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CEC Gyanesh Kumar Impeachment: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का नया प्रस्ताव आया तो नियमों के तहत होगी कार्रवाई, बोले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला

मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' द्वारा संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने की बढ़ती तैयारियों के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद की संवैधानिक स्थिति और विधिक प्रक्रि...

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CEC Gyanesh Kumar Impeachment: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का नया प्रस्ताव आया तो नियमों के तहत होगी कार्रवाई, बोले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला

मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ द्वारा संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने की बढ़ती तैयारियों के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद की संवैधानिक स्थिति और विधिक प्रक्रिया को पूरी तरह स्पष्ट किया है। लोकसभा अध्यक्ष ने गुरुवार को संवाददाताओं से बातचीत करते हुए दो टूक कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक राजनीतिक दल और सांसद को अपनी बात रखने और नोटिस देने का अधिकार है। यदि विपक्ष की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नियमानुसार कोई नया प्रस्ताव या नोटिस प्रस्तुत किया जाता है, तो संसद के प्रक्रिया संचालन नियमों और स्थापित संवैधानिक प्रावधानों के तहत ही आवश्यक विचार और कार्रवाई की जाएगी।

ओम बिरला ने रेखांकित किया कि भारतीय संविधान में मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की व्यवस्था बेहद सख्त और उच्च स्तर की है, जो सीधे तौर पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की महाभियोग प्रक्रिया के समतुल्य है। संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल ‘साबित कदाचार’ या ‘अक्षमता’ के आधार पर संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत यानी उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन से ही हटाया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल राजनीतिक बयानबाजी या नोटिस देने भर से किसी संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति को नहीं हटाया जा सकता, बल्कि इसके लिए विधिवत जांच समिति का गठन, आरोपों की पुष्टि और दोनों सदनों में गहन बहस की अनिवार्य प्रक्रिया से गुजरना होता है।

गौरतलब है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और हालिया विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आयोग पर सत्तारूढ़ दल के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया है। इससे पूर्व मार्च और 24 अप्रैल को भी राज्यसभा में 73 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ नोटिस दिया गया था, जिसे पीठासीन अधिकारियों ने नियमों के अनुरूप न पाकर अस्वीकार कर दिया था। लोकसभा अध्यक्ष ने इस अवसर पर संसद के सत्रावसान और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा से संबंधित रिपोर्ट पर भी संक्षिप्त टिप्पणी करते हुए कहा कि संसदीय संस्थाएं पूरी तरह संविधान के सिद्धांतों और विधिक मर्यादाओं के दायरे में रहकर ही अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करती हैं।

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