गुजरात के सूरत में बिना मान्य मेडिकल योग्यता के मरीजों का इलाज करने के आरोप में नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सूरत पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) और जिला स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने डिंडोली इलाके में नौ क्लीनिकों पर छापेमारी कर यह कार्रवाई की। अधिकारियों को सूचना मिली थी कि इलाके में कुछ लोग आवश्यक मेडिकल डिग्री और पंजीकरण के बिना खुद को डॉक्टर बताकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। इसके बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने संयुक्त रूप से जांच शुरू की।
पुलिस ने कार्रवाई से पहले संदिग्ध क्लीनिकों में डमी मरीज भेजकर जानकारी की पुष्टि की। शुरुआती जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद अलग-अलग टीमें बनाई गईं और नौ स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई। इस दौरान नौ लोगों को हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, क्लीनिकों से एलोपैथिक दवाइयां, इंजेक्शन, सिरप और इलाज में इस्तेमाल होने वाले विभिन्न मेडिकल उपकरण बरामद किए गए हैं।
जांच में सामने आया कि गिरफ्तार किए गए लोगों में से कई ने केवल 12वीं तक पढ़ाई की थी, जबकि कुछ के पास अन्य विषयों की डिग्री या मेडिकल क्षेत्र में सीमित अनुभव था। पुलिस का आरोप है कि इनमें से कुछ लोग पहले अस्पतालों में कंपाउंडर या अन्य सहायक कर्मचारियों के रूप में काम कर चुके थे। बाद में उन्होंने अपने क्लीनिक खोलकर मरीजों का इलाज करना शुरू कर दिया। हालांकि, मेडिकल क्षेत्र में पहले काम करने का अनुभव अपने आप में डॉक्टर के रूप में इलाज करने की मान्यता प्राप्त योग्यता नहीं माना जाता।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में रोहित पाटील शामिल है, जो डिंडोली के नवागाम इलाके में माउली क्लीनिक चला रहा था। वह कथित तौर पर पिछले तीन वर्षों से क्लीनिक संचालित कर रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि उसने पहले कंपाउंडर के रूप में काम किया था। पुलिस ने उसके बारे में यह भी जानकारी दी कि वर्ष 2024 में महाराष्ट्र के औरंगाबाद में नकली गर्भावस्था संबंधी दवा बेचने के मामले में भी उसे पकड़ा गया था। इस पुराने मामले की जानकारी पुलिस की ओर से सामने आई है।
इस कार्रवाई में परमानंद अलगु पटेल, आरतीदेवी रामकृपाल मौर्य, महेशभाई विठ्ठलभाई राजपूत, कमलाप्रसाद लोधी गोंड, सोपान प्रभुभाई पाटील, मनोहरलाल जवनलाल कुमावत, दिनेश बाबूराम भारती और किशोर कृष्णा विश्वास को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, ये लोग डिंडोली और नवागाम क्षेत्र में अलग-अलग नामों से क्लीनिक चला रहे थे। कुछ आरोपी कई वर्षों से इन क्लीनिकों का संचालन कर रहे थे, जबकि कुछ ने अपेक्षाकृत कम समय पहले ही अपना काम शुरू किया था।
जांच के दौरान आरोपियों की शैक्षणिक योग्यता और पहले के कार्य अनुभव से जुड़ी जानकारी भी जुटाई गई। पुलिस के अनुसार, कुछ आरोपी अस्पतालों में कंपाउंडर या नर्स के रूप में काम कर चुके थे। एक आरोपी ने इलेक्ट्रोपैथी की पढ़ाई करने की जानकारी दी, जबकि दूसरे के पास बी.फार्म से संबंधित शैक्षणिक पृष्ठभूमि बताई गई। पुलिस यह जांच कर रही है कि आरोपियों के पास किस तरह की योग्यता और पंजीकरण था तथा वे किन परिस्थितियों में मरीजों को एलोपैथिक दवाइयां दे रहे थे।
छापेमारी के दौरान पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कुल 95,138 रुपये मूल्य की दवाइयां, इंजेक्शन, सिरप और मेडिकल उपकरण जब्त किए। इस मामले में डिंडोली पुलिस थाने में केस दर्ज किया गया है। जिला स्वास्थ्य विभाग भी क्लीनिकों के संचालन और कथित अनधिकृत चिकित्सा गतिविधियों को लेकर क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत अलग से कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है।
बिना आवश्यक योग्यता के इलाज करने से मरीजों की सेहत को गंभीर खतरा हो सकता है। गलत दवा, गलत खुराक, बिना उचित जांच के इलाज या असुरक्षित इंजेक्शन के कारण बीमारी बढ़ सकती है और गंभीर स्थिति में सही उपचार मिलने में देरी हो सकती है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की कार्रवाई को मरीजों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगा।





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