Maharashtra Earthquake: भारी बारिश के बीच महाराष्ट्र में आधी रात 4 बार कांपी धरती, 4.6 रही सबसे तेज तीव्रता
Maharashtra Earthquake: भारी बारिश के बीच महाराष्ट्र में आधी रात 4 बार कांपी धरती, 4.6 रही सबसे तेज तीव्रता
मुंबई। महाराष्ट्र में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच गुरुवार तड़के मराठवाड़ा क्षेत्र में भूकंप के लगातार चार झटके महसूस किए गए। नांदेड़, हिंगोली और परभणी जिलों में रात 1:37 बजे से सुबह 3:23 बजे के बीच आए इन झटकों से लोगों में दहशत फैल गई। हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है।
अधिकारियों के अनुसार, सबसे पहला और सबसे शक्तिशाली झटका रात 1:37 बजे महसूस किया गया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.6 दर्ज की गई। इसके बाद 2:15 बजे 3.6, 2:17 बजे 3.9 और 3:23 बजे 4.1 तीव्रता के दो अन्य झटके दर्ज किए गए। लगातार चार झटकों के कारण कई लोग घबराकर आधी रात को अपने घरों से बाहर निकल आए।
भूकंप का मुख्य केंद्र हिंगोली जिले के वसमत तालुका स्थित शिरली गांव के आसपास बताया गया है। पहला झटका पांगरा शिंदे गांव के दक्षिण में आया, जबकि बाद के दो झटकों का केंद्र ककड़धाबा गांव के पास दर्ज किया गया। सभी झटकों की गहराई लगभग 10 किलोमीटर मापी गई, जिसके कारण आसपास के कई क्षेत्रों में कंपन स्पष्ट रूप से महसूस किया गया।
जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने स्थिति पर लगातार निगरानी रखी। अधिकारियों ने बताया कि हिंगोली, नांदेड़ और परभणी जिलों से किसी भी प्रकार की जनहानि, भवन क्षति या अन्य बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली है। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के निर्देश दिए गए हैं।
भूकंप के समय अधिकांश लोग गहरी नींद में थे। अचानक आए झटकों से लोग घबरा गए और कई परिवार एहतियात के तौर पर घरों से बाहर निकल आए। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने भूकंप के झटकों की जानकारी साझा की।
भूकंप विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले छह वर्षों में हिंगोली जिले के औंधा नागनाथ, कलमनुरी और वसमत तालुका क्षेत्रों में 37 से अधिक हल्के भूकंप दर्ज किए जा चुके हैं। हालांकि, एक ही रात में लगातार चार झटके महसूस होने की यह पहली घटना मानी जा रही है, जिसने भू-विज्ञानियों का भी ध्यान आकर्षित किया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, भूकंप पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियों के कारण आते हैं। जब दो प्लेटों के बीच लंबे समय तक दबाव बनने के बाद अचानक ऊर्जा मुक्त होती है, तो धरती में कंपन पैदा होता है। इसे ही भूकंप कहा जाता है। इसके अलावा ज्वालामुखीय गतिविधियां, बड़े बांधों का निर्माण और कुछ मानवीय गतिविधियां भी छोटे भूकंपों का कारण बन सकती हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि भूकंप से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए भूकंपरोधी निर्माण और प्रभावी आपदा प्रबंधन व्यवस्था बेहद जरूरी है।