Manusmriti Debate: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मनुस्मृति को अपरिवर्तनीय बताया, काशी विद्वत परिषद की बैठक में पंचांग की विसंगतियों पर भी मंथन
रिपोर्ट: आशीष कुमार
वाराणसी में श्रीकाशी विद्वत परिषद न्यास की एक महत्वपूर्ण बैठक में मनुस्मृति के स्वरूप, उसमें संशोधन से जुड़ी चर्चाओं और पंचांगों में दिखाई देने वाली विसंगतियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। 22 अक्टूबर 2026 को केदारघाट स्थित श्री विद्या मठ में आयोजित इस बैठक में ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज का सान्निध्य रहा। बैठक की अध्यक्षता आचार्य कमलाकांत त्रिपाठी ने की। इसमें परिषद के विद्वानों ने विभिन्न धार्मिक और शास्त्रीय विषयों पर अपने विचार रखे तथा भविष्य में इन मुद्दों पर व्यापक स्तर पर चर्चा आयोजित करने की आवश्यकता जताई।
बैठक में मनुस्मृति में संशोधन को लेकर चल रही चर्चाओं पर विशेष रूप से विचार किया गया। परिषद के विद्वानों ने कहा कि इस विषय पर समाज में विभिन्न प्रकार की चर्चाओं के कारण भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। इसे ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया गया कि आगे भारत के प्रमुख विद्वानों की एक विशेष बैठक बुलाई जाएगी। इसके बाद एक बड़ी सभा आयोजित कर मनुस्मृति के मूल स्वरूप, उपलब्ध पांडुलिपियों और विभिन्न प्रकाशनों में मौजूद पाठांतरों पर विस्तृत विमर्श किया जाएगा।
प्रस्तावित सभा में देश-विदेश में उपलब्ध मनुस्मृति की पांडुलिपियों और प्रकाशित संस्करणों का अध्ययन करने पर जोर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि अलग-अलग प्रतियों में मूल पाठ, भाषा और शब्दों के स्तर पर क्या अंतर मौजूद हैं। बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि प्रमाणिक पांडुलिपियों और ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर विषय का अध्ययन किया जाना चाहिए, ताकि मनुस्मृति के स्वरूप को लेकर उठने वाले सवालों पर विद्वतापूर्ण तरीके से विचार किया जा सके।
आचार्य सुधाकर मिश्र ने इस कार्य के लिए विभिन्न संग्रहालयों से प्रमाणित पांडुलिपियां मंगाने का प्रस्ताव रखा। विद्वानों का मानना था कि उपलब्ध ऐतिहासिक सामग्री के व्यवस्थित अध्ययन से पाठ से जुड़े मतभेदों और व्याख्याओं को समझने में सहायता मिलेगी। परिषद इस विषय पर व्यापक विमर्श के माध्यम से समाज में उत्पन्न भ्रम को दूर करने का प्रयास करेगी। प्रस्तावित बैठक में यह प्रश्न भी विचार के लिए रखा जाएगा कि स्मृतियों में संशोधन करने का अधिकार किसे है और इस संबंध में शास्त्रीय परंपरा का क्या दृष्टिकोण है।
बैठक के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने मनुस्मृति को अपरिवर्तनीय बताते हुए उसके वास्तविक स्वरूप में बदलाव नहीं किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि देश के विशिष्ट विद्वानों को आमंत्रित कर इस विषय पर व्यापक चर्चा की जाएगी और मनुस्मृति के अपरिवर्तनीय होने के संबंध में स्पष्ट निर्णय लिया जाएगा। परिषद की ओर से इस मुद्दे पर विद्वानों की राय और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर आगे की प्रक्रिया निर्धारित करने की बात कही गई।
बैठक में पंचांग निर्माण से जुड़ी विसंगतियों पर भी गंभीरता से चर्चा हुई। विद्वानों ने कहा कि अलग-अलग पंचांगों में तिथियों को लेकर मतभेद सामने आने के कारण कई बार एक ही त्योहार अलग-अलग दिनों में मनाया जाता है। इससे आम लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनती है और धार्मिक आयोजनों की तिथियों को लेकर असमंजस पैदा होता है। परिषद ने इस समस्या का समाधान निकालने और पंचांगों में एकरूपता स्थापित करने के लिए ठोस कदम उठाने पर जोर दिया।
शंकराचार्य महाराज ने भी पंचांगों में मतभेद दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक में इस बात पर सहमति जताई गई कि धार्मिक तिथियों और पर्वों के निर्धारण से संबंधित विषयों पर विद्वानों के बीच समन्वय स्थापित किया जाना चाहिए, ताकि समाज को स्पष्ट और एकरूप जानकारी मिल सके। परिषद इस दिशा में आगे विचार-विमर्श कर समाधान तलाशने का प्रयास करेगी।
बैठक में परिषद की ओर से एक त्रैमासिक पत्रिका प्रकाशित करने का प्रस्ताव भी रखा गया। योगेश ब्रह्मचारी ने सुझाव दिया कि पत्रिका का नाम ‘विद्वन् मनोरंजिनी’ रखा जाए। इस पत्रिका के माध्यम से समय-समय पर सामने आने वाले धार्मिक, शास्त्रीय और अन्य विद्वतापूर्ण विषयों पर लेख प्रकाशित किए जाएंगे तथा विभिन्न सवालों का समाधान प्रस्तुत करने का प्रयास होगा। प्रस्ताव का उद्देश्य विद्वानों के विचारों और शास्त्रीय चर्चाओं को व्यवस्थित रूप से समाज तक पहुंचाना बताया गया।
इस महत्वपूर्ण बैठक में श्रीकाशी विद्वत परिषद न्यास के अध्यक्ष डॉ. परमेश्वर दत्त शुक्ल, उपाध्यक्ष आचार्य कमलाकांत त्रिपाठी, महामंत्री आचार्य शत्रुघ्न त्रिपाठी, आचार्य सुधाकर मिश्र, प्रोफेसर श्रीकृष्ण त्रिपाठी, उमापति उपाध्याय, पंडित महेंद्र पांडेय, गिरिश पांडेय, अवधराम पांडेय, प्रोफेसर शैलेश तिवारी और गिरीश दत्त पांडेय सहित अनेक विद्वान उपस्थित रहे। बैठक की जानकारी शंकराचार्य महाराज के मीडिया प्रभारी संजय पांडेय ने दी।





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