Raj Thackeray Statement: लॉरेंस बिश्नोई को जेल से बाहर निकालकर पीटना चाहिए, राज ठाकरे का केंद्र पर तीखा हमला; बोले- 4-5 महीनों में देश में होगा बड़ा बदलाव
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने मुंबई और राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताते हुए कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को लेकर अत्यंत आक्रामक और कड़ा बयान दिया है। मुंबई में बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई हालिया फायरिंग की घटना और उसके बाद बिश्नोई गैंग द्वारा कथित तौर पर जिम्मेदारी लेने के दावों के बीच राज ठाकरे ने कहा कि लॉरेंस बिश्नोई को जेल से बाहर निकालकर सार्वजनिक रूप से पीटा जाना चाहिए। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्र सरकार की सुरक्षा नीतियों पर तीखे सवाल उठाते हुए पूछा कि जब सरकार सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, तो फिर जेल में बंद एक अपराधी के नाम पर सरेआम धमकियां और हमले कैसे हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को केवल आश्वासन देने के बजाय सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद गंभीर कमियों को दूर करना चाहिए और प्रशासनिक जवाबदेही तय करनी चाहिए।
महाराष्ट्र में कानून-व्यवस्था के गिरते स्तर पर बोलते हुए मनसे प्रमुख ने स्पष्ट किया कि उन्हें मुंबई पुलिस और राज्य के पुलिस बल की कार्यक्षमता पर पूरा भरोसा है। उनका मानना है कि पुलिस किसी भी संगठित अपराध और माफिया सिंडिकेट को चंद दिनों में कुचलने में सक्षम है, बशर्ते उसके कामकाज में राजनीतिक दखलअंदाजी पूरी तरह बंद हो। उन्होंने कहा कि जब तक पुलिस को बिना किसी दबाव के स्वतंत्र रूप से कार्रवाई करने की छूट नहीं मिलेगी, तब तक अपराधियों के हौसले पस्त नहीं होंगे। शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत से हुई हालिया बातचीत का हवाला देते हुए राज ठाकरे ने एक बड़ा राजनीतिक दावा भी किया। उन्होंने कहा कि आने वाले चार से पांच महीनों के भीतर देश की राजनीति में कोई बहुत बड़ा उथल-पुथल या अप्रत्याशित बदलाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि जनता के बीच मौजूदा व्यवस्था और नीतियों के खिलाफ व्यापक नाराजगी धीरे-धीरे सुलग रही है।
राज ठाकरे ने देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के राजनीतिक प्रभाव पर तंज कसते हुए कहा कि वर्ष 2014 में भारतीय जनता पार्टी की सत्ता में वापसी केवल नरेंद्र मोदी के व्यक्तिगत नेतृत्व और चेहरे के कारण हुई थी, जिसमें संगठन की भूमिका को लेकर भी नए सिरे से सोचने की जरूरत है। चुनाव प्रणाली में पारदर्शिता की मांग करते हुए उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के स्थान पर पुराने बैलेट पेपर से चुनाव कराने की वकालत दोहराई। उन्होंने तर्क दिया कि लोकतंत्र में मतदाताओं का यह भरोसा सबसे अहम है कि उनका वोट सही जगह गया है, भले ही बैलेट पेपर की गिनती में चार दिन का अतिरिक्त समय क्यों न लग जाए। इसके अलावा उन्होंने नीट परीक्षा को लेकर छात्रों पर हुए लाठीचार्ज, सूखे की मार झेल रहे महाराष्ट्र के किसानों की दुर्दशा और महंगाई से त्रस्त आम जनता के असंतोष का जिक्र करते हुए आगाह किया कि यदि हुकूमत ने जनभावनाओं की अनदेखी जारी रखी, तो भविष्य में लोग व्यापक स्तर पर सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।
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