Kerala Name Change Proposal: ‘केरल’ अब ‘केरलम’ कहलाने की तैयारी, विधानसभा प्रस्ताव के बाद केंद्र से संशोधन की मांग
Kerala Name Change Proposal: ‘केरल’ अब ‘केरलम’ कहलाने की तैयारी, विधानसभा प्रस्ताव के बाद केंद्र से संशोधन की मांग
दक्षिण भारत के राज्य केरल का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर ‘केरलम’ किए जाने की प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में है। राज्य सरकार ने संकेत दिए हैं कि कैबिनेट बैठक के बाद ‘केरल’ की जगह ‘केरलम’ नाम अपनाने को लेकर औपचारिक कदम तेज किए जा सकते हैं। यह प्रस्ताव 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने वर्ष 2024 में राज्य का नाम बदलने का प्रस्ताव रखा था। उनका तर्क है कि मलयालम भाषा में राज्य को ‘केरलम’ कहा जाता है, इसलिए आधिकारिक नाम भी स्थानीय भाषाई पहचान के अनुरूप होना चाहिए। राज्य विधानसभा पहले ही आधिकारिक रिकॉर्ड में नाम परिवर्तन के पक्ष में प्रस्ताव पारित कर चुकी है।
25 जून 2024 को विधानसभा ने दूसरी बार यह प्रस्ताव पास किया था। इससे पहले पारित प्रस्ताव की केंद्रीय गृहमंत्रालय ने समीक्षा की थी और कुछ तकनीकी सुधार सुझाए थे। राज्य सरकार ने उन सुझावों को ध्यान में रखते हुए संशोधित प्रस्ताव पारित किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा था कि संविधान की पहली अनुसूची में राज्य का नाम ‘केरल’ दर्ज है और इसे अनुच्छेद 3 के तहत संशोधित कर ‘केरलम’ किया जाना चाहिए। साथ ही, संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं में भी राज्य का नाम ‘केरलम’ किए जाने की मांग की गई है।
राज्य सरकार का मानना है कि यह बदलाव केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और भाषाई अस्मिता का सम्मान है। सरकार का कहना है कि जिस नाम से राज्य को उसकी मातृभाषा में जाना जाता है, वही नाम राष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता पाए।
सूत्रों के अनुसार, इस विषय पर आगे बढ़ने के लिए राज्य सरकार केंद्र से संवाद स्थापित करेगी। खबर है कि इस संबंध में प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर सकता है। इससे पहले भी इस मुद्दे पर केंद्र स्तर पर चर्चा हो चुकी है।
इसी बीच, राज्य की वामपंथी सरकार ने विधानसभा में ‘नेटिविटी कार्ड’ विधेयक भी पेश किया है। राजस्व मंत्री के. राजन ने इसे ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कानून बताते हुए कहा कि इसके तहत राज्य के मूल निवासियों को आधिकारिक पहचान पत्र जारी किया जाएगा, जिससे वे स्वयं को गर्व से ‘केरलवासी’ घोषित कर सकेंगे। हालांकि विपक्षी UDF ने शबरिमला से जुड़े एक अन्य मुद्दे को लेकर सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया। बाद में इस विधेयक को विस्तृत जांच और विचार-विमर्श के लिए विषय समिति को भेज दिया गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नाम परिवर्तन का प्रस्ताव सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ चुनावी रणनीति से भी जुड़ा हो सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय केंद्र सरकार द्वारा संवैधानिक प्रक्रिया पूरी किए जाने के बाद ही संभव होगा। फिलहाल राज्य में ‘केरल’ से ‘केरलम’ नाम परिवर्तन को लेकर बहस तेज हो गई है और सभी की नजरें केंद्र की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।