Budgam Encounter: बडगाम में लश्कर कमांडर हाशिम मूसा ढेर, पूर्व पाकिस्तानी SSG कमांडो था आतंकी

Budgam Encounter: बडगाम में लश्कर कमांडर हाशिम मूसा ढेर, पूर्व पाकिस्तानी SSG कमांडो था आतंकी

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। यूसमर्ग के कोराग इलाके में मंगलवार देर रात शुरू हुए ऑपरेशन में लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडर मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा को मार गिराया गया। सुरक्षाबलों के मुताबिक, मुठभेड़ के बाद तलाशी अभियान के दौरान मूसा का शव बरामद किया गया। उसके पास से युद्ध जैसे सामान भी बरामद होने की जानकारी सामने आई है।

भारतीय सेना के चिनार कॉर्प्स के मुताबिक, खुफिया जानकारी के आधार पर सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ ने यूसमर्ग के कोराग इलाके में संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया था। इस दौरान सुरक्षाबलों को संदिग्ध गतिविधि दिखाई दी। जवानों ने संदिग्धों को चुनौती दी तो आतंकियों की ओर से गोलीबारी शुरू कर दी गई। इसके बाद सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ शुरू हुई, जिसमें एक आतंकी मारा गया। ऑपरेशन के बाद इलाके में तलाशी अभियान जारी रखा गया।

मारे गए आतंकी की पहचान मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा के रूप में हुई है। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, वह पाकिस्तान का रहने वाला था और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ था। रिपोर्टों के अनुसार वह वर्ष 2023 में जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ करने के बाद आतंकी नेटवर्क का हिस्सा बना और घाटी में सक्रिय रहा।

हाशिम मूसा की एक खास पहचान उसका पूर्व सैन्य बैकग्राउंड भी था। सुरक्षा एजेंसियों और अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्टों के मुताबिक, वह पाकिस्तान सेना के एलीट स्पेशल सर्विसेज ग्रुप यानी SSG में कमांडो के तौर पर काम कर चुका था। रिपोर्टों के अनुसार उसने करीब 23 साल पाकिस्तान सेना में सेवा की और हवलदार के पद से मार्च 2023 में रिटायर हुआ था।

रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान सेना में सेवा के दौरान मूसा की तैनाती पूर्व पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की सुरक्षा टीम में भी रही थी। इसके अलावा उसने पाकिस्तान के अलग-अलग इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियानों में हिस्सा लिया था। उसके सैन्य अनुभव और विशेष प्रशिक्षण को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां उसे जम्मू-कश्मीर में सक्रिय एक महत्वपूर्ण विदेशी आतंकी मान रही थीं।

हाशिम मूसा का नाम 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की जांच के दौरान भी सामने आया था। रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों ने उसे इस मामले में प्रमुख संदिग्धों में शामिल किया था। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी के लिए 20 लाख रुपये के इनाम की घोषणा भी की थी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी की जांच में पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा और उससे जुड़े नेटवर्क की भूमिका सामने आने की बात कही गई थी।

सुरक्षा एजेंसियों ने मूसा को जम्मू-कश्मीर में हुए कई अन्य आतंकी हमलों से भी जोड़ा था। रिपोर्टों के मुताबिक, उसका नाम डेरा की गली हमले, गुलमर्ग हमले और पुंछ में भारतीय वायुसेना के काफिले पर हुए हमले की जांच में भी सामने आया था। हालांकि, इन मामलों में उसकी भूमिका से जुड़े दावों को सुरक्षा एजेंसियों और जांच रिपोर्टों के संदर्भ में ही देखा जा रहा है।

मूसा के मारे जाने के बाद सुरक्षाबलों ने इलाके में तलाशी अभियान और तेज कर दिया। अधिकारियों को आशंका थी कि क्षेत्र में अन्य आतंकियों की मौजूदगी हो सकती है। इसलिए ऑपरेशन के बाद भी आसपास के जंगलों और संदिग्ध स्थानों पर सर्च ऑपरेशन जारी रखा गया।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए हाशिम मूसा का मारा जाना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह लंबे समय से जम्मू-कश्मीर में सक्रिय एक विदेशी आतंकी के तौर पर सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर था। उसके पूर्व सैन्य प्रशिक्षण और लश्कर के साथ कथित जुड़ाव को देखते हुए उसकी तलाश लंबे समय से की जा रही थी। अब बडगाम के कोराग इलाके में ऑपरेशन के दौरान उसे मार गिराए जाने के बाद सुरक्षा बल पूरे क्षेत्र में अन्य संभावित आतंकियों की तलाश कर रहे हैं।

 

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