Ambala Building Collapse: 15 घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन, निर्माणाधीन इमारत हादसे में 6 की मौत, 12 घायल

Ambala Building Collapse: 15 घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन, निर्माणाधीन इमारत हादसे में 6 की मौत, 12 घायल

अंबाला। हरियाणा के अंबाला शहर के नजदीक धूलकोट गांव में रविवार को निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत ढहने से बड़ा हादसा हो गया। हादसे में अब तक छह मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 12 अन्य घायल हुए हैं। घटना के बाद मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और अन्य राहत दलों ने करीब 15 घंटे तक अभियान चलाया। रविवार देर रात अस्पताल में इलाज के दौरान दो और मजदूरों की मौत के बाद मृतकों की संख्या छह तक पहुंच गई।

बताया जा रहा है कि हादसा रविवार शाम करीब साढ़े तीन बजे उस समय हुआ, जब निर्माणाधीन भवन की पहली मंजिल पर छत के लिए कंक्रीट की स्लैब डालने का काम चल रहा था। निर्माण स्थल पर बड़ी संख्या में मजदूर काम कर रहे थे। इसी दौरान अचानक इमारत का हिस्सा भरभराकर नीचे आ गिरा और कई मजदूर मलबे में दब गए।

घटना के तुरंत बाद आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। पुलिस तथा प्रशासन को सूचना मिलने के बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, दमकल और अन्य आपातकालीन टीमों को घटनास्थल पर बुलाया गया। भारी मलबे के कारण राहत दलों को काफी चुनौती का सामना करना पड़ा। जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद से मलबा हटाकर एक-एक कर मजदूरों को बाहर निकाला गया।

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान कई मजदूरों को मलबे से बाहर निकालकर अंबाला सिटी अस्पताल भेजा गया। अस्पताल में चिकित्सकों ने कुछ मजदूरों को मृत घोषित किया, जबकि अन्य का इलाज शुरू किया गया। गंभीर रूप से घायल मजदूरों में से दो ने रविवार देर रात दम तोड़ दिया, जिसके बाद हादसे में मरने वालों की संख्या छह हो गई।

अधिकारियों के अनुसार इस दुर्घटना में कुल 12 लोग घायल हुए हैं। इनमें कुछ मजदूरों का इलाज अस्पताल में चल रहा है, जबकि अन्य को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। राहत और बचाव अभियान करीब 15 घंटे तक चला और मलबे में किसी अन्य व्यक्ति के फंसे होने की संभावना खत्म होने के बाद अभियान पूरा किया गया।

हादसे के बाद निर्माणाधीन भवन की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। मौके पर काम कर रहे एक मजदूर ने आरोप लगाया कि छत डालने से करीब दो दिन पहले शटरिंग की गई थी और उसकी स्थिति को लेकर उसने आपत्ति जताई थी। उसके मुताबिक शटरिंग सही तरीके से नहीं की गई थी, जिसके कारण उसने काम छोड़ दिया था। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

स्थानीय लोगों ने भी निर्माण कार्य में कथित जल्दबाजी और सुरक्षा नियमों की अनदेखी के आरोप लगाए हैं। हादसे के बाद पुलिस और प्रशासन ने निर्माण से जुड़े दस्तावेजों और अनुमति की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। पुलिस अधीक्षक अजीत शेखावत ने बताया कि इमारत के मालिक की जानकारी जुटाई जा रही है। यदि जांच में निर्माण अनधिकृत पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

हादसे की जांच में यह भी देखा जा रहा है कि निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। भवन का नक्शा, निर्माण की अनुमति, शटरिंग की स्थिति, इस्तेमाल की गई सामग्री और मौके पर मौजूद श्रमिकों की संख्या जैसे बिंदुओं की जांच की जा सकती है। इसके अलावा निर्माण एजेंसी और भवन मालिक की जिम्मेदारी भी जांच के दायरे में रहेगी।

घटना की सूचना मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस अधिकारी लगातार मौके पर मौजूद रहे। राहत कार्य के दौरान स्थानीय लोगों ने भी बचाव दलों की मदद की। मलबे के नीचे फंसे मजदूरों को खोजने के लिए राहत कर्मियों ने काफी सावधानी से अभियान चलाया, ताकि अंदर दबे लोगों तक सुरक्षित तरीके से पहुंचा जा सके।

हादसे के बाद मृतकों के परिवारों में शोक का माहौल है। जान गंवाने वाले मजदूरों में दूसरे राज्यों और अंबाला जिले के लोग भी शामिल बताए गए हैं। प्रशासन की ओर से मृतकों के परिजनों को सूचना देने और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने की कार्रवाई की जा रही है।

अस्पताल में भर्ती घायल मजदूरों के स्वास्थ्य पर भी डॉक्टर नजर बनाए हुए हैं। गंभीर रूप से घायल लोगों की स्थिति के अनुसार आगे का उपचार तय किया जा रहा है। प्रशासन की कोशिश है कि घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए और जरूरत पड़ने पर उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्रों में रेफर किया जाए।

निर्माणाधीन इमारत के अचानक गिरने की वजह फिलहाल पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। शुरुआती स्तर पर शटरिंग और निर्माण प्रक्रिया से जुड़ी संभावनाओं की जांच की जा रही है, लेकिन अंतिम कारण आधिकारिक जांच के बाद ही सामने आएगा। पुलिस और प्रशासन घटना से जुड़े सभी तथ्यों को जोड़ने में जुटे हैं।

अंबाला का यह हादसा निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों के पालन की जरूरत को एक बार फिर सामने लाता है। बड़े निर्माण कार्यों में संरचनात्मक सुरक्षा, पर्याप्त शटरिंग, गुणवत्ता वाली निर्माण सामग्री और श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है। प्रशासन की जांच से यह स्पष्ट होगा कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और इसके लिए जिम्मेदारी किस स्तर पर बनती है।

फिलहाल छह लोगों की मौत और 12 लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है। करीब 15 घंटे चले राहत अभियान के बाद बचाव कार्य पूरा कर लिया गया है। पुलिस निर्माणाधीन इमारत के मालिक और निर्माण प्रक्रिया से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही है तथा यह भी जांच कर रही है कि भवन के निर्माण के लिए आवश्यक अनुमति मौजूद थी या नहीं।

 

Leave A Reply

Your email address will not be published.