना शर्मा ने हजरतगंज कोतवाली में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) के तहत हत्या, आपराधिक साजिश और ब्लैकमेलिंग की नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई थी। परिजनों का आरोप है कि सोशल मीडिया के जरिए शिवा के संपर्क में आई कथित लिव-इन पार्टनर श्रद्धा दुबे और उसकी बहन रश्मि लगातार शिवा पर पैसों के लिए दबाव बना रही थीं और गंभीर रूप से प्रताड़ित कर रही थीं। शिवा ने अपनी मौत से पहले अपनी बहन को भेजे संदेशों में भी इस मानसिक उत्पीड़न और ब्लैकमेलिंग का दर्द बयां किया था।
वारदात के बाद आरोपी नेपाल भागने की फिराक में थे और उनकी लावारिस स्कॉर्पियो कार भारत-नेपाल सीमा पर रुपईडीहा क्षेत्र में बरामद हुई थी। इसके बाद यूपी एसटीएफ और लखनऊ पुलिस ने सर्विलांस और मुखबिर तंत्र की मदद से लोकेशन ट्रेस करते हुए नागपुर के बेलतरोड़ी इलाके में स्थित एक अज्ञात फ्लैट पर छापा मारकर तीनों को धर दबोचा। उधर, आरोपी श्रद्धा दुबे ने पूछताछ में खुद को निर्दोष बताते हुए इसे कारोबारी घाटे और कर्ज के चलते की गई आत्महत्या करार दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लखनऊ पहुंचने के बाद आरोपियों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश कर पुलिस कस्टडी रिमांड की मांग की जाएगी, ताकि वारदात के समय मौजूद साक्ष्यों, कथित वायरल ऑडियो-वीडियो और फ्लैट के भीतर हुए वास्तविक घटनाक्रम की पूरी सच्चाई सामने लाई जा सके।
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