IAS Rakesh Agrawal Murder Case: रिटायर्ड IAS अधिकारी के हत्यारोपी केयरटेकर वरुण को आगरा से पकड़ा, भोपाल लाते समय पुलिस की गोली से घायल
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या के मामले में पुलिस को करीब एक महीने बाद बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने हत्या के मुख्य आरोपी और पूर्व अधिकारी के केयरटेकर वरुण कुमार को उत्तर प्रदेश के आगरा से गिरफ्तार कर लिया है। मंगलवार, 3 नवंबर की सुबह आरोपी को भोपाल लाया जा रहा था, तभी मुगलिया छाप इलाके के पास उसने कथित तौर पर पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और आरोपी के बीच झड़प हुई और गोली लगने से वरुण के पैर में चोट आई। घायल आरोपी को उपचार के लिए भोपाल के हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां पुलिस निगरानी में उसका इलाज चल रहा है।
पुलिस के मुताबिक, वरुण कुमार को सोमवार शाम आगरा से गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस टीम उसे सड़क मार्ग से भोपाल ला रही थी। मंगलवार तड़के करीब 4:45 से 5 बजे के बीच मुगलिया छाप गांव के पास आरोपी ने वाहन रुकवाया। पुलिस का दावा है कि इस दौरान उसने एक पुलिसकर्मी की सर्विस पिस्टल छीनने की कोशिश की और मौके से भागने का प्रयास किया। आरोपी और पुलिसकर्मियों के बीच हाथापाई हुई। इसी दौरान पिस्टल से गोली चली, जो वरुण के पैर में लगी। इसके बाद पुलिस ने उसे काबू में लेकर अस्पताल पहुंचाया। घटना को लेकर पुलिस की ओर से अलग से भी कानूनी कार्रवाई की गई है।
राकेश अग्रवाल मध्य प्रदेश कैडर के 1982 बैच के आईएएस अधिकारी थे। उनकी उम्र करीब 70 वर्ष थी। वह भोपाल के रातीबड़ थाना क्षेत्र के सूरज नगर स्थित अपने आवास में रहते थे। 30 सितंबर की रात उनकी धारदार हथियार से गला काटकर हत्या कर दी गई थी। अगले दिन 1 अक्टूबर की सुबह उनकी पत्नी निशी अग्रवाल ने घर के बेडरूम में उनका शव देखा और पुलिस को सूचना दी। घटना के समय उनकी पत्नी घर के दूसरे कमरे में थीं। शुरुआती जांच में सामने आया था कि वारदात के बाद घर की अलमारियां खुली हुई थीं और सामान बिखरा पड़ा था।
पुलिस को संदेह है कि हत्या के बाद आरोपी ने सबूत मिटाने के लिए घर में आग लगाने की कोशिश भी की थी। जांच के दौरान रसोई गैस सिलेंडर का पाइप अलग मिला था, जिससे पुलिस ने आशंका जताई कि घर में आग लगाने की योजना बनाई गई थी। हालांकि, इस प्रयास में आरोपी सफल नहीं हो पाया। पुलिस ने घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी जानकारियों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई थी।
जांच में वरुण कुमार का नाम सामने आया था, जो राकेश अग्रवाल की देखभाल के लिए नियुक्त किया गया था। बताया गया है कि राकेश अग्रवाल पीठ दर्द से परेशान थे और उन्हें चौबीस घंटे देखभाल की जरूरत थी। इसी वजह से एक स्थानीय एजेंसी के माध्यम से वरुण को केयरटेकर और पुरुष नर्स के तौर पर नियुक्त किया गया था। वह हत्या से महज तीन दिन पहले ही काम पर आया था। वारदात के बाद से वह फरार था और पुलिस उसकी तलाश में मध्य प्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश, पंजाब तथा अन्य राज्यों में छापेमारी कर रही थी।
आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने कई टीमें गठित की थीं। मथुरा, वृंदावन और ग्वालियर सहित अलग-अलग इलाकों में उसकी तलाश की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर ने विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया था। आरोपी की गिरफ्तारी में मदद करने वाली सूचना देने पर 50 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था। मामले में गिरफ्तारी में देरी को लेकर आईएएस एसोसिएशन ने भी चिंता जताई थी। एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात कर आरोपी को जल्द गिरफ्तार करने की मांग की थी।
राकेश अग्रवाल ने अपने प्रशासनिक करियर के दौरान मध्य प्रदेश में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया था। वह विभिन्न जिलों में कलेक्टर रहने के साथ शासन के कई विभागों में सचिव और प्रमुख सचिव के पद पर भी रहे थे। उनकी अंतिम नियुक्ति भोपाल स्थित आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी के महानिदेशक के रूप में थी। उनकी हत्या के बाद से ही पुलिस पर मामले का जल्द खुलासा करने का दबाव था।
अब आरोपी वरुण कुमार की गिरफ्तारी के बाद पुलिस उससे हत्या के पीछे की वजह, वारदात की पूरी योजना और घटना के दौरान घर में मौजूद परिस्थितियों को लेकर पूछताछ करेगी। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि हत्या के पीछे लूटपाट का मकसद था या कोई अन्य कारण। इसके अलावा फरारी के दौरान आरोपी किन लोगों के संपर्क में रहा और क्या इस वारदात में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी, इसकी भी जांच की जाएगी। फिलहाल आरोपी अस्पताल में उपचाराधीन है और आगे की पूछताछ उसकी चिकित्सकीय स्थिति के अनुसार की जाएगी।





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