Sadhvi Prem Baisa Death: साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत पर SIT गठित, जोधपुर पुलिस कमिश्नर के आदेश से गहन जांच शुरू

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Sadhvi Prem Baisa Death: साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत पर SIT गठित, जोधपुर पुलिस कमिश्नर के आदेश से गहन जांच शुरू

जोधपुर की प्रसिद्ध कथा वाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत के मामले ने राजस्थान भर में सनसनी फैला दी है। मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए जोधपुर पुलिस कमिश्नर ने विशेष जांच टीम यानी एसआईटी के गठन के आदेश दिए हैं। इस तीन सदस्यीय एसआईटी की अगुवाई एसीपी छवि शर्मा कर रही हैं। उनके साथ बोरनाडा थाने के थानाधिकारी शकील अहमद को टीम में शामिल किया गया है, जबकि जांच को तकनीकी और वैज्ञानिक आधार देने के लिए एक फॉरेंसिक विशेषज्ञ को भी एसआईटी का हिस्सा बनाया गया है। अब साध्वी प्रेम बाईसा की मौत से जुड़े हर पहलू की जांच यही विशेष टीम करेगी।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एसआईटी निष्पक्षता के साथ यह पता लगाएगी कि साध्वी की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई या इसके पीछे कोई अन्य वजह है। मेडिकल लापरवाही, दवाइयों या इंजेक्शन से जुड़ा पहलू, और घटनाक्रम से जुड़े सभी तथ्यों की बारीकी से जांच की जाएगी। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की सख्त कार्रवाई की जाएगी।

राजस्थान की चर्चित कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा का 30 जनवरी 2026 को उनके पैतृक गांव परेऊ, जिला बालोतरा में पूरे विधि-विधान के साथ समाधि संस्कार किया गया। उनके असामयिक निधन से गांव में शोक और श्रद्धा का माहौल रहा। अंतिम दर्शन के लिए दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत-महात्मा और ग्रामीण पहुंचे। साध्वी प्रेम बाईसा महज 25 वर्ष की थीं, लेकिन उन्होंने बहुत कम उम्र में धर्म और अध्यात्म की दुनिया में एक अलग पहचान बना ली थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साध्वी प्रेम बाईसा 27 जनवरी 2026 को अजमेर में कथा संपन्न कर जोधपुर के आरती नगर स्थित आश्रम लौटी थीं। लौटने के बाद उन्हें अचानक सांस लेने में तकलीफ महसूस हुई। आश्रम में मौजूद कंपाउंडर ने उन्हें इंजेक्शन लगाया, लेकिन हालत में सुधार न होने पर उन्हें पाल रोड स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद साध्वी की मौत को लेकर कई सवाल खड़े हो गए।

परिजनों की सहमति से पुलिस ने पोस्टमार्टम कराया और विसरा सैंपल जांच के लिए सुरक्षित रखे गए हैं। पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। 28 जनवरी को जोधपुर से पार्थिव शरीर गांव परेऊ लाया गया, जहां 30 जनवरी को समाधि संस्कार संपन्न हुआ। अब विसरा रिपोर्ट और अन्य जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जो मामले में अहम भूमिका निभा सकती है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, साध्वी प्रेम बाईसा का जीवन भक्ति, साधना और संघर्ष से भरा रहा। महज पांच साल की उम्र में मां के निधन के बाद वे जोधपुर के आश्रम में रहने लगी थीं। संतों के मार्गदर्शन में उन्होंने भजन गायन और कथा वाचन की शिक्षा ली। 12 साल की उम्र में पहली कथा करने के बाद उनकी ख्याति तेजी से बढ़ी और वे राजस्थान की चर्चित कथावाचकों में गिनी जाने लगीं। उनकी अचानक मौत से श्रद्धालुओं और संत समाज में गहरा दुख और कई सवाल खड़े हो गए हैं।

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