Azam Khan ED Action: आजम खान पर ईडी का बड़ा शिकंजा, जौहर यूनिवर्सिटी की 1170 करोड़ की संपत्ति अटैच, सरकारी धन के दुरुपयोग और जमीन कब्जाने के गंभीर आरोप
रामपुर, 28 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से चर्चित समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है। जांच एजेंसी के अनुसार, अटैच की गई संपत्ति का मौजूदा बाजार मूल्य लगभग 1,170 करोड़ रुपये है, जबकि इसमें 426.46 करोड़ रुपये की राशि को कथित तौर पर अपराध से अर्जित आय माना गया है। ईडी की यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई है।
ईडी के लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय ने बुधवार, 28 अक्टूबर को इस कार्रवाई से संबंधित विस्तृत जानकारी जारी की। एजेंसी के अनुसार, रामपुर के जौहर नगर स्थित सिंहनखेड़ा गांव में फैला विश्वविद्यालय परिसर मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के स्वामित्व में है। इस ट्रस्ट की स्थापना आजम खान ने की थी और जांच एजेंसी के मुताबिक इसका नियंत्रण भी उन्हीं के पास है। आजम खान विश्वविद्यालय के मानद कुलाधिपति भी हैं। ट्रस्ट के माध्यम से संचालित इस विश्वविद्यालय की जमीन खरीद, भवन निर्माण, सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल और वित्तीय लेनदेन को लेकर लंबे समय से विवाद और कानूनी जांच चल रही है।
ईडी की कार्रवाई का आधार रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज कई आपराधिक मामले हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, शुरुआती जांच 26 एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। इन मामलों में आरोप लगाया गया था कि विश्वविद्यालय के विस्तार के लिए किसानों की कृषि भूमि पर जबरन कब्जा किया गया। शिकायतों में जमीन मालिकों पर दबाव बनाने और उनकी जमीन हासिल करने के आरोप भी शामिल थे। इन मामलों की जांच के दौरान एजेंसी ने विश्वविद्यालय की संपत्तियों और निर्माण कार्यों के वित्तीय स्रोतों की पड़ताल शुरू की।
जांच में सिंहनखेड़ा गांव की लगभग 34 एकड़ शत्रु संपत्ति से जुड़ा मामला भी सामने आया। ईडी के अनुसार, इस क्षेत्र में स्थित 45 भूखंडों पर विश्वविद्यालय के लिए अवैध कब्जे का आरोप था। संबंधित जमीन की लीज ट्रस्ट के पक्ष में रद्द होने के बावजूद उसके इस्तेमाल को लेकर सवाल उठे थे। जांच एजेंसी ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत शत्रु संपत्ति अभिरक्षक ने रामपुर जिला प्रशासन की सहायता से संबंधित जमीन का कब्जा वापस प्राप्त कर लिया है।
विश्वविद्यालय से जुड़े वित्तीय मामलों की जांच के दौरान ईडी को सरकारी विकास कार्यों के लिए स्वीकृत धन और निर्माण सामग्री के कथित दुरुपयोग से संबंधित जानकारी मिली। एजेंसी का आरोप है कि सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए उपलब्ध कराए गए संसाधनों का इस्तेमाल निजी विश्वविद्यालय परिसर में निर्माण कार्यों के लिए किया गया। इसके अतिरिक्त सरकारी ठेके प्राप्त करने वाली कुछ कंपनियों से ट्रस्ट को दान के रूप में धन पहुंचाए जाने के मामले भी सामने आए।
ईडी ने इन कथित अनियमितताओं की जानकारी पीएमएलए की धारा 66(2) के तहत उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ साझा की। इसके बाद 13 अक्टूबर 2026 को रामपुर के अजीमनगर थाने में आजम खान, मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और अन्य लोगों के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज की गई। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 61, 316(5) और 318(4) के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराएं लगाई गई हैं। एजेंसी ने आजम खान और अन्य लोगों से संबंधित 28 अतिरिक्त एफआईआर को भी जांच के दायरे में लिया है। इनमें से अधिकांश मामलों में पुलिस आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है।
ईडी की जांच में सरकारी ठेकेदारों की भूमिका को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। एजेंसी के मुताबिक, एक कंपनी के प्रबंध निदेशक ने जांच के दौरान बताया कि उसकी कंपनी को लोक निर्माण विभाग से लगभग 186 करोड़ रुपये के ठेके मिले थे। जांच एजेंसी का दावा है कि संबंधित ठेकों की कुल राशि का लगभग 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए सामग्री खरीदने में इस्तेमाल किया गया। यह आरोप सार्वजनिक निर्माण कार्यों के लिए निर्धारित संसाधनों के कथित रूप से दूसरे उद्देश्य में इस्तेमाल किए जाने से जुड़ा है।
एक अन्य ठेकेदार फर्म के साझेदारों ने जांच एजेंसी के सामने बताया कि वे आजम खान के प्रभाव में काम कर रहे थे। ईडी के अनुसार, इस फर्म ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को लगभग 40 लाख रुपये का दान दिया था। एजेंसी इन वित्तीय लेनदेन की वास्तविक प्रकृति और सरकारी ठेकों से उनके संभावित संबंध की जांच कर रही है। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम कानूनी निष्कर्ष अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगा।
जांच एजेंसी ने विधायक और विधान परिषद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास निधि से कराए गए निर्माण कार्यों पर भी सवाल उठाए हैं। ईडी के मुताबिक, जौहर यूनिवर्सिटी के निजी परिसर में लगभग 6.60 करोड़ रुपये के विकास कार्य इस निधि से कराए गए थे। इन कार्यों का निष्पादन उत्तर प्रदेश जल निगम के माध्यम से हुआ था। संबंधित अवधि में आजम खान जल निगम के अध्यक्ष थे। एजेंसी इस बात की जांच कर रही है कि सार्वजनिक विकास के लिए निर्धारित धन का इस्तेमाल विश्वविद्यालय परिसर में किन परिस्थितियों और स्वीकृतियों के आधार पर किया गया।
ईडी ने मेरठ स्थित दो शैक्षणिक संस्थाओं से जौहर ट्रस्ट को मिले लगभग 6.24 करोड़ रुपये के दान का भी उल्लेख किया है। एजेंसी का आरोप है कि यह धन राजनीतिक प्रभाव के माध्यम से प्राप्त किया गया था। इसके अतिरिक्त आयकर विभाग द्वारा ट्रस्ट का पंजीकरण रद्द किए जाने की जानकारी भी जांच एजेंसी ने साझा की है। इन वित्तीय लेनदेन और संस्थागत संबंधों को विश्वविद्यालय की संपत्ति के स्रोतों की जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विश्वविद्यालय परिसर में सरकारी धन से कराए गए निर्माण कार्यों में पंडाल, अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए छात्रावास और अस्पताल ब्लॉक का मामला भी सामने आया है। ईडी के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार ने इन निर्माण कार्यों के लिए कुल 23.41 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे। इनमें पंडाल निर्माण के लिए वर्ष 2015 में लगभग 12.16 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई थी।
वर्ष 2015 के सरकारी आदेश में यह शर्त रखी गई थी कि पंडाल का स्वामित्व राज्य के संस्कृति विभाग के पास रहेगा। इसे बेचा या हस्तांतरित नहीं किया जा सकेगा और सरकारी कार्यक्रमों के लिए निशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि, ईडी के अनुसार, वर्ष 2016 में जारी एक अन्य आदेश के माध्यम से इन शर्तों में बदलाव कर दिया गया। संशोधित आदेश में पंडाल का मालिकाना हक जौहर यूनिवर्सिटी को हस्तांतरित करने और सरकारी इस्तेमाल के लिए निशुल्क उपलब्ध कराने की शर्त हटाने की बात सामने आई।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इस बदलाव के परिणामस्वरूप सरकारी धन से निर्मित संपत्ति विश्वविद्यालय के स्वामित्व में चली गई। जिस समय ये आदेश जारी हुए थे, उस दौरान आजम खान उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री थे और उनके पास नगर विकास विभाग का प्रभार था। उत्तर प्रदेश जल निगम भी इसी विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्यरत था। ईडी इन आदेशों और संबंधित वित्तीय निर्णयों की कानूनी वैधता तथा उनके पीछे की परिस्थितियों की जांच कर रही है।
जौहर यूनिवर्सिटी की संपत्ति के मूल्यांकन में भी बड़े अंतर सामने आए हैं। ईडी के अनुसार, जिला मूल्यांकन अधिकारी ने 10 नवंबर 2023 की अपनी रिपोर्ट में विश्वविद्यालय परिसर की 59 इमारतों की निर्माण लागत लगभग 494.46 करोड़ रुपये आंकी थी। इसके अतिरिक्त 114 बिक्री विलेखों के माध्यम से प्राप्त जमीन का मूल्य लगभग 4.63 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया था। इस प्रकार विश्वविद्यालय परिसर की कुल आकलित लागत 499.09 करोड़ रुपये बताई गई।
दूसरी ओर, मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट ने अपने आयकर रिटर्न में लगभग 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च दर्शाया था। जांच एजेंसी के अनुसार, इस राशि में शामिल 12.29 करोड़ रुपये के दान को गैर-वास्तविक पाया गया। इस आधार पर ट्रस्ट द्वारा दिखाए गए वास्तविक खर्च की राशि लगभग 66.03 करोड़ रुपये रह गई। अन्य वैध वित्तीय स्रोतों को शामिल करने के बाद ईडी ने कुल 72.63 करोड़ रुपये के खर्च को वैध स्रोतों से स्पष्ट माना।
इस गणना के अनुसार, विश्वविद्यालय परिसर की कुल आकलित लागत 499.09 करोड़ रुपये में से 426.46 करोड़ रुपये के वित्तीय स्रोतों का संतोषजनक विवरण जांच एजेंसी को उपलब्ध नहीं कराया जा सका। ईडी ने इसी अंतर को कथित अपराध से अर्जित आय के रूप में चिह्नित किया है। एजेंसी का कहना है कि ट्रस्ट के पदाधिकारी विश्वविद्यालय निर्माण में इस्तेमाल की गई इस राशि के स्रोतों को पर्याप्त दस्तावेजों के साथ स्पष्ट नहीं कर सके।
इसी आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने विश्वविद्यालय की संबंधित जमीन और इमारतों को पीएमएलए के तहत अस्थायी रूप से अटैच करने का आदेश जारी किया। यहां यह समझना महत्वपूर्ण है कि 426.46 करोड़ रुपये कथित अपराध से अर्जित आय का मूल्य है, जबकि 1,170 करोड़ रुपये अटैच की गई संपत्ति का अनुमानित वर्तमान बाजार मूल्य है। दोनों राशियां अलग-अलग मूल्यांकन को दर्शाती हैं। यह कार्रवाई अभी अस्थायी कुर्की की है, न कि किसी न्यायालय द्वारा अपराध सिद्ध होने के बाद संपत्ति की अंतिम जब्ती।
ईडी इससे पहले भी जौहर यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े परिसरों में जांच कर चुकी है। एजेंसी के अनुसार, 19 अगस्त 2026 को विश्वविद्यालय तथा संबंधित ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया गया था। इस दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और कई दस्तावेज कब्जे में लिए गए थे। जांच एजेंसी इन सामग्रियों को वित्तीय लेनदेन, निर्माण कार्यों और संपत्ति के स्रोतों से जुड़े आरोपों की पड़ताल में महत्वपूर्ण मान रही है।
जांच के दायरे में रामपुर शहर में वर्ष 2016 के दौरान कुछ मकानों को गिराए जाने से जुड़े मामले भी शामिल हैं। ईडी द्वारा उल्लेखित एफआईआर और आरोपपत्रों के अनुसार, कई परिवारों के मकानों को बुलडोजर से गिराए जाने, लोगों को धमकाने और उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए थे। इनमें कुछ परिवार वक्फ संपत्तियों के किरायेदार बताए गए हैं। शिकायतों में आरोप है कि तत्कालीन अधिकारियों और अन्य लोगों ने कथित रूप से आजम खान के निर्देश पर कार्रवाई की थी।
इन शिकायतों में नकदी, आभूषण और पशुओं की लूट के आरोप भी दर्ज किए गए थे। इसके अतिरिक्त तोड़े गए मकानों का मलबा विश्वविद्यालय परिसर में पहुंचाए जाने और रामपुर नगर पालिका के लिए खरीदी गई सफाई मशीनरी का विश्वविद्यालय में इस्तेमाल किए जाने के आरोप भी जांच का हिस्सा हैं। हालांकि, ये सभी जांच और अभियोजन से संबंधित आरोप हैं तथा इन्हें न्यायालय द्वारा सिद्ध अपराध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे हैं। रामपुर की राजनीति और जौहर यूनिवर्सिटी की स्थापना से उनका नाम प्रमुखता से जुड़ा रहा है। वर्ष 2006 में स्थापित इस विश्वविद्यालय को शिक्षा के क्षेत्र में उनकी महत्वपूर्ण परियोजनाओं में गिना जाता रहा है। लेकिन भूमि अधिग्रहण, निर्माण कार्यों और ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन से जुड़े विवादों के कारण यह संस्थान लगातार कानूनी जांच के दायरे में रहा है।
आजम खान वर्तमान में रामपुर जेल में बंद हैं। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के सिलसिले में उनसे पूछताछ भी की है। विश्वविद्यालय की संपत्तियों को अटैच किए जाने के बाद इस मामले में कानूनी कार्रवाई का दायरा और बढ़ गया है। हालांकि, ताजा कार्रवाई के संबंध में आजम खान या ट्रस्ट की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध रिपोर्टों में सामने नहीं आई है। ऐसे में जांच एजेंसी के आरोपों को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष मानना उचित नहीं होगा।
धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत अस्थायी कुर्की का उद्देश्य उन संपत्तियों को सुरक्षित रखना होता है, जिनके बारे में जांच एजेंसी का मानना है कि उनका संबंध कथित आपराधिक आय से हो सकता है। इस प्रकार की कार्रवाई आगे निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकरण की समीक्षा के अधीन होती है। संबंधित पक्षों को कानून के अनुसार अपने दस्तावेज और पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है।
जौहर यूनिवर्सिटी के मामले में ईडी की कार्रवाई का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि जांच केवल जमीन खरीद या एक वित्तीय लेनदेन तक सीमित नहीं है। इसमें किसानों की जमीन से जुड़े आरोप, शत्रु संपत्ति का विवाद, सरकारी ठेकेदारों के भुगतान, सार्वजनिक निर्माण सामग्री का कथित इस्तेमाल, सरकारी योजनाओं के धन से निजी परिसर में निर्माण और ट्रस्ट को मिले दान जैसे कई पहलू शामिल हैं।
ईडी के अनुसार, विश्वविद्यालय परिसर के निर्माण में हुए वास्तविक खर्च और वैध स्रोतों से उपलब्ध राशि के बीच बड़े अंतर ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच को आगे बढ़ाया है। एजेंसी अब विभिन्न सरकारी विभागों, ठेकेदारों, वित्तीय दस्तावेजों और ट्रस्ट के खातों से संबंधित साक्ष्यों के आधार पर आरोपों की जांच कर रही है।
फिलहाल प्रवर्तन निदेशालय ने 426.46 करोड़ रुपये की कथित अपराध से अर्जित आय से जुड़ी विश्वविद्यालय की जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से अटैच किया है, जिनका वर्तमान बाजार मूल्य लगभग 1,170 करोड़ रुपये बताया गया है। इस कार्रवाई के बाद जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े वित्तीय और संपत्ति विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। मामले में आगे की जांच जारी है और अंतिम कानूनी स्थिति संबंधित प्राधिकरणों तथा न्यायालय की कार्यवाही के बाद ही स्पष्ट होगी।





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