नई दिल्ली। देश के चर्चित ठग सुकेश चंद्रशेखर को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। अदालत ने वर्ष 2017 के भ्रष्टाचार से जुड़े एक मामले में सुकेश को हिरासत से रिहा करने का आदेश दिया है। अदालत ने पाया कि इस मामले में वह निर्धारित अधिकतम सजा से भी अधिक समय जेल में बिता चुका है। विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) विद्या प्रकाश ने 28 अक्टूबर को पारित आदेश में निर्देश दिया कि सुकेश उर्फ सुकाश चंद्रशेखर को इस मामले में मुकदमे की कार्यवाही के दौरान हिरासत में न रखा जाए और यदि वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे तत्काल रिहा किया जाए। हालांकि, इस आदेश का मतलब यह नहीं है कि सुकेश पूरी तरह जेल से बाहर आ जाएगा। उसके खिलाफ दूसरे राज्यों में कई अन्य आपराधिक मामले भी लंबित हैं और उन मामलों में जरूरत होने पर उसकी हिरासत जारी रह सकती है।
अदालत में सुकेश चंद्रशेखर की ओर से अधिवक्ता अनंत मलिक ने रिहाई के लिए याचिका दाखिल की थी। इसमें दलील दी गई कि आरोपी इस मामले में कानून के तहत निर्धारित अधिकतम सजा की अवधि से अधिक समय न्यायिक हिरासत में बिता चुका है। याचिका में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 436-A, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 479 और संविधान के अनुच्छेद 21 के प्रावधानों का हवाला दिया गया। बचाव पक्ष का कहना था कि किसी विचाराधीन कैदी को उस अपराध के लिए निर्धारित अधिकतम सजा से ज्यादा समय तक जेल में रखना कानून के अनुरूप नहीं है। अदालत ने दलीलों और जेल अधिकारियों की ओर से पेश रिकॉर्ड पर विचार करने के बाद रिहाई का आदेश दिया।
जेल अधिकारियों की ओर से अदालत में प्रस्तुत नॉमिनल रोल के मुताबिक, 27 अक्टूबर 2026 तक सुकेश चंद्रशेखर इस मामले में कुल 8 साल, 9 महीने और 14 दिन हिरासत में बिता चुका था। इस अवधि की गणना करते समय पैरोल और अंतरिम जमानत पर बाहर रहने के समय को अलग रखा गया था। जबकि इस मामले में लगाए गए आरोपों के तहत अधिकतम सात साल की सजा का प्रावधान है। इस तरह सुकेश निर्धारित अधिकतम सजा से 1 साल, 9 महीने और 14 दिन अधिक समय जेल में बिता चुका था। अदालत ने इसी तथ्य को रिहाई के फैसले का महत्वपूर्ण आधार माना।
यह मामला वर्ष 2017 में दर्ज भ्रष्टाचार के मुकदमे से जुड़ा है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी और 24 अक्टूबर 2017 को सुकेश चंद्रशेखर को गिरफ्तार किया गया था। उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 12 और भारतीय दंड संहिता की धारा 120B के तहत आरोप लगाए गए थे। बाद में 13 अक्टूबर 2022 को अदालत ने इस मामले में उसके खिलाफ आरोप तय किए थे। इन धाराओं के तहत अधिकतम सात साल की सजा का प्रावधान है। मुकदमे की सुनवाई के दौरान सुकेश लगातार न्यायिक हिरासत में रहा और उसकी कुल हिरासत की अवधि निर्धारित अधिकतम सजा से आगे निकल गई।
अदालत ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण निर्णयों का भी उल्लेख किया। इनमें भीम सिंह बनाम भारत संघ, सतेन्द्र कुमार अंतिल बनाम सीबीआई और हुसैनारा खातून बनाम बिहार राज्य से जुड़े फैसले शामिल हैं। अदालत ने माना कि जब कोई विचाराधीन कैदी संबंधित अपराध के लिए कानून में निर्धारित अधिकतम सजा से भी अधिक समय जेल में बिता चुका हो, तो उसकी हिरासत जारी रखने का औचित्य नहीं रह जाता।
रिहाई का आदेश कुछ शर्तों के साथ लागू रहेगा। सुकेश को किसी भी गवाह से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संपर्क करने अथवा उसे प्रभावित करने की अनुमति नहीं होगी। उसे इसी तरह के किसी अन्य अपराध में शामिल नहीं होने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश छोड़कर जाने पर भी रोक रहेगी।





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