Sushmita Dev Resigns: ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका, राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने दिया इस्तीफा

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Sushmita Dev Resigns: ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका, राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने दिया इस्तीफा

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लिए मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पार्टी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका देते हुए राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे असंतोष और राजनीतिक उथल-पुथल को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। खास बात यह है कि एक सप्ताह के भीतर टीएमसी के दूसरे राज्यसभा सांसद के इस्तीफे से पार्टी के अंदरूनी हालात को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

सुष्मिता देव से पहले तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में लंबे समय तक पार्टी के मुख्य सचेतक रहे सुखेंदु शेखर रॉय भी अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं। लगातार दो बड़े नेताओं के इस्तीफे को राजनीतिक जानकार पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी और नेतृत्व को लेकर असंतोष से जोड़कर देख रहे हैं। ऐसे समय में जब पार्टी पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रही है, सुष्मिता देव का इस्तीफा ममता बनर्जी के लिए एक और राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार सुष्मिता देव ने बुधवार को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने का फैसला किया। उनका इस्तीफा ऐसे समय में सामने आया है जब पार्टी के भीतर बगावत और टूट की चर्चाएं लगातार तेज हो रही हैं। हाल के दिनों में कई नेताओं और सांसदों द्वारा पार्टी नेतृत्व को लेकर असहमति जताए जाने की खबरें भी सामने आई थीं।

सुष्मिता देव का राजनीतिक सफर काफी महत्वपूर्ण रहा है। वह पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़ी हुई थीं और असम के सिलचर लोकसभा क्षेत्र से सांसद रह चुकी हैं। कांग्रेस छोड़ने के बाद उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा था और बाद में उन्हें राज्यसभा भेजा गया। पार्टी में उन्हें एक प्रभावशाली और सक्रिय नेता माना जाता था। ऐसे में उनका अचानक इस्तीफा राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

टीएमसी के भीतर संकट उस समय और गहरा गया जब पार्टी के बागी नेताओं की गतिविधियां खुलकर सामने आने लगीं। बताया जा रहा है कि टीएमसी के बागी नेता रिताब्रता बनर्जी को कई विधायकों का समर्थन प्राप्त है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी के भीतर एक बड़ा वर्ग नेतृत्व से असंतुष्ट है और संगठनात्मक बदलाव की मांग कर रहा है। इन घटनाओं के बाद पार्टी के भीतर खींचतान और तेज होती दिखाई दे रही है।

सुष्मिता देव के इस्तीफे को केवल एक व्यक्तिगत राजनीतिक निर्णय के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे तृणमूल कांग्रेस के भीतर उभर रहे व्यापक असंतोष का संकेत माना जा रहा है। लगातार हो रहे इस्तीफों ने विपक्षी दलों को भी टीएमसी पर हमला करने का मौका दे दिया है। विपक्ष का दावा है कि पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर गंभीर मतभेद मौजूद हैं, जो अब सार्वजनिक रूप से सामने आने लगे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा चुनावों के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों और संगठनात्मक चुनौतियों ने तृणमूल कांग्रेस के सामने नई समस्याएं खड़ी कर दी हैं। यदि पार्टी नेतृत्व असंतुष्ट नेताओं को साथ लाने में सफल नहीं होता है तो आने वाले समय में और बड़े राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।

फिलहाल सुष्मिता देव के इस्तीफे ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व इस चुनौती का सामना किस तरह करता है और पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष को शांत करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

 

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