Voter List Irregularities: पीलीभीत में मतदाता सूची में हेरफेर पर बड़ी कार्रवाई, दो एसडीएम और कंप्यूटर ऑपरेटर पर एफआईआर दर्ज
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में सदर विधानसभा क्षेत्र की निर्वाचक नामावली (मतदाता सूची) में बड़े पैमाने पर हुई कथित गड़बड़ियों और फर्जीवाड़े के मामले में निर्वाचन आयोग के कड़े रुख के बाद जिला प्रशासन ने बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। पीलीभीत की सदर सीट पर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान मतदाता रिकॉर्ड में अनधिकृत फेरबदल करने के गंभीर आरोप में दो उपजिलाधिकारियों (एसडीएम) मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी तथा वोटर रजिस्ट्रेशन सेंटर (वीआरसी) के संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार के खिलाफ कोतवाली नगर में आपराधिक प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। जिलाधिकारी आलोक कुमार ने इस विधिक कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि आयोग के निर्देश पर दोनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से उनके पदों से हटाकर जिला मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है, जबकि दोषी ऑपरेटर की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।
मामले का पर्दाफाश उस समय हुआ जब उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा को मतदाताओं की ओर से शिकायतें मिलीं कि राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल पर अपना मतदाता पहचान पत्र (एपिक) नंबर दर्ज करने पर पोर्टल पर किसी अज्ञात व्यक्ति का नाम, फोटो और पता प्रदर्शित हो रहा है। राज्य निर्वाचन कार्यालय के निर्देश पर कराई गई प्रारंभिक तकनीकी जांच में भारी विसंगतियों की पुष्टि हुई, जिसके बाद सहायक निर्वाचन अधिकारी की तहरीर पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया। आरोप है कि पूरनपुर के एसडीएम मयंक गोस्वामी और अमरिया के एसडीएम हेमंत चौधरी ने निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) के पद पर रहते हुए अपने दायित्वों में घोर लापरवाही बरती और बिना भौतिक सत्यापन के हजारों प्रविष्टियों को बदला। दोनों अधिकारियों के खिलाफ अब विभागीय और प्रशासनिक जांच भी शुरू कर दी गई है।
इस पूरे प्रकरण ने राज्य की सियासत में भी भूचाल ला दिया है और विपक्षी दलों ने चुनावी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस पार्टी ने दावा किया है कि अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद भी सुनियोजित ढंग से 13,150 वास्तविक मतदाताओं के नाम बदले गए, 884 जीवित मतदाताओं को सूची से गायब कर दिया गया और करीब 2600 बाहरी लोगों के नाम जोड़ दिए गए। समाजवादी पार्टी ने भी इसे सत्तारूढ़ दल के दबाव में किया गया प्रशासनिक षड्यंत्र करार देते हुए संपूर्ण मतदाता सूची का ऑडिट कराने की मांग की है। भारत निर्वाचन आयोग ने पीलीभीत की सभी विधानसभा सीटों के अलावा प्रदेश के अन्य जनपदों में भी मतदाता सूची के डिजिटाइजेशन और पुनरीक्षण की गहन समीक्षा के आदेश देते हुए दो दिनों में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।




