Building Collapse: करोल बाग में भरभराकर गिरी पुरानी दो मंजिला बिल्डिंग, मलबे में दबने से मजदूर की मौत; तीन घायल
Building Collapse: करोल बाग में भरभराकर गिरी पुरानी दो मंजिला बिल्डिंग, मलबे में दबने से मजदूर की मौत; तीन घायल
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के करोल बाग इलाके में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हो गया। रेगरपुरा के प्यारे लाल रोड पर स्थित एक पुरानी दो मंजिला इमारत का हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया। हादसे के समय इमारत में मरम्मत और तोड़फोड़ का काम चल रहा था और कई मजदूर वहां काम कर रहे थे। मलबे की चपेट में आने से शेख शमशाद नाम के एक मजदूर की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य मजदूर घायल हो गए।
घटना करोल बाग के रेगरपुरा इलाके में बिल्डिंग नंबर 3512 में हुई। बताया जा रहा है कि इमारत काफी पुरानी और जर्जर हालत में थी। इसे एक निजी ठेकेदार के माध्यम से गिराने और मरम्मत का काम कराया जा रहा था। इसी दौरान इमारत की एक दीवार और बड़ा हिस्सा अचानक ढह गया, जिसकी चपेट में वहां मौजूद मजदूर आ गए।
पुलिस और दमकल विभाग को शुक्रवार सुबह करीब 11 बजकर 15 मिनट पर बिल्डिंग गिरने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस और फायर सर्विस की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। मलबे में फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए तेजी से कार्रवाई की गई।
हादसे में कुल चार मजदूर प्रभावित हुए। इनमें शेख शमशाद मलबे में बुरी तरह दब गए थे। बचाव दल ने उन्हें बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज अस्पताल की मॉर्चरी में भेज दिया गया।
हादसे में मोहम्मद अयूब नाम का मजदूर गंभीर रूप से घायल हुआ है। उसके सिर में गंभीर चोट आने के साथ दाहिने हाथ में फ्रैक्चर होने की जानकारी सामने आई है। उसकी स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे आगे के उपचार के लिए राम मनोहर लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया।
तीसरे मजदूर शेख सैदुल के हाथ और पैर में चोटें आई हैं। उसे इलाज के लिए जीवन माला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं रफीक-उल नाम के चौथे मजदूर को मामूली चोट लगी। प्राथमिक उपचार के बाद वह घर चला गया।
हादसे के बाद घटनास्थल पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी जमा हो गए। पुलिस ने इलाके को सुरक्षित कर बचाव कार्य में किसी तरह की बाधा न आने देने के लिए लोगों को घटनास्थल से दूर किया। मलबे को हटाकर यह भी सुनिश्चित किया गया कि उसके नीचे कोई अन्य व्यक्ति फंसा न रह गया हो।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस पुरानी इमारत में तोड़फोड़ का काम चल रहा था, उसके लिए संबंधित एजेंसी से कथित तौर पर आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी। पुलिस अब इस दावे की विस्तृत जांच कर रही है और संबंधित विभागों से रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि बिल्डिंग काफी पुरानी थी और निजी ठेकेदार के माध्यम से उसे तोड़ने का काम किया जा रहा था। ऐसे में जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह होगा कि जर्जर इमारत को गिराने से पहले आवश्यक सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।
विशेष रूप से यह पता लगाया जा रहा है कि मजदूरों को हेलमेट और अन्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे या नहीं। इसके अलावा इमारत को चरणबद्ध तरीके से गिराने के लिए किसी विशेषज्ञ की निगरानी की व्यवस्था थी या सीधे मजदूरों से तोड़फोड़ कराई जा रही थी।
पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद बिल्डिंग के मालिकों और ठेकेदार को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। उनसे निर्माण और तोड़फोड़ के काम से संबंधित दस्तावेज, अनुमति और मजदूरों की सुरक्षा के लिए किए गए इंतजामों के बारे में जानकारी ली जा रही है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इमारत में मरम्मत का काम कराया जा रहा था या उसे पूरी तरह ध्वस्त किया जा रहा था। संबंधित नगर निकाय और अन्य एजेंसियों से यह जानकारी जुटाई जा सकती है कि बिल्डिंग की स्थिति को लेकर पहले कोई नोटिस जारी किया गया था या नहीं।
हादसे में एक मजदूर की मौत होने के बाद जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। जांच में यदि बिना अनुमति तोड़फोड़ कराने या मजदूरों की सुरक्षा में लापरवाही के सबूत सामने आते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
इस घटना ने राजधानी में पुरानी और जर्जर इमारतों में होने वाले निर्माण तथा तोड़फोड़ के दौरान मजदूरों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घनी आबादी वाले करोल बाग जैसे इलाके में किसी इमारत को गिराने के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी न केवल वहां काम कर रहे मजदूरों बल्कि आसपास रहने वाले लोगों के लिए भी खतरा पैदा कर सकती है।
फिलहाल पुलिस हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाने में जुटी है। घटनास्थल की स्थिति, इमारत की मजबूती, तोड़फोड़ की प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बिल्डिंग का हिस्सा अचानक क्यों गिरा और इसके लिए किस स्तर पर लापरवाही जिम्मेदार थी।