Noida Violence: नोएडा हिंसा मामले में बड़ा खुलासा, पाकिस्तान से ऑपरेट दो X हैंडल्स पर भड़काने का आरोप, 62 गिरफ्तारियां और NSA की तैयारी
Noida Violence: नोएडा हिंसा मामले में बड़ा खुलासा, पाकिस्तान से ऑपरेट दो X हैंडल्स पर भड़काने का आरोप, 62 गिरफ्तारियां और NSA की तैयारी
नोएडा हिंसा मामले में बड़ा खुलासा, पाकिस्तान से ऑपरेट हो रहे दो X हैंडल्स पर भड़काने का आरोप, 62 गिरफ्तारियां और NSA की तैयारी नोएडा में हाल ही में हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए दावा किया है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक सुनियोजित साजिश काम कर रही थी और इसमें सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई. नोएडा पुलिस के अनुसार जांच में यह सामने आया है कि जिस समय इलाके में श्रमिक प्रदर्शन और हिंसा हो रही थी, उसी दौरान दो X (ट्विटर) हैंडल्स पाकिस्तान से सक्रिय रूप से इस पूरे घटनाक्रम पर पोस्ट कर रहे थे और भड़काऊ सामग्री साझा कर रहे थे, जिससे मजदूरों को उकसाने का प्रयास किया गया. पुलिस का कहना है कि यह कोई अचानक हुआ आंदोलन नहीं था बल्कि पहले से तैयार की गई एक संगठित गतिविधि थी, जिसमें सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप और डिजिटल डाटा बेस का इस्तेमाल कर लोगों को एकत्रित और प्रभावित किया गया. जांच में यह भी सामने आया कि 9 और 10 अप्रैल को QR कोड के जरिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए और इसके बाद 10 अप्रैल को श्रमिकों ने आंदोलन शुरू किया, जबकि 11 अप्रैल को उन्हें सड़क जाम के लिए उकसाया गया, हालांकि उसी दिन शांतिपूर्ण समझौता भी हो गया था, लेकिन इसके बावजूद भड़काऊ भाषण और ऑनलाइन पोस्ट के जरिए माहौल को फिर से गर्म करने की कोशिश की गई. पुलिस के अनुसार 13 अप्रैल को मदरसन कंपनी के सामने भीड़ को इकट्ठा करने के लिए फिर से सोशल मीडिया पर अपील की गई और इसी दौरान दो X हैंडल्स से गलत सूचना फैलाने की पुष्टि हुई, जिनके बारे में दावा किया गया है कि वे पाकिस्तान से VPN के जरिए ऑपरेट हो रहे थे. नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह पूरा मामला मेलाफाइड इंटेंशन के तहत की गई संगठित गतिविधि है और इसमें कुछ स्थानीय लोगों की भूमिका भी सामने आई है, जिनमें मनीषा चौहान, रूपेश राय और आदित्य आनंद जैसे नाम शामिल हैं, जिन पर भीड़ को भड़काने और प्रदर्शन को हिंसक बनाने के आरोप हैं. पुलिस के अनुसार रूपेश राय और आदित्य आनंद लंबे समय से विभिन्न विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रहे हैं और 2018 तथा 2020 से लगातार ऐसे आंदोलनों में शामिल पाए गए हैं, जबकि आदित्य अभी फरार है. जांच में यह भी पता चला है कि 31 मार्च और 1 अप्रैल को इलाके में गतिविधियों की योजना बनाई गई थी और इसके बाद 13 अप्रैल को हिंसा भड़काने की कोशिश की गई, जिसके दौरान पुलिस पर हमला, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आईं. पुलिस ने अब तक इस मामले में 13 एफआईआर दर्ज की हैं और 62 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें आगजनी और पुलिस पर हमले में शामिल लोग भी हैं, जिनमें कई बाहरी तत्व और गैर-श्रमिक व्यक्ति शामिल बताए जा रहे हैं. अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि आगे इस मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि जांच में इसे एक सुनियोजित और बाहरी समर्थन वाली गतिविधि माना जा रहा है.