नई दिल्ली। दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में जारी छात्र आंदोलन के बीच कैंपस में कथित तोड़फोड़ के मामले में दिल्ली पुलिस ने दूसरी एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के मुताबिक, यह प्राथमिकी विश्वविद्यालय प्रशासन की शिकायत के आधार पर जामिया नगर थाने में दर्ज की गई है। मामले में अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस अब तक विश्वविद्यालय से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में एफआईआर दर्ज कर चुकी है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोप लगाया है कि मंगलवार देर रात कैंपस में कुछ प्रदर्शनकारियों और बाहरी लोगों ने जमकर हंगामा किया। प्रशासन के मुताबिक, इस दौरान विश्वविद्यालय के गेट और चारदीवारी को नुकसान पहुंचाया गया, गेट नंबर 4C को गिरा दिया गया और परिसर में पत्थरबाजी की गई। इसके अलावा सीसीटीवी कैमरों, उनके कनेक्शन और कंट्रोल रूम को भी नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। विश्वविद्यालय का कहना है कि इन घटनाओं से परिसर की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई है।
प्रशासन ने यह भी दावा किया कि कुछ नकाबपोश लोग लड़कों के छात्रावासों तक पहुंचे और वहां मौजूद विद्यार्थियों को आंदोलन में शामिल करने की कोशिश की। विश्वविद्यालय के अधिकारियों और शिक्षकों के अनुसार, घटनास्थल पर पहुंचने पर उन्हें बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाए जाने के संकेत मिले। प्रशासन का आरोप है कि नुकसान पहुंचाने के लिए लोहे की छड़ों, हथौड़ों और अन्य औजारों का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, इन आरोपों की जांच के बाद ही घटना में शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
यह विवाद विश्वविद्यालय में छात्र संघ की बहाली और चुनाव कराने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच सामने आया है। प्रदर्शनकारी छात्र चाहते हैं कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन के संविधान को मंजूरी देने की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए और इसके बाद निर्धारित समयसीमा में चुनाव कराए जाएं। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में वर्ष 2006 के बाद से छात्र संघ के चुनाव नहीं हुए हैं। इसी मांग को लेकर कई दिनों से विरोध प्रदर्शन जारी है और कुछ छात्र भूख हड़ताल पर भी बैठे हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि वह छात्र संघ के गठन के सिद्धांत के खिलाफ नहीं है, लेकिन संविधान तैयार करने और चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से पहले संबंधित नियमों, लिंगदोह समिति की सिफारिशों, न्यायालय के आदेशों और पूर्व घटनाओं का अध्ययन किया जा रहा है। प्रशासन के अनुसार, विश्वविद्यालय में लगभग 24 हजार विद्यार्थियों की मतदाता सूची तैयार करने सहित कई प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। वहीं, छात्र आंदोलन से जुड़े लोगों की मांग है कि इस प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और चुनाव की समयसीमा स्पष्ट की जाए।
तोड़फोड़ की ताजा घटना से पहले विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत के कई दौर हो चुके थे। प्रशासन का दावा है कि मंगलवार शाम भी आंदोलन खत्म कराने और विवाद का समाधान निकालने के लिए बातचीत की कोशिश की गई थी। इसके कुछ समय बाद परिसर में तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। विश्वविद्यालय ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को समझाने पहुंचीं महिला शिक्षकों, वार्डन और अन्य अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार किया गया तथा उन्हें धमकियां दी गईं। इन आरोपों के संबंध में पुलिस की जांच के बाद ही जिम्मेदारी तय हो पाएगी।
कैंपस में तनाव और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के चलते विश्वविद्यालय ने ऑनलाइन कक्षाएं जारी रखने का फैसला किया है। प्रशासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार, विषम सेमेस्टर की पढ़ाई ऑनलाइन कराई जाएगी और दिसंबर में होने वाली सेमेस्टर परीक्षाओं को भी ऑनलाइन आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। विश्वविद्यालय का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में विद्यार्थियों, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की सुरक्षा प्राथमिकता है। इससे पहले भी परिसर में तनाव के कारण ऑफलाइन शैक्षणिक गतिविधियों को सीमित किया गया था।
दिल्ली पुलिस की ओर से दर्ज दूसरी एफआईआर के बाद अब मामले में जांच आगे बढ़ेगी। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटना में कौन-कौन शामिल था और क्या अलग-अलग घटनाओं के बीच कोई संबंध है। फिलहाल एफआईआर में अज्ञात लोगों का नाम दर्ज है और किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही तय होगी। छात्र संघ की बहाली को लेकर जारी आंदोलन और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच गतिरोध के बीच इस मामले ने कैंपस की सुरक्षा तथा शैक्षणिक गतिविधियों को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं।





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