Fake ₹20 Coins: दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने नकली 20 रुपये के सिक्के बनाने वाले गिरोह का किया पर्दाफाश, 4 आरोपी गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने नकली भारतीय मुद्रा के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 20 रुपये के नकली सिक्के बनाने और उनकी सप्लाई करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से करीब एक लाख रुपये की फेस वैल्यू वाले 5,000 नकली 20 रुपये के सिक्के बरामद किए गए हैं। जांच में सामने आया है कि गिरोह नकली सिक्कों को कम कीमत पर खरीदकर बाजारों में खपाने का काम कर रहा था। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और नकली सिक्कों की सप्लाई के पूरे रास्ते का पता लगाने में जुटी है।
पुलिस के मुताबिक, इस मामले में सबसे पहले सिक्कों की सप्लाई करने वाले पारस जैन को गिरफ्तार किया गया था। उसे मुंडका इंडस्ट्रियल एरिया मेट्रो स्टेशन के पास से उस समय पकड़ा गया, जब वह नकली सिक्कों की खेप लेकर पहुंचा था। पारस से पूछताछ के बाद पुलिस ने गिरोह के मुख्य आरोपी उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह सहित अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाया। इसके बाद दिल्ली क्राइम ब्रांच ने आगे की जांच शुरू की और सहारनपुर में गिरफ्तार किए गए आरोपियों को दिल्ली लाकर पूछताछ की प्रक्रिया पूरी की।
जानकारी के अनुसार, 8 सितंबर 2026 को क्राइम ब्रांच को गुप्त सूचना मिली थी कि पारस जैन नाम का व्यक्ति सफेद रंग की टोयोटा इटियोस कार में नकली 20 रुपये के सिक्कों की खेप लेकर मुंडका इंडस्ट्रियल एरिया मेट्रो स्टेशन के आसपास आने वाला है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए इंस्पेक्टर आशीष शर्मा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने इलाके में निगरानी शुरू की और जाल बिछाया। कुछ समय बाद संदिग्ध कार मौके पर पहुंची, जिसके बाद पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए पारस जैन को कार सहित पकड़ लिया।
पुलिस ने कार की तलाशी ली तो पिछली सीट पर एक काले रंग का लैपटॉप बैग मिला। इसके अलावा प्लास्टिक की बोरियों में 50 पाउच रखे हुए थे। जांच करने पर प्रत्येक पाउच में 100 नकली 20 रुपये के सिक्के मिले। इस तरह पुलिस ने कुल 5,000 नकली सिक्के बरामद किए, जिनकी फेस वैल्यू करीब एक लाख रुपये आंकी गई। पुलिस ने नकली सिक्कों के साथ इस्तेमाल की जा रही कार, मोबाइल फोन और बैग को भी जब्त कर लिया। बरामदगी के बाद पारस जैन से सिक्कों के स्रोत और उनके नेटवर्क के बारे में पूछताछ की गई।
पूछताछ के दौरान पारस जैन ने कथित तौर पर खुलासा किया कि वह नकली सिक्के उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह से खरीदता था। गिरोह का तरीका यह था कि एक लाख रुपये की फेस वैल्यू वाले नकली सिक्कों की खेप पारस को करीब 70 हजार रुपये में उपलब्ध कराई जाती थी। इसके बाद इन सिक्कों को बाजार में चलाने और आगे सप्लाई करने की योजना थी। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पारस जैन किन-किन दुकानदारों, कारोबारियों या अन्य लोगों तक इन सिक्कों को पहुंचाता था और अब तक कितनी खेप बाजार में भेजी जा चुकी हैं।
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह का कथित मुख्य संचालक उपकार लूथरा हरियाणा के सोनीपत में नकली सिक्के बनाने की यूनिट चला रहा था। पारस जैन की गिरफ्तारी के बाद उपकार लूथरा और उसके साथी इस यूनिट को सोनीपत से उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में स्थानांतरित करने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान सहारनपुर पुलिस की एसओजी टीम ने कार्रवाई करते हुए उपकार लूथरा और उसके साथियों को गिरफ्तार कर लिया। इस गिरफ्तारी के बाद दिल्ली क्राइम ब्रांच को गिरोह के दूसरे सदस्यों तक पहुंचने और नकली सिक्के बनाने की कथित व्यवस्था के बारे में जानकारी मिली।
दिल्ली क्राइम ब्रांच ने मामले की आगे की जांच के लिए अदालत से प्रोडक्शन वारंट हासिल किया। इसके बाद उपकार लूथरा, अनुराग पाल उर्फ लंकेश, जनार्दन कुमार चौरसिया उर्फ संतोष, कुलदीप और हिमांशु उर्फ गुल्लू को सहारनपुर जेल से दिल्ली लाकर तीस हजारी कोर्ट में पेश किया गया। पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ की और गिरोह में उनकी भूमिका की जांच की। पूछताछ के दौरान उपकार लूथरा, अनुराग पाल और जनार्दन कुमार चौरसिया की कथित संलिप्तता सामने आने पर तीनों को इस मामले में गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस जांच में मुख्य आरोपी उपकार लूथरा का आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है। बताया गया है कि उसके खिलाफ दिल्ली, हरियाणा और बिहार में पहले से कई मामले दर्ज हैं। वहीं, पारस जैन के खिलाफ भी दिल्ली में आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी मिली है। पुलिस अब आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड, उनके आपसी संपर्क और नकली सिक्कों के कारोबार से जुड़े संभावित नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ रही है।
फिलहाल इस मामले में गिरफ्तार सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं। क्राइम ब्रांच की टीम यह पता लगाने में जुटी है कि नकली 20 रुपये के सिक्के बनाने की यूनिट में किन उपकरणों और तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा था, सिक्कों का निर्माण कहां-कहां हुआ और इस अवैध कारोबार में और कौन लोग शामिल हैं। इसके अलावा पुलिस यह भी जांच कर रही है कि गिरोह ने अब तक कितने नकली सिक्के तैयार किए और कितनी मात्रा में उनकी सप्लाई बाजारों तक पहुंचाई गई। जांच पूरी होने के बाद इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में भी खुलासा होने की संभावना है।





0 टिप्पणियाँ