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Delhi Traders Loss: INDIA गठबंधन की रैली से दिल्ली के कारोबारियों को 11 हजार करोड़ का नुकसान! CTI अध्यक्ष का दावा, 2.5 लाख दुकानें रहीं बंदConstitution Controversy: हमने हमेशा नीला संविधान देखा, ये लाल किताब लेकर घूम रहे, राहुल गांधी और विपक्ष पर CM देवेंद्र फडणवीस का तीखा हमलाDonkey Route Case: दिल्ली के ट्रैवल एजेंट तरुण खोसला को ED ने किया गिरफ्तार, अमेरिका भेजने के नाम पर 30 से 60 लाख रुपये वसूलने का आरोपDelhi Metro: दिल्ली में GRAP-2 लागू होते ही मेट्रो का बड़ा फैसला, 3 नवंबर से वर्किंग डेज में चलेंगी 20 अतिरिक्त ट्रेनेंCyber Fraud: पर्सनल लोन दिलाने के नाम पर देशभर में साइबर ठगी का आरोप, दिल्ली पुलिस ने तीन आरोपियों को किया गिरफ्तारVehicle Theft Case: लक्ष्मी नगर पुलिस ने दो कथित वाहन चोरों को किया गिरफ्तार, चार चोरी के दोपहिया वाहन, चार मोबाइल और दो लैपटॉप बरामदRoad Safety Awareness: न्यू अशोक नगर के स्कूल पहुंचे केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, बच्चों को दिया सड़क सुरक्षा का संदेश
दिल्ली-एनसीआर

Delhi Traders Loss: INDIA गठबंधन की रैली से दिल्ली के कारोबारियों को 11 हजार करोड़ का नुकसान! CTI अध्यक्ष का दावा, 2.5 लाख दुकानें रहीं बंद

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दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को आयोजित INDIA गठबंधन की महारैली को लेकर अब राजनीतिक विवाद के साथ-साथ कारोबारियों के नुकसान का मुद्दा भी गरमा गया है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के अध्यक्ष बृजेश गोयल ने दावा किया है कि रैली के कारण दिल्ली के व्यापारिक क्षेत्र को करीब 10 हजार से 11 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। उनके मुताबिक, रैली में बड़ी संख्या में लोगों और वाहनों के पहुंचने की आशंका के चलते पुरानी दिल्ली और मध्य दिल्ली के आसपास के बाजारों में कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ। CTI का दावा है कि रैली के आसपास स्थित 20 से 25 प्रमुख बाजारों की करीब 80 प्रतिशत दुकानें बंद रहीं। हालांकि, नुकसान की यह राशि कारोबारियों के संगठन का अनुमान है और इसे स्वतंत्र रूप से प्रमाणित आंकड़ा नहीं माना जा सकता।

बृजेश गोयल के अनुसार, रामलीला मैदान के आसपास के प्रमुख बाजारों में लगभग तीन लाख दुकानें हैं। इनमें से करीब ढाई लाख दुकानें 1 नवंबर को बंद रहीं। उन्होंने बताया कि रैली से पहले ही बाजारों में यह आशंका फैल गई थी कि कार्यक्रम में लगभग 10 लाख लोग और हजारों वाहन पहुंच सकते हैं। इस वजह से कारोबारियों ने सुरक्षा, ट्रैफिक जाम और ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका के चलते दुकानें नहीं खोलीं। CTI अध्यक्ष का कहना है कि इसका असर केवल दुकानदारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बाजारों से जुड़े छोटे व्यापारियों, कर्मचारियों, सप्लायरों और ग्राहकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।

गोयल ने दावा किया कि दिल्ली के आसपास के छोटे शहरों और कस्बों से रोजाना लगभग तीन से चार लाख ग्राहक, डीलर और सप्लायर कारोबार के सिलसिले में राजधानी आते हैं। लेकिन रैली के कारण बड़ी संख्या में ये लोग दिल्ली नहीं पहुंच सके। इससे थोक और खुदरा कारोबार दोनों प्रभावित हुए। उनके मुताबिक, पुरानी दिल्ली और मध्य दिल्ली के बाजारों में ज्यादातर छोटी दुकानें हैं, जहां बड़े गोदामों की तरह कई दिनों का माल जमा नहीं रहता। इन दुकानों का कारोबार रोजाना आने वाले सामान, ग्राहकों और सप्लायरों पर निर्भर करता है। जब बाजारों तक सामान और ग्राहक नहीं पहुंचे तो व्यापारिक गतिविधियां लगभग ठप हो गईं।

CTI अध्यक्ष ने माल ढुलाई पर भी असर पड़ने का दावा किया। उनके अनुसार, दिल्ली के औद्योगिक क्षेत्रों और ट्रांसपोर्ट हब से बाजारों तक सामान पहुंचाने वाले करीब पांच हजार छोटे-बड़े वाहन प्रभावित हुए। इनमें छोटे टेंपो, टाटा ऐस और बड़े ट्रक शामिल थे। गोयल का कहना है कि वाहनों की आवाजाही बाधित होने से लोडिंग और अनलोडिंग का काम भी प्रभावित हुआ। इससे सदर बाजार, चांदनी चौक, दरियागंज, मोरी गेट और कश्मीरी गेट जैसे व्यापारिक इलाकों में सामान की आपूर्ति और बिक्री पर असर पड़ा। उन्होंने कहा कि जिन दुकानों को खोला भी गया, वहां ग्राहकों की कमी के कारण बिक्री बेहद कम रही।

बृजेश गोयल ने बताया कि इन बाजारों में दिवाली के आसपास कारोबार का महत्वपूर्ण समय चल रहा है। धनतेरस की खरीदारी भी नजदीक थी और व्यापारियों को उम्मीद थी कि इस दौरान बाजारों में ग्राहकों की संख्या बढ़ेगी। CTI के अनुसार, संबंधित बाजारों का सामूहिक कारोबार लगभग 10 हजार से 12 हजार करोड़ रुपये तक रहता है। ऐसे में एक दिन की व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित होने से बड़ा नुकसान हुआ। गोयल ने सवाल उठाया कि कारोबारियों को हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा। उन्होंने कहा कि व्यापारियों ने पहले ही रैली के आयोजकों से कार्यक्रम को दिवाली के बाद आयोजित करने की अपील की थी, लेकिन उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया गया।

दरअसल, INDIA गठबंधन की इस रैली को लेकर CTI ने पहले भी कांग्रेस और विपक्षी नेताओं को पत्र लिखकर अपनी चिंताएं जाहिर की थीं। संगठन ने राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और अन्य नेताओं से रैली की तारीख बदलने का आग्रह किया था। कारोबारियों का कहना था कि रामलीला मैदान राजधानी के प्रमुख व्यापारिक इलाकों के बीच स्थित है और यहां बड़ी संख्या में लोगों तथा वाहनों के पहुंचने से बाजारों में जाम और अव्यवस्था की स्थिति पैदा हो सकती है। CTI ने पार्किंग की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए थे। संगठन का कहना था कि इतनी बड़ी रैली के लिए पर्याप्त बस पार्किंग की व्यवस्था करना मुश्किल होगा और इसका सीधा असर बाजारों की आवाजाही पर पड़ सकता है।

दूसरी ओर, INDIA गठबंधन ने 1 नवंबर को रामलीला मैदान में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के मुद्दे पर महारैली आयोजित की थी। इस कार्यक्रम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव सहित विपक्ष के कई बड़े नेता शामिल हुए। रैली से पहले विपक्षी नेताओं ने मिंटो रोड और कनॉट प्लेस की ओर से मार्च निकाला, जो रामलीला मैदान पहुंचकर समाप्त हुआ। विपक्षी दलों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी सवाल उठाए और उनसे इस्तीफे की मांग की। रैली के बाद कारोबारियों के नुकसान का मुद्दा भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का कारण बन गया।

भाजपा ने रैली को लेकर विपक्ष पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस और INDIA गठबंधन ने कारोबारियों की अपील को नजरअंदाज किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि व्यापारियों ने कई बार प्रेस कॉन्फ्रेंस की, पत्र लिखे और रैली को दिवाली के बाद आयोजित करने की मांग की थी, लेकिन विपक्षी नेताओं ने उनकी बात नहीं मानी। भाजपा नेताओं का आरोप है कि दिवाली के महत्वपूर्ण कारोबारी सीजन में इतनी बड़ी रैली आयोजित करने से छोटे दुकानदारों और व्यापारियों की आजीविका प्रभावित हुई। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने भी राहुल गांधी और कांग्रेस पर व्यापारियों की चिंताओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।

वहीं, राहुल गांधी ने कारोबारियों के नुकसान के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराते हुए अलग दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कनॉट प्लेस में भाजपा ने जबरन दुकानें बंद करवाईं। राहुल गांधी का कहना था कि लोगों को यह समझना चाहिए कि व्यापारियों को नुकसान पहुंचाने के पीछे कौन है और दुकानें बंद कराने की स्थिति कैसे पैदा हुई। कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी ने भी विपक्ष की रैली से कारोबारियों को नुकसान पहुंचने संबंधी आरोपों को गलत बताया। उनका कहना था कि विपक्षी नेताओं ने लोगों से रैली में शामिल होने के साथ-साथ आसपास के बाजारों में खरीदारी करने की अपील की थी, ताकि स्थानीय कारोबार को फायदा मिल सके।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने CTI अध्यक्ष के दावे से असहमति जताते हुए कहा कि रैली में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए लोगों ने दिल्ली के बाजारों में खरीदारी की। उन्होंने दावा किया कि पुराने दिल्ली के थोक बाजार खुले रहे और वहां कारोबार भी हुआ। जयराम रमेश ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह बाजार बंद होने और व्यापारियों को नुकसान पहुंचने की आशंका को लेकर डर का माहौल बनाकर विपक्ष की रैली को बदनाम करने की कोशिश कर रही है। उनके मुताबिक, रैली में आए लोगों की मौजूदगी से स्थानीय कारोबार को फायदा मिल सकता था। इस तरह कारोबारियों के नुकसान को लेकर CTI और विपक्षी दलों के दावे एक-दूसरे से अलग हैं।

रामलीला मैदान की रैली के बाद अब दिल्ली में व्यापारिक नुकसान का आंकड़ा राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। एक तरफ CTI अध्यक्ष बृजेश गोयल ने 10 से 11 हजार करोड़ रुपये के नुकसान और करीब ढाई लाख दुकानों के बंद रहने का दावा किया है, वहीं कांग्रेस नेताओं ने इन दावों को चुनौती देते हुए बाजारों में खरीदारी होने की बात कही है। फिलहाल नुकसान के वास्तविक आंकड़े को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। लेकिन इस विवाद ने एक बार फिर राजधानी में बड़े राजनीतिक आयोजनों के लिए स्थान, तारीख, ट्रैफिक प्रबंधन और व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ने वाले असर को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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