Anna Hazare: ‘उनके सब्र की परीक्षा न ले सरकार’, सोनम वांगचुक के समर्थन में आए अन्ना हजारे, बातचीत शुरू करने की अपील
Anna Hazare: ‘उनके सब्र की परीक्षा न ले सरकार’, सोनम वांगचुक के समर्थन में आए अन्ना हजारे, बातचीत शुरू करने की अपील
दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 21 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन को अब वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे का भी खुला समर्थन मिल गया है। अन्ना हजारे ने केंद्र सरकार से अपील करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी आंदोलन या मतभेद का सबसे बेहतर समाधान बातचीत के जरिए ही निकाला जा सकता है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह सोनम वांगचुक के धैर्य और सब्र की परीक्षा लेने के बजाय जल्द से जल्द उनसे संवाद शुरू करे।
अन्ना हजारे ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे व्यक्ति की आवाज को नजरअंदाज करना उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकार चाहे सोनम वांगचुक की सभी मांगों को स्वीकार करे या न करे, लेकिन बातचीत का रास्ता हमेशा खुला रहना चाहिए। उनके अनुसार, संवाद लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है और इससे किसी भी विवाद का शांतिपूर्ण समाधान संभव हो सकता है।
उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपनी मांगों को लेकर लंबे समय तक अहिंसक तरीके से अनशन करता है तो सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह उसकी बात सुने और सकारात्मक पहल करे। अन्ना हजारे ने कहा कि किसी भी आंदोलन को लंबा खींचने के बजाय समय रहते वार्ता शुरू करना सभी पक्षों के हित में होता है।
सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर भी अन्ना हजारे ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि लगातार कई दिनों तक भूख हड़ताल पर रहने से किसी भी व्यक्ति की शारीरिक स्थिति कमजोर हो सकती है। ऐसे में सरकार को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उनके स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए और जल्द से जल्द बातचीत की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक सरकार को संवेदनशीलता का परिचय देना चाहिए ताकि आंदोलन का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से निकल सके।
उल्लेखनीय है कि लगातार 21 दिनों तक अनशन पर रहने के कारण सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ गई थी। इसके बाद शनिवार को दिल्ली पुलिस उन्हें स्वास्थ्य परीक्षण के लिए सफदरजंग अस्पताल लेकर गई, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज किया जा रहा है। अदालत के निर्देशों के अनुसार उनके स्वास्थ्य की नियमित निगरानी भी की जा रही है ताकि किसी प्रकार की चिकित्सीय आपात स्थिति से बचा जा सके।
सोनम वांगचुक के आंदोलन को पिछले कुछ दिनों में कई राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, कलाकारों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों का समर्थन मिल चुका है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल सहित कई विपक्षी नेताओं ने भी केंद्र सरकार से अपील की है कि वह सोनम वांगचुक की मांगों पर गंभीरता से विचार करे और उनके साथ वार्ता शुरू करे। समर्थकों का कहना है कि बातचीत के जरिए ही आंदोलन से जुड़े मुद्दों का स्थायी और शांतिपूर्ण समाधान संभव है।
वहीं, जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारी लगातार शांतिपूर्ण तरीके से अपना समर्थन जता रहे हैं और सरकार से वार्ता शुरू करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद और सहमति का रास्ता अपनाना सबसे बेहतर विकल्प होता है। दूसरी ओर, अन्ना हजारे की अपील के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
हालांकि, अन्ना हजारे की इस अपील पर केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार आगे क्या कदम उठाती है और क्या सोनम वांगचुक तथा सरकार के बीच जल्द बातचीत की शुरुआत हो पाती है या नहीं।