Delhi Air Pollution: दिल्ली के प्रदूषण पर BJP और AAP में टकराव, मनजिंदर सिरसा ने पंजाब सरकार पर लगाए पराली जलवाने के आरोप, सौरभ भारद्वाज का पलटवार
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) और आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर पराली जलाने की घटनाओं को रोकने में नाकाम रहने और कथित तौर पर उन्हें बढ़ावा देने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में पुलिसकर्मी और सरकारी अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने इन आरोपों का जवाब देते हुए दिल्ली की भाजपा सरकार पर प्रदूषण के वास्तविक स्तर को कम दिखाने के लिए एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों की लोकेशन को लेकर सवाल उठाए हैं।
मंगलवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि पंजाब में पराली जलाने की एक हजार से अधिक घटनाएं सामने आने के बावजूद केवल 271 एफआईआर दर्ज की गई हैं और उनमें भी अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में पुलिस और प्रशासन पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के बजाय प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। सिरसा ने दावा किया कि कुछ स्थानों पर पंजाब पुलिस के जवान और सरकारी अधिकारी भी खेतों में आग लगाने की गतिविधियों में शामिल हैं। अपने आरोपों के समर्थन में उन्होंने एक वीडियो भी दिखाया, जिसमें कथित तौर पर खेतों में पराली जलाने की घटनाएं दिखाई गई थीं। हालांकि, ये आरोप दिल्ली के मंत्री की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
सिरसा ने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अध्यक्ष रीना गुप्ता की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि रीना गुप्ता पहले आम आदमी पार्टी की प्रवक्ता रही हैं और उनका तकनीकी पृष्ठभूमि से संबंध नहीं है। सिरसा ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार ने पराली जलाने की घटनाओं को नियंत्रित करने में सफलता के दावे को प्रचारित करने के लिए विज्ञापनों पर करीब 20 से 25 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। उनका कहना था कि एक तरफ सरकार पराली जलाने की घटनाएं कम होने का दावा कर रही है, जबकि दूसरी तरफ राज्य में बड़ी संख्या में खेतों में आग लगने की घटनाएं दर्ज हो रही हैं।
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि 2 नवंबर को सात राज्यों में फसल अवशेष जलाने की कुल 219 घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें पंजाब में सबसे अधिक 98 घटनाएं सामने आईं। इसके बाद राजस्थान में 67, मध्य प्रदेश में 48, उत्तर प्रदेश में चार और हरियाणा में दो घटनाएं दर्ज की गईं। वहीं, 15 सितंबर से 2 नवंबर तक सात राज्यों में पराली और फसल अवशेष जलाने की कुल 3,535 घटनाएं सामने आईं, जिनमें पंजाब की हिस्सेदारी 1,612 घटनाओं की रही। इन आंकड़ों को लेकर दिल्ली सरकार और पंजाब सरकार के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
दिल्ली की वायु गुणवत्ता का जिक्र करते हुए सिरसा ने कहा कि सोमवार शाम राजधानी का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 324 तक पहुंच गया था। इसके बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण के प्रतिबंध लागू कर दिए। मौसम विभाग के पूर्वानुमान का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब और हरियाणा में खेतों में लगाई जा रही आग का धुआं अगले दो से तीन दिनों में दिल्ली-NCR की हवा को और प्रभावित कर सकता है। सिरसा ने यह भी दावा किया कि दिल्ली में अक्टूबर के दौरान पिछले एक दशक की सबसे साफ हवा दर्ज की गई थी।
दिल्ली सरकार की ओर से प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए सिरसा ने गैर-BS-VI मानक वाले वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध का बचाव किया। उन्होंने बताया कि सीमाओं पर करीब 12 हजार वाहनों की जांच की गई, जिनमें से लगभग 1,200 वाहनों को वापस भेजा गया। उनके मुताबिक, प्रदूषण कम करने के लिए वाहन उत्सर्जन पर नियंत्रण और अन्य उपायों पर काम किया जा रहा है। सिरसा ने आम आदमी पार्टी के नेताओं पर दिल्ली में सत्ता गंवाने के बाद राजनीतिक आरोप लगाने का भी आरोप लगाया।
वहीं, आम आदमी पार्टी की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने सिरसा के आरोपों पर पलटवार करते हुए भाजपा सरकार की प्रदूषण नियंत्रण नीति पर सवाल उठाए। भारद्वाज ने आरोप लगाया कि दिल्ली में एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों को ऐसे स्थानों पर लगाया जा रहा है, जहां हरियाली अधिक है और वाहनों की आवाजाही कम रहती है। उन्होंने कहा कि जंगलों और संस्थागत परिसरों जैसे इलाकों में नए मॉनिटरिंग स्टेशन स्थापित करने से प्रदूषण का औसत आंकड़ा कम दिखाई दे सकता है, जबकि आम लोगों को सड़कों और रिहायशी इलाकों में प्रदूषण का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकारी AQI आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल आंकड़े कम दिखाने से हवा साफ नहीं हो जाएगी।
भारद्वाज ने भाजपा सरकार से पूछा कि यदि दिल्ली में प्रदूषण की समस्या बनी हुई है तो उसे कम करने के लिए वास्तविक स्तर पर क्या कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अपनी नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए पंजाब के किसानों और पराली जलाने की घटनाओं को जिम्मेदार ठहरा रही है। आम आदमी पार्टी की ओर से यह भी दावा किया गया कि पंजाब में भगवंत मान सरकार ने किसानों के सहयोग से पराली जलाने की घटनाओं में पहले की तुलना में बड़ी कमी की है। पार्टी नेताओं ने भाजपा शासित राज्यों में भी फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर ध्यान देने की मांग की।
इस राजनीतिक टकराव के बीच दिल्ली की हवा की गुणवत्ता और पराली जलाने की घटनाएं एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। एक ओर दिल्ली सरकार पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं को राजधानी के प्रदूषण का प्रमुख कारण बता रही है, वहीं आम आदमी पार्टी स्थानीय प्रदूषण स्रोतों और दिल्ली सरकार की तैयारियों पर सवाल उठा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली-NCR में प्रदूषण के स्तर पर मौसम, हवा की गति, स्थानीय उत्सर्जन, वाहनों का धुआं, निर्माण गतिविधियां और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने जैसी कई परिस्थितियों का प्रभाव पड़ता है। ऐसे में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए अलग-अलग स्रोतों पर एक साथ प्रभावी कार्रवाई जरूरी है।





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