ED Action on Anil Ambani: अनिल अंबानी समूह की 510 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच, दो चार्टर्ड विमान और छह जमीन के प्लॉट भी कार्रवाई के दायरे में
नई दिल्ली। उद्योगपति अनिल अंबानी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में रिलायंस अनिल अंबानी समूह की करीब 510 करोड़ रुपये की अतिरिक्त संपत्तियां अटैच की हैं। मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को की गई इस कार्रवाई में दो चार्टर्ड विमान, महाराष्ट्र में छह जमीन के प्लॉट, एक कार्यालय परिसर, तमिलनाडु में दो पवन चक्कियां, बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट, निवेश और अन्य वित्तीय संपत्तियां शामिल हैं। इस नई कार्रवाई के बाद अनिल अंबानी समूह के खिलाफ विभिन्न मामलों में अब तक अटैच या जब्त की गई संपत्तियों का कुल मूल्य करीब 23,100 करोड़ रुपये पहुंच गया है।
ईडी के मुताबिक, यह कार्रवाई दो अलग-अलग बैंक धोखाधड़ी मामलों से संबंधित है। पहला मामला रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCOM) से जुड़ा है, जबकि दूसरा मामला रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) से संबंधित है। एजेंसी ने रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस से जुड़े मामले में 263.05 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की हैं। वहीं, रिलायंस कम्युनिकेशंस के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में 247.12 करोड़ रुपये की संपत्तियों पर कार्रवाई की गई है। दोनों मामलों की कुल राशि 510.17 करोड़ रुपये है।
रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े मामले में ईडी ने दो चार्टर्ड विमानों, महाराष्ट्र में छह जमीन के प्लॉट और एक कार्यालय परिसर को अटैच किया है। वहीं, रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस से जुड़े मामले में तमिलनाडु स्थित दो विंडमिल यानी पवन ऊर्जा संयंत्रों के अलावा बैंक खातों में जमा रकम, फिक्स्ड डिपॉजिट, निवेश और अन्य वित्तीय प्राप्तियों को कार्रवाई के दायरे में लिया गया है। एजेंसी ने इन संपत्तियों को कथित वित्तीय अनियमितताओं और बैंक धोखाधड़ी से जुड़े मामलों की जांच के दौरान चिह्नित किया है।
ईडी ने बताया कि अनिल अंबानी समूह के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और दिल्ली तथा मुंबई की आर्थिक अपराध शाखाओं की ओर से दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। इसके अलावा एजेंसी ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत भी दो मामलों की जांच की है। जांच के दायरे में रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस होम फाइनेंस, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर, रिलायंस पावर और रिलायंस कैपिटल जैसी कंपनियां शामिल हैं।
जांच एजेंसी का आरोप है कि समूह से जुड़ी कंपनियों के माध्यम से बैंकों और वित्तीय संस्थानों से प्राप्त सार्वजनिक धन का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया। ईडी के मुताबिक, जांच में रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजने, दिवाला एवं दिवालियापन संहिता (IBC) के प्रावधानों का कथित गलत इस्तेमाल कर कॉरपोरेट संपत्तियों को व्यक्तिगत उपयोग के लिए सुरक्षित करने और भारत से विदेशों में स्थित टैक्स हैवन तक धन पहुंचाने जैसे पहलुओं की जानकारी सामने आई है। एजेंसी का यह भी आरोप है कि धन का एक बड़ा हिस्सा प्रमोटरों और उनके परिवार के सदस्यों के व्यक्तिगत लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया। ये जांच एजेंसी के आरोप हैं, जिनका अंतिम न्यायिक निर्धारण होना बाकी है।
ईडी के अनुसार, इन मामलों में अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत छह अभियोजन शिकायतें भी दाखिल की हैं। इसके अलावा विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के तहत एक अलग शिकायत दर्ज की गई है। एजेंसी विभिन्न कंपनियों के वित्तीय लेनदेन, बैंकिंग रिकॉर्ड, संपत्तियों के स्वामित्व और कथित तौर पर धन के इस्तेमाल से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।
इससे पहले भी अनिल अंबानी समूह से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ अलग-अलग जांच एजेंसियां कार्रवाई कर चुकी हैं। इन मामलों में बैंक ऋण, वित्तीय लेनदेन और कथित तौर पर धन के डायवर्जन से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है। 3 नवंबर की ताजा कार्रवाई से समूह के खिलाफ ईडी की जांच का दायरा और बढ़ गया है। हालांकि, संपत्तियों को अटैच किया जाना जांच के तहत की गई कार्रवाई है और इसे किसी व्यक्ति या कंपनी के खिलाफ दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं माना जा सकता।
अब जांच एजेंसी का अगला फोकस अटैच की गई संपत्तियों से जुड़े वित्तीय दस्तावेजों, उनके वास्तविक स्वामित्व और कथित बैंक धोखाधड़ी से उनके संबंधों की पड़ताल पर रहेगा। करीब 23,100 करोड़ रुपये की संपत्तियों पर अब तक हुई कार्रवाई के बीच अनिल अंबानी समूह के मामलों में आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच के नतीजों पर सबकी नजर बनी हुई है।





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