उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत डेढ़ लाख से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति और शैक्षिक योग्यता की जांच की जाएगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रदेशव्यापी सत्यापन की प्रक्रिया तेज कर दी है। कक्षा एक से आठ तक के सभी शिक्षकों को अपने नियुक्ति पत्र और शैक्षिक योग्यता से जुड़े प्रमाणपत्रों की स्पष्ट प्रतियां जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालय में जमा करनी होंगी। इसके बाद इन दस्तावेजों को उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के संबंधित रेंज कार्यालय भेजा जाएगा, जहां उनकी जांच की जाएगी।
बेसिक शिक्षा निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी ने सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशकों और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। विभाग के आदेश के मुताबिक, शिक्षकों को बीएसए कार्यालय से सूचना जारी होने के एक सप्ताह के भीतर अपने दस्तावेज जमा करने होंगे। इसमें हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, स्नातक, बीएड, बीटीसी, डीएलएड, बीएलएड और शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) या केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) से संबंधित प्रमाणपत्र शामिल हैं। नियुक्ति के समय निर्धारित अन्य शैक्षिक और पात्रता संबंधी दस्तावेज भी जमा करने होंगे।
शिक्षकों को दस्तावेजों के साथ नोटरी से सत्यापित शपथपत्र भी देना होगा। इसमें उन्हें यह जानकारी देनी होगी कि उनके परिवार या निकट संबंधियों में कोई व्यक्ति उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग में बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) या उससे ऊपर के पद पर कार्यरत है अथवा पहले रह चुका है।
इस जांच के पीछे परिषदीय विद्यालयों में फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्रों के आधार पर नियुक्तियों के मामले सामने आना प्रमुख वजह है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 16 अक्टूबर 2026 को कुसुमलता बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले की सुनवाई के दौरान सभी शिक्षकों के नियुक्ति और शैक्षिक अभिलेखों की जांच के निर्देश दिए थे। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने ऐसे मामले आए, जिनमें कथित तौर पर एक ही शैक्षिक प्रमाणपत्र के आधार पर 10 या उससे अधिक लोगों को नौकरी मिलने की बात सामने आई थी।
अदालत के आदेश के अनुपालन में अब बीएसए कार्यालय प्रत्येक शिक्षक की नियुक्ति से जुड़ी विस्तृत जानकारी एकत्र करेगा। इसके बाद सूची और प्रमाणपत्रों की प्रतियां एसटीएफ के संबंधित रेंज कार्यालय को भेजी जाएंगी। एसटीएफ के अधिकारी दस्तावेजों की प्रामाणिकता की जांच करेंगे। हाईकोर्ट ने अनुपालन की स्थिति और आगे की सुनवाई के लिए 4 नवंबर 2026 की तारीख तय की है।





0 टिप्पणियाँ