Dhanteras Gold Silver Sales: धनतेरस पर 66 हजार करोड़ रुपये की बिक्री का अनुमान, महंगे सोने के बीच हल्के गहनों और सिक्कों की बढ़ी मांग
नई दिल्ली। धनतेरस पर देशभर के सर्राफा बाजारों में खरीदारी का उत्साह दिखाई दे रहा है, लेकिन सोने-चांदी की ऊंची कीमतों ने ग्राहकों की पसंद और खर्च करने का तरीका बदल दिया है। खरीदार अब बजट के अनुसार हल्के आभूषण, कम कैरेट वाले गहने और छोटे सिक्के चुन रहे हैं। ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन यानी एआईजेजीएफ के मुताबिक, इस धनतेरस पर सोने-चांदी के गहनों और सिक्कों की बिक्री लगभग 66 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। संगठन ने बिक्री मूल्य में पिछले साल के मुकाबले करीब दस प्रतिशत बढ़ोतरी का अनुमान जताया है। यह संभावित कारोबार का आंकड़ा है, अंतिम बिक्री का परिणाम नहीं।
बाजार में इस बार बिक्री की रकम और बिकने वाली धातु की मात्रा के बीच अंतर महत्वपूर्ण है। सोने की कीमत अधिक होने पर कम वजन के आभूषण की खरीद पर भी ग्राहक पहले से ज्यादा रकम खर्च कर सकता है। इसलिए कारोबार का मूल्य बढ़ना अपने आप में अधिक मात्रा में सोना बिकने का प्रमाण नहीं है। धनतेरस के अनुमान को इसी अंतर के साथ समझना जरूरी है।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़े भी खरीदारी के बदलते स्वरूप की ओर इशारा करते हैं। जुलाई से सितंबर 2026 की तिमाही में भारत में सोने के आभूषणों की मांग पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत घटकर 99.9 टन रही। इसके बावजूद आभूषणों पर खर्च 16 प्रतिशत बढ़कर करीब एक लाख 48 हजार 700 करोड़ रुपये हो गया। यानी ग्राहकों ने वजन के हिसाब से कम सोना खरीदा, लेकिन उसके लिए अधिक पैसे चुकाए।
साल के पहले नौ महीनों में भी यही स्थिति दिखाई दी। इस अवधि में सोने के आभूषणों की मांग लगभग 18 प्रतिशत घटी, जबकि खर्च में 29 प्रतिशत की वृद्धि हुई। ऊंची कीमतों के कारण ग्राहक अपने बजट में खरीदारी बनाए रखने के लिए गहनों का वजन और कैरेट बदल रहे हैं। शादी-ब्याह और त्योहारों की जरूरत बनी हुई है, लेकिन खरीदारी का फैसला अब कीमत और उपलब्ध बजट पर अधिक निर्भर हो रहा है।
हाल के दिनों में सोने की कीमतों में आई नरमी ने बाजार को कुछ राहत दी है। जिन ग्राहकों ने ऊंचे भाव के कारण खरीदारी टाल रखी थी, उनमें दोबारा दुकानों पर आने का रुझान दिखाई दिया है। आभूषण कारोबारियों के अनुसार, त्योहारी और शादी के मौसम में ग्राहकों की आवाजाही तथा पूछताछ के बाद खरीदारी करने वालों की संख्या में सुधार हो रहा है। हालांकि, कीमतों में हालिया कमी के बावजूद लोगों की खरीदने की क्षमता पर दबाव बना हुआ है।
इसी कारण हल्के वजन के गहनों की मांग महत्वपूर्ण बनी हुई है। ग्राहक ऐसे उत्पाद तलाश रहे हैं, जिनसे त्योहार की खरीदारी भी हो जाए और तय बजट भी बहुत न बढ़े। कुछ खरीदार बड़े सेट के स्थान पर छोटे आभूषण चुन रहे हैं, जबकि अन्य सिक्कों और कम वजन वाली वस्तुओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। कारोबारी संगठनों के मुताबिक, 14 और 18 कैरेट श्रेणी के आभूषणों में भी दिलचस्पी दिखाई दे रही है।
सोने के साथ चांदी के सिक्के और सजावटी वस्तुएं भी ग्राहकों को आकर्षित कर रही हैं। पारंपरिक उपहार तथा शुभ प्रतीकों वाली वस्तुओं की मांग बनी हुई है। कैट के अनुसार, धनतेरस पर देशभर में विभिन्न वस्तुओं का कुल कारोबार एक लाख करोड़ रुपये से अधिक रहने का अनुमान है। इसमें सोने-चांदी के अलावा अन्य क्षेत्रों की खरीदारी भी शामिल है। इसलिए कुल त्योहारी कारोबार और केवल कीमती धातुओं की बिक्री के आंकड़ों को अलग-अलग समझना होगा।
खरीदारी के माध्यम में भी बदलाव दिखाई दे रहा है। ज्वैलरी शोरूम के साथ अब ऑनलाइन और त्वरित डिलीवरी वाले प्लेटफॉर्म पर सोने-चांदी के सिक्के उपलब्ध हैं। छोटे वजन के उत्पादों ने ऐसे ग्राहकों को अतिरिक्त विकल्प दिया है, जो त्योहार पर सीमित बजट में खरीदारी करना चाहते हैं।
स्विगी इंस्टामार्ट के अनुसार, पिछले बारह महीनों में उसके प्लेटफॉर्म पर सोने की खरीदारी में सालाना आधार पर 258 प्रतिशत और चांदी की खरीदारी में 185 प्रतिशत वृद्धि दर्ज हुई। हालांकि, कंपनी की ओर से बताए गए आंकड़ों में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि वृद्धि ऑर्डर की संख्या, बिक्री की रकम या खरीदी गई मात्रा के आधार पर मापी गई है। किसी एक प्लेटफॉर्म के आंकड़े को पूरे भारतीय सर्राफा बाजार की वृद्धि के रूप में भी नहीं देखा जा सकता।
ऊंचे सोने का असर आभूषण कारोबारियों की पूंजी की जरूरत पर भी पड़ रहा है। महंगा स्टॉक खरीदने और बनाए रखने के लिए अधिक रकम लगती है। क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में संगठित आभूषण कारोबारियों की बिक्री मात्रा में चार से छह प्रतिशत तक कमी रह सकती है, जबकि ऊंची कीमतों के सहारे राजस्व में 21 से 23 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है।
क्रिसिल का आकलन बताता है कि मांग में फिलहाल स्थिरता आने के संकेत हैं, लेकिन इसे हर स्तर पर व्यापक सुधार नहीं माना जा सकता। ग्राहक कीमतों के प्रति संवेदनशील हैं और हल्के तथा कम कैरेट वाले आभूषणों की ओर बढ़ रहे हैं। कारोबारियों के सामने ग्राहकों के बजट के अनुरूप उत्पाद उपलब्ध कराने और महंगे स्टॉक की लागत संभालने की दोहरी चुनौती है।
इस धनतेरस के कारोबार का वास्तविक आकलन अंतिम बिक्री सामने आने के बाद होगा। इसमें रुपये में हुए कारोबार के साथ बिके सोने-चांदी की मात्रा भी महत्वपूर्ण रहेगी। फिलहाल बाजार के रुझान बताते हैं कि कीमती धातुएं खरीदने की परंपरा कायम है, लेकिन ग्राहक वजन, डिजाइन, शुद्धता और बजट को ध्यान में रखकर अपनी पसंद बदल रहे हैं।





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