Sohrabuddin Encounter Case: सुप्रीम कोर्ट ने 22 आरोपियों और CBI को नोटिस, 92 गवाहों के मुकरने पर जताई चिंता

Sohrabuddin Encounter Case: सुप्रीम कोर्ट ने 22 आरोपियों और CBI को नोटिस, 92 गवाहों के मुकरने पर जताई चिंता

नई दिल्ली। सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की कथित फर्जी मुठभेड़ से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 22 आरोपियों और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को नोटिस जारी किया है। शीर्ष अदालत ने मुकदमे के दौरान 210 गवाहों में से 92 के अपने पहले के बयानों से मुकरने को गंभीर चिंता का विषय बताया है। अदालत ने कहा कि वह कुछ गवाहों के बयान देखना चाहती है और यह जांचना जरूरी है कि निचली अदालतों में हुई कार्यवाही निष्पक्ष एवं न्यायपूर्ण थी या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी।

यह मामला सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और तुलसीराम प्रजापति की मौत से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि नवंबर 2005 में सोहराबुद्दीन को कथित तौर पर पुलिस टीम ने एक मुठभेड़ में मार दिया था और बाद में उनकी पत्नी कौसर बी की भी हत्या कर दी गई। इसके बाद दिसंबर 2006 में तुलसीराम प्रजापति की मौत गुजरात-राजस्थान सीमा पर हुई कथित मुठभेड़ में हुई। इन घटनाओं की जांच बाद में CBI को सौंपी गई थी।

मामले में कुल 210 गवाहों की गवाही दर्ज की गई थी। इनमें से 92 गवाह मुकदमे के दौरान अपने पहले के बयानों से मुकर गए और अभियोजन की कहानी का समर्थन नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इसी पहलू पर विशेष चिंता जताई और कहा कि इतने बड़ी संख्या में गवाहों का मुकरना यह देखने का कारण बनता है कि मुकदमे की सुनवाई किस तरह हुई और क्या पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष तथा न्यायपूर्ण थी। अदालत ने कुछ गवाहों के बयान स्वयं देखने की इच्छा भी जताई है।

मामला सुप्रीम कोर्ट तक सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबुद्दीन शेख की याचिका के जरिए पहुंचा है। एक अन्य भाई नायबुद्दीन शेख ने भी अलग याचिका दायर की है और दोनों मामलों को साथ सुनने का अनुरोध किया है। इन याचिकाओं में बंबई हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें विशेष CBI अदालत द्वारा सभी 22 आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा गया था।

विशेष CBI अदालत ने 21 दिसंबर 2018 को मामले में सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया था। अदालत ने निष्कर्ष दिया था कि अभियोजन पक्ष साजिश और हत्या के आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर पाया। इसके बाद बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ सोहराबुद्दीन के भाइयों ने बंबई हाईकोर्ट में अपील की थी। 7 मई 2026 को बंबई हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी थी।

बंबई हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार, अभियोजन ने मामले में परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर भरोसा किया था, लेकिन अदालत के सामने आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त कड़ी स्थापित नहीं हो सकी। हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार 92 गवाह अभियोजन की कहानी के अनुरूप नहीं रहे थे। इसी फैसले के बाद अब शिकायतकर्ता पक्ष ने सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से यह दलील भी दी गई कि उन्हें बरी करने वाले निचली अदालत और हाईकोर्ट के फैसले विस्तार से दिए गए हैं। आरोपियों की ओर से मामले की जल्द सुनवाई करने की मांग का उल्लेख भी सामने आया है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने अभी मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है और फिलहाल नोटिस जारी कर संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस स्तर पर अमित शाह को दिसंबर 2014 में मिली मुक्ति को चुनौती देने वाले हिस्से की सुनवाई नहीं करेगा। अदालत का मौजूदा परीक्षण 22 आरोपियों से संबंधित उस अपील और निचली अदालतों के फैसलों के संदर्भ में है, जिसमें 92 गवाहों के मुकरने समेत मुकदमे की कार्यवाही पर सवाल उठाए गए हैं।

मामले की जांच की शुरुआत गुजरात पुलिस की कार्रवाई से हुई थी। बाद में जांच को लेकर उठे सवालों के बीच सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर CBI ने आगे की जांच की। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वर्ष 2012 में मुकदमे को गुजरात से मुंबई स्थानांतरित किया गया था। CBI ने जांच के बाद कई आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए थे।

अब सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य सवालों में यह भी शामिल है कि निचली अदालतों द्वारा आरोपियों को बरी किए जाने के फैसलों के बावजूद 92 गवाहों के मुकरने के पहलू की किस तरह समीक्षा की जाए और क्या मुकदमे की पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से हुई थी। अदालत द्वारा कुछ गवाहों के बयान स्वयं देखने की बात कहे जाने से अगले चरण की सुनवाई में उन बयानों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

28 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई में आरोपियों और CBI की ओर से अदालत के नोटिस का जवाब सामने आ सकता है। इसके बाद शीर्ष अदालत यह तय करेगी कि मामले में आगे किस तरह की कानूनी कार्यवाही की जानी है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने किसी आरोपी को दोषी नहीं ठहराया है और 2018 में विशेष CBI अदालत तथा मई 2026 में बंबई हाईकोर्ट द्वारा दिए गए बरी किए जाने के फैसले अभी रिकॉर्ड पर मौजूद हैं।

 

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