Ghaziabad Police Encounter: गाजियाबाद में एक लाख का इनामी बदमाश धर्मेंद्र उर्फ टिड्डी एनकाउंटर में ढेर, 15 राउंड फायरिंग से गूंजी गंगनहर पटरी, तीन पुलिसकर्मी घायल और दो बदमाश फरार
गाजियाबाद, 28 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में बुधवार शाम पुलिस और बावरिया गिरोह के बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़ में एक लाख रुपये का इनामी अपराधी धर्मेंद्र उर्फ टिड्डी मारा गया। निवाड़ी थाना क्षेत्र में गंगनहर पटरी पर हुई इस मुठभेड़ के दौरान दोनों तरफ से लगभग 15 राउंड गोलियां चलीं। पुलिस के मुताबिक, बदमाशों की ओर से की गई फायरिंग में क्राइम ब्रांच के तीन पुलिसकर्मी गोली लगने से घायल हो गए, जबकि दो अन्य पुलिसकर्मियों की बुलेटप्रूफ जैकेट पर गोलियां लगीं। मुठभेड़ के दौरान धर्मेंद्र के दो साथी मौके से फरार हो गए, जिनकी तलाश में पुलिस ने आसपास के इलाकों में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।
मारे गए बदमाश की पहचान लगभग 45 वर्षीय धर्मेंद्र उर्फ टिंडी उर्फ टिड्डी के रूप में हुई है। वह मूल रूप से अमरोहा जिले के आदमपुर थाना क्षेत्र के बुरावली गांव का रहने वाला बताया गया है। पुलिस के अनुसार, पिछले कुछ समय से वह गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र में निठौरा रोड स्थित गोपाल फार्महाउस के आसपास रह रहा था। धर्मेंद्र बावरिया गिरोह से जुड़ा हुआ था और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में चोरी, लूट, डकैती और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर मामलों में वांछित चल रहा था।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, धर्मेंद्र के खिलाफ गाजियाबाद, बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर और अन्य जिलों में करीब 18 आपराधिक मामले दर्ज थे। उसकी गिरफ्तारी के लिए गाजियाबाद और बागपत पुलिस की ओर से 50-50 हजार रुपये के इनाम घोषित किए गए थे। इस तरह उस पर कुल एक लाख रुपये का इनाम था। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थी और उसके संभावित ठिकानों तथा गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही थी।
गाजियाबाद पुलिस के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त अपराध पीयूष कुमार सिंह के अनुसार, बुधवार को क्राइम ब्रांच की ऑपरेशन टीम को एक मुखबिर से सूचना मिली थी कि धर्मेंद्र अपने कुछ साथियों के साथ निवाड़ी थाना क्षेत्र में गंगनहर के रास्ते से गुजरने वाला है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अवगत कराया गया। इसके बाद क्राइम ब्रांच और स्वाट टीम ने संयुक्त रूप से संदिग्धों को पकड़ने के लिए घेराबंदी की योजना तैयार की।
पुलिस टीम ने मेरठ की ओर जाने वाले रास्ते के पास गंगनहर की पटरी पर निगरानी शुरू की। पुलिस के अनुसार, शाम करीब छह बजे गाजियाबाद की दिशा से एक मोटरसाइकिल आती दिखाई दी, जिस पर तीन लोग सवार थे। टीम ने मोटरसाइकिल सवारों को रुकने का संकेत दिया, लेकिन उन्होंने रुकने के बजाय तेज गति से वाहन मोड़ लिया और गंगनहर की पटरी के रास्ते मेरठ की ओर भागने लगे।
संदिग्धों के भागने पर क्राइम ब्रांच की टीम ने उनका पीछा शुरू किया। पुलिस के मुताबिक, कुछ दूरी पर मोटरसाइकिल सवारों ने कच्चे रास्ते की ओर मुड़ने का प्रयास किया। तेज रफ्तार होने के कारण मोटरसाइकिल फिसल गई और तीनों लोग सड़क पर गिर पड़े। इसके बाद उन्होंने मोटरसाइकिल छोड़ दी और आसपास मौजूद पेड़ों की आड़ में छिप गए।
पुलिस अधिकारियों का दावा है कि पेड़ों की आड़ लेने के बाद बदमाशों ने पुलिस टीम पर गोलीबारी शुरू कर दी। अचानक हुई फायरिंग के कारण पुलिसकर्मियों को अपनी सुरक्षा के लिए मोर्चा संभालना पड़ा। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच गोलियां चलीं। पुलिस के अनुसार, पूरी मुठभेड़ में लगभग 15 राउंड फायरिंग हुई। इस दौरान गंगनहर पटरी का इलाका गोलियों की आवाज से गूंज उठा।
बदमाशों की गोलीबारी में हेड कांस्टेबल अमित कुमार, हेड कांस्टेबल विनीत कुमार और हेड कांस्टेबल हिमांशु मलिक घायल हो गए। तीनों पुलिसकर्मियों को गोलियां लगीं। इसके अतिरिक्त उपनिरीक्षक प्रदीप कुमार और हेड कांस्टेबल वरुणवीर सिंह की बुलेटप्रूफ जैकेट पर एक-एक गोली लगी। पुलिस के अनुसार, क्राइम ब्रांच ऑपरेशन टीम के प्रभारी इंस्पेक्टर अनिल कुमार के कान के पास से भी एक गोली गुजरी, जिससे वह बाल-बाल बच गए।
एडीसीपी क्राइम पीयूष कुमार सिंह ने बताया कि पुलिस टीम पर लगातार गोलीबारी होने के कारण जवानों ने आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की। इसी दौरान धर्मेंद्र उर्फ टिड्डी को गोली लग गई और वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसके दो साथी आसपास की भौगोलिक परिस्थितियों का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए। पुलिस ने घायल धर्मेंद्र को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल भिजवाया।
घायल बदमाश और पुलिसकर्मियों को सबसे पहले मुरादनगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें आगे के इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया। पुलिस के अनुसार, अस्पताल में उपचार के दौरान डॉक्टरों ने धर्मेंद्र उर्फ टिड्डी को मृत घोषित कर दिया। घायल पुलिसकर्मियों का भी चिकित्सकीय उपचार कराया गया।
मुठभेड़ की सूचना मिलने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को घटनाक्रम की जानकारी दी गई। घटनास्थल पर पुलिस टीमों ने साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई शुरू की। मौके से मोटरसाइकिल और अवैध हथियार बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब बरामद हथियारों, घटनास्थल की परिस्थितियों और फायरिंग से संबंधित अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।
इस मुठभेड़ के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती धर्मेंद्र के उन दो साथियों को पकड़ने की है, जो गोलीबारी के दौरान फरार हो गए थे। पुलिस ने आसपास के रास्तों और संभावित ठिकानों पर उनकी तलाश शुरू कर दी है। जांच अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि फरार आरोपी कौन हैं, वे किस दिशा में भागे और हाल के किन आपराधिक मामलों में उनकी संलिप्तता हो सकती है।
धर्मेंद्र उर्फ टिड्डी का आपराधिक इतिहास भी पुलिस की जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अधिकारियों के अनुसार, वह पिछले करीब एक दशक से विभिन्न आपराधिक मामलों में नामजद रहा था। उसके खिलाफ दर्ज मामलों में घरों में चोरी, लूट, डकैती, हत्या के प्रयास और गैंगस्टर एक्ट से संबंधित अपराध शामिल हैं। पुलिस उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की भी समीक्षा कर रही है, ताकि गिरोह की गतिविधियों और उससे जुड़े अन्य लोगों की जानकारी प्राप्त की जा सके।
पुलिस के मुताबिक, आठ नवंबर 2024 को बागपत जिले के खेकड़ा थाना क्षेत्र में रात के समय एक मकान में चोरी की वारदात हुई थी। इस संबंध में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच के दौरान धर्मेंद्र उर्फ टिड्डी की भूमिका सामने आने का दावा किया गया। इस मामले में पुलिस उसकी तलाश कर रही थी।
इसके बाद 27 जून 2025 को भी खेकड़ा थाना क्षेत्र में एक घर में रात के समय चोरी की घटना सामने आई थी। इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस जांच में धर्मेंद्र का नाम सामने आया। इन मामलों के आधार पर बागपत पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास कर रही थी।
गाजियाबाद के मसूरी थाना क्षेत्र में 29 जून 2025 को हुई एक अन्य गंभीर वारदात में भी धर्मेंद्र का नाम सामने आया था। पुलिस के अनुसार, कुछ लोग रात के समय एक मकान में लूट के इरादे से घुसे थे। आरोप है कि उन्होंने मकान मालिक के साथ मारपीट की और चाकू से हमला कर उसकी हत्या करने का प्रयास किया। इस घटना में भारतीय न्याय संहिता की मारपीट, खतरनाक हथियार से चोट पहुंचाने और हत्या के प्रयास से संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
जांच के दौरान पुलिस ने इस मामले में भी धर्मेंद्र उर्फ टिड्डी की संलिप्तता का दावा किया। इसके बाद गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट की ओर से उसकी गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया। दूसरी ओर, बागपत से जुड़े मामलों में भी उस पर 50 हजार रुपये का इनाम था। इस तरह दोनों जिलों में घोषित इनाम की कुल राशि एक लाख रुपये हो गई थी।
पुलिस रिकॉर्ड में धर्मेंद्र का नाम इससे पहले भी मुठभेड़ से जुड़े मामले में सामने आ चुका था। वर्ष 2019 में शामली पुलिस ने उस पर 15 हजार रुपये और गाजियाबाद पुलिस ने 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। उसी वर्ष गाजियाबाद पुलिस के साथ हुई एक मुठभेड़ में उसके पैर में गोली लगी थी और उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके बाद भी उसका नाम विभिन्न आपराधिक मामलों में सामने आता रहा।
पुलिस के अनुसार, धर्मेंद्र बावरिया गिरोह से जुड़ा था। इस गिरोह के सदस्यों पर विभिन्न जिलों में चोरी और डकैती की वारदातों में शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति के किसी गिरोह से जुड़े होने या उसके खिलाफ मुकदमे दर्ज होने से संबंधित दावों का कानूनी मूल्यांकन प्रत्येक मामले के साक्ष्यों के आधार पर ही होता है।
गाजियाबाद में हुई ताजा मुठभेड़ में पुलिस का दावा है कि बदमाशों ने पहले गोलीबारी की और पुलिस टीम ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की। पुलिस अधिकारियों ने घायल जवानों, बुलेटप्रूफ जैकेट पर लगी गोलियों और घटनास्थल से मिले हथियारों का उल्लेख किया है। मुठभेड़ की परिस्थितियों की पुष्टि संबंधित जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
इस कार्रवाई में क्राइम ब्रांच और स्वाट टीम की भूमिका महत्वपूर्ण रही। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सूचना मिलने के बाद टीम ने तत्काल घेराबंदी की थी। हालांकि, संदिग्धों ने पुलिस को देखकर भागने का प्रयास किया और पीछा किए जाने के दौरान मुठभेड़ हुई। पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि धर्मेंद्र और उसके साथी गंगनहर के रास्ते किस उद्देश्य से जा रहे थे और क्या वे किसी अन्य आपराधिक वारदात की तैयारी में थे। इस संबंध में अभी कोई निश्चित आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
मुठभेड़ में घायल पुलिसकर्मियों की स्थिति को लेकर भी अधिकारियों ने जानकारी साझा की है। तीन पुलिसकर्मियों को सीधे गोली लगने और दो की बुलेटप्रूफ जैकेट पर गोलियां लगने की बात सामने आई है। इससे स्पष्ट होता है कि पुलिस के दावे के अनुसार मुठभेड़ के दौरान टीम को गंभीर खतरे का सामना करना पड़ा। हालांकि, घायल जवानों की अंतिम चिकित्सकीय स्थिति के बारे में विस्तृत मेडिकल बुलेटिन उपलब्ध नहीं है।
गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट के लिए यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि धर्मेंद्र उर्फ टिड्डी कई जिलों में वांछित था। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थी। बागपत और गाजियाबाद में दर्ज गंभीर मामलों के अलावा अन्य जिलों में उसके खिलाफ दर्ज मुकदमों की जानकारी भी जुटाई जा रही है।
घटना के बाद पुलिस ने फरार दोनों आरोपियों की तलाश के लिए आसपास के क्षेत्रों में अभियान तेज कर दिया है। गंगनहर पटरी से जुड़े रास्तों और संदिग्धों के संभावित ठिकानों की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फरार आरोपियों के पास हथियार हैं या नहीं और क्या वे किसी अन्य स्थान पर छिपे हुए हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फरार आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के बाद गिरोह की गतिविधियों से संबंधित अतिरिक्त जानकारी मिल सकती है। जांच में यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि धर्मेंद्र के साथ मौजूद दोनों व्यक्तियों की पूर्व में दर्ज आपराधिक मामलों में क्या भूमिका थी। फिलहाल उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।
गाजियाबाद के निवाड़ी थाना क्षेत्र में बुधवार शाम हुई इस मुठभेड़ ने एक बार फिर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सक्रिय आपराधिक गिरोहों और पुलिस की कार्रवाई को चर्चा में ला दिया है। एक लाख रुपये के इनामी धर्मेंद्र उर्फ टिड्डी की मौत के बाद पुलिस उसके गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश और पुराने मामलों की जांच को आगे बढ़ा रही है।
फिलहाल पुलिस के अनुसार, मुठभेड़ में धर्मेंद्र उर्फ टिड्डी की मौत हो चुकी है, तीन पुलिसकर्मी गोली लगने से घायल हुए हैं और दो अन्य पुलिसकर्मियों की बुलेटप्रूफ जैकेट पर गोलियां लगी हैं। घटनास्थल से हथियार और मोटरसाइकिल बरामद किए गए हैं। फरार दो आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस की आगे की जांच में मुठभेड़ की परिस्थितियों, फरार आरोपियों की पहचान और बावरिया गिरोह से जुड़े अन्य मामलों के बारे में और जानकारी सामने आ सकती है।





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