Turkman Gate Violence: तुर्कमान गेट हिंसा मामले में सोशल मीडिया पर शिकंजा, भड़काऊ पोस्ट करने वाली ऐमन रिजवी तलब, 10 इन्फ्लुएंसर्स जांच के घेरे में
Turkman Gate Violence: तुर्कमान गेट हिंसा मामले में सोशल मीडिया पर शिकंजा, भड़काऊ पोस्ट करने वाली ऐमन रिजवी तलब, 10 इन्फ्लुएंसर्स जांच के घेरे में
दिल्ली के मध्य इलाके तुर्कमान गेट में अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान भड़की हिंसा के मामले में अब जांच का दायरा सोशल मीडिया तक फैल गया है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए उन लोगों पर कार्रवाई शुरू कर दी है, जिन्होंने सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट और अफवाहें फैलाकर हालात को और तनावपूर्ण बनाया। पुलिस अब तक हिंसा और पत्थरबाजी के आरोप में 11 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है, जबकि 10 सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को रडार पर लिया गया है।
पुलिस ने गुरुवार को जामिया इलाके की रहने वाली ऐमन रिजवी को जांच में शामिल होने के लिए तलब किया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, ऐमन रिजवी ने तुर्कमान गेट और मस्जिद से जुड़ी कई आपत्तिजनक और भ्रामक पोस्ट सोशल मीडिया पर साझा की थीं। चूंकि उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स पर बड़ी संख्या में फॉलोअर्स हैं, इसलिए उनकी पोस्ट तेजी से वायरल हुईं और अफवाहों को हवा मिली। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इन पोस्ट्स का हिंसा भड़काने में कितना योगदान रहा।
दिल्ली पुलिस ने ऐसे 10 सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की पहचान की है, जिन्होंने घटना वाली रात गलत और भ्रामक जानकारियां साझा की थीं। इन सभी को समन भेजकर जांच में शामिल होने को कहा गया है। पुलिस का मानना है कि सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों ने भीड़ को उकसाने में अहम भूमिका निभाई, जिससे हालात बेकाबू हो गए।
गुरुवार को ही पुलिस ने तुर्कमान गेट इलाके से पत्थरबाजी के आरोप में 6 और लोगों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम अफान, आदिल, शाहनवाज, हमजा, अतहर और उबेद बताए गए हैं। एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस (सेंट्रल) निधिन वल्सन ने जानकारी दी कि अब तक कुल 11 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और सीसीटीवी फुटेज व वायरल वीडियो के आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान की जा रही है।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि हिंसा अचानक नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स की बड़ी भूमिका थी। करीब 4 से 5 व्हाट्सएप ग्रुप्स की पहचान की गई है, जिनमें “मस्जिद गिराई जा रही है” जैसी झूठी और भड़काऊ खबरें फैलाई गईं। इन संदेशों के बाद करीब 150 से 200 लोगों की भीड़ इकट्ठा हुई और पुलिस तथा एमसीडी कर्मचारियों पर पत्थर और कांच की बोतलों से हमला किया गया। इस हिंसा में एसएचओ सहित 5 पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
इस बीच नगर निगम ने साफ किया है कि अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान मस्जिद को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। एमसीडी के अनुसार, अभियान में करीब 36,000 वर्ग फुट जमीन खाली कराई गई, जिसमें एक डायग्नोस्टिक सेंटर और बैंक्वेट हॉल की दीवारें हटाई गईं। इलाके में शांति बनाए रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। पुलिस का कहना है कि मामले में दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और सोशल मीडिया के जरिए हिंसा फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।