Fake CBI Raid: दिल्ली के प्रशांत विहार में कारोबारी के घर फर्जी CBI रेड की कोशिश, 7 गिरफ्तार; दिल्ली-मुंबई नेटवर्क की जांच
Fake CBI Raid: दिल्ली के प्रशांत विहार में कारोबारी के घर फर्जी CBI रेड की कोशिश, 7 गिरफ्तार; दिल्ली-मुंबई नेटवर्क की जांच
नई दिल्ली। दिल्ली के प्रशांत विहार इलाके में खुद को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का अधिकारी बताकर एक कारोबारी के घर कथित तौर पर फर्जी छापेमारी करने पहुंचे गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। मामले में अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। शुरुआत में पुलिस ने तीन आरोपियों को पकड़ा था, जिसके बाद पूछताछ और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर चार अन्य आरोपियों तक पहुंचकर उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस की जांच में मामला केवल प्रशांत विहार की एक घटना तक सीमित नहीं रहने के संकेत मिले हैं। आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच के दौरान दिल्ली और मुंबई में CBI, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य सरकारी जांच एजेंसियों के अधिकारी बनकर कथित तौर पर की गई दूसरी छापेमारी से जुड़े वीडियो मिलने का दावा किया गया है। पुलिस अब इन वीडियो की सत्यता और उनमें दिखाई देने वाले संभावित पीड़ितों की पहचान करने में जुटी है।
पुलिस उपायुक्त शशांक जायसवाल के मुताबिक, घटना 11 अगस्त की रात करीब 10 बजे की है। छह पुरुष और दो महिलाएं कारोबारी प्रथम अग्रवाल के घर पहुंचे थे। आरोप है कि इन लोगों ने खुद को CBI अधिकारी बताया और कथित पहचान पत्र दिखाकर घर की तलाशी लेने की कोशिश की।
परिवार को आरोपियों की गतिविधियों पर संदेह हुआ। कारोबारी की मां ने कथित अधिकारियों से तलाशी वारंट और कार्रवाई से संबंधित अधिकृत दस्तावेज दिखाने को कहा। आरोप है कि दस्तावेज मांगने पर गिरोह के सदस्य परिवार को धमकाने लगे।
करीब डेढ़ घंटे तक घर के बाहर हंगामे जैसी स्थिति बनी रही। इस दौरान आसपास के लोग भी वहां पहुंच गए। पड़ोसियों के हस्तक्षेप के बाद कथित अधिकारी यह कहते हुए वहां से चले गए कि तलाशी से संबंधित नोटिस उनकी गाड़ी में रखा हुआ है।
आरोपियों के चले जाने के बाद परिवार ने पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस को शिकायतकर्ता के पिता के मोबाइल फोन पर भेजे गए कथित CBI नोटिस का स्क्रीनशॉट भी मिला। इस मामले में 19 अगस्त को प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई।
जांच के दौरान पुलिस ने कारोबारी के घर और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। इसके साथ ही आरोपियों की ओर से कथित तौर पर भेजे गए फर्जी नोटिस और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की गई। तकनीकी निगरानी और लगातार जुटाई गई जानकारियों के आधार पर पुलिस संदिग्धों तक पहुंची।
सबसे पहले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। उनसे पूछताछ और बरामद इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद चार अन्य संदिग्धों की पहचान सामने आई। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया। इस तरह मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या सात हो गई।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जम्मू-कश्मीर निवासी आसिफा, पूर्व बार-रेस्तरां गायिका पूजा अग्रवाल, दिलशाद गार्डन निवासी 63 वर्षीय पूर्व बैंककर्मी कुलदीप शर्मा, अशोक नगर निवासी इलेक्ट्रॉनिक्स रिपेयर का काम करने वाले चंदर प्रकाश शर्मा, दुर्गापुर निवासी शुभम उर्फ गोलू, मानसरोवर पार्क निवासी राजवीर सिंह और अशोक नगर निवासी नितिन शर्मा के रूप में बताई गई है।
पुलिस के अनुसार, आसिफा आठवीं कक्षा तक पढ़ी है और पहले होटल चलाती थी। पुलिस की जांच में आसिफा और कुलदीप शर्मा की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस ने दोनों को कथित गिरोह का मास्टरमाइंड बताया है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से आठ मोबाइल फोन, CBI के मोनोग्राम वाले कपड़े और कथित फर्जी पहचान पत्रों के स्क्रीनशॉट बरामद करने का दावा किया है। मोबाइल फोन में मिले डेटा की जांच के दौरान पुलिस को कई महत्वपूर्ण वीडियो भी मिले हैं।
पुलिस के मुताबिक, कुछ वीडियो में आरोपी दिल्ली और मुंबई में CBI, ED और अन्य सरकारी जांच एजेंसियों के अधिकारी बनकर कथित कार्रवाई करते दिखाई दे रहे हैं। अब जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि ये वीडियो वास्तव में किन स्थानों पर बनाए गए और क्या वहां लोगों से पैसे या अन्य कीमती सामान की वसूली की गई थी।
इन वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस को आशंका है कि गिरोह ने इसी तरीके से अन्य लोगों को भी निशाना बनाया हो सकता है। पुलिस संभावित पीड़ितों की पहचान करने के साथ आरोपियों के पिछले तीन से चार महीनों की गतिविधियों को खंगाल रही है।
पूछताछ में कथित तौर पर सामने आया है कि गिरोह के कई सदस्यों की मुलाकात करीब आठ महीने पहले एक शादी समारोह में हुई थी। इसी दौरान आसिफा और पूजा अग्रवाल की पहचान कुलदीप शर्मा से हुई थी। आरोप है कि दोनों ने खुद को CBI से जुड़ा हुआ बताकर अपनी पहचान बनाई।
पुलिस के अनुसार, कुलदीप शर्मा को कारोबारी प्रथम अग्रवाल और उनके परिवार से संबंधित कुछ जानकारी थी। आरोप है कि उसने आसिफा को कारोबारी परिवार के घर और संपत्ति से संबंधित जानकारी दी, जिसके आधार पर परिवार को निशाना बनाकर बड़ी रकम वसूलने की योजना तैयार की गई।
इसके बाद आसिफा और पूजा ने कथित फर्जी छापेमारी की योजना बनाई। पुलिस की जांच के मुताबिक, पूजा अग्रवाल ने अपने जीजा चंदर प्रकाश शर्मा के माध्यम से अन्य लोगों को इस योजना में शामिल किया। धीरे-धीरे कई लोगों को अलग-अलग भूमिकाएं देकर कथित फर्जी जांच टीम तैयार की गई।
पुलिस का दावा है कि आसिफा पुलिस और सेना की पृष्ठभूमि वाले कुछ लोगों के संपर्क में रही थी और खुद को ऐसे कर्मचारियों से जुड़ा बताकर दूसरे लोगों पर प्रभाव डालने की कोशिश करती थी। इससे कथित फर्जी जांच एजेंसी की कहानी को विश्वसनीय बनाने में मदद मिलती थी।
पूछताछ में शुभम, राजवीर और नितिन ने कथित तौर पर बताया कि उन्हें प्रत्येक फर्जी छापेमारी में शामिल होने के बदले पैसे दिए जाते थे। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपियों को प्रत्येक वारदात के लिए कितनी रकम मिलती थी और अब तक गिरोह ने कितनी रकम वसूली।
जांच में फर्जी पहचान पत्र और सरकारी एजेंसियों से जुड़े दस्तावेज तैयार करने वाले लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि CBI और दूसरी एजेंसियों के नाम से इस्तेमाल किए जा रहे कथित दस्तावेज कहां और किसके द्वारा तैयार किए गए थे।
इसके अलावा आरोपियों के बैंक खातों और आर्थिक लेनदेन की जांच की जा रही है। अगर गिरोह ने दिल्ली या मुंबई में इसी तरीके से अन्य लोगों से पैसे वसूले हैं तो उस रकम के लेनदेन और अंतिम लाभार्थियों की पहचान करने की कोशिश की जाएगी।
मामले में पुलिस को दो अन्य सिख युवकों की भी तलाश बताई जा रही है। उनकी पहचान और गिरोह में उनकी कथित भूमिका की जांच की जा रही है। उनकी गिरफ्तारी के बाद नेटवर्क के बारे में और जानकारी सामने आने की संभावना है।
पुलिस अब पूरे मामले की कड़ियां जोड़कर यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने पिछले कुछ महीनों में कितनी फर्जी रेड कीं, कितने लोगों को निशाना बनाया और दिल्ली-मुंबई के अलावा किसी अन्य शहर में भी इस तरह की वारदात को अंजाम दिया गया या नहीं।