Jammu bulldozer action: जम्मू में मुस्लिम पत्रकार के घर पर चला बुलडोजर, हिंदू पड़ोसी ने दिया प्लॉट, कहा—‘घर बनाकर देंगे’; कार्रवाई पर उठे सवाल
Jammu bulldozer action: जम्मू में मुस्लिम पत्रकार के घर पर चला बुलडोजर, हिंदू पड़ोसी ने दिया प्लॉट, कहा—‘घर बनाकर देंगे’; कार्रवाई पर उठे सवाल
जम्मू–कश्मीर में एक मुस्लिम पत्रकार के घर पर हुए प्रशासनिक बुलडोजर एक्शन ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। जम्मू डिवेलपमेंट अथॉरिटी (JDA) द्वारा की गई इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों में रोष है, जबकि सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल देते हुए एक हिंदू पड़ोसी आगे आया और पत्रकार को रहने के लिए जमीन देने का फैसला किया। उसने यह भी वादा किया कि वह खुद उसके लिए नया घर बनाने में पूरा सहयोग करेगा।
जानकारी के अनुसार, पत्रकार अराफाज अहमद डेंग के घर पर JDA ने अवैध निर्माण के आरोप में बुलडोजर चला दिया। पत्रकार का कहना है कि यह कार्रवाई बिना किसी पूर्व नोटिस, बिना किसी सुनवाई और पूरी तरह तानाशाही तरीके से की गई। घर तोड़े जाते समय इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था, जिसके कारण परिवार दहशत और सदमे में है।
पत्रकार ने बताया कि यह घर कई वर्षों से उनका स्थाई निवास था, और प्रशासन की ओर से न कोई चेतावनी दी गई और न ही कोई कानूनी कागज़ दिखाया गया। उन्होंने कहा कि सरकार लोगों को घर देने की बात करती है, लेकिन यहां बिना जांच–पड़ताल के घर उजाड़े जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि पूरा परिवार अचानक बेघर हो गया है और उनके बच्चों तक को सड़क पर आना पड़ा।
इस घटना के बाद बीजेपी नेता रविंदर रैना भी पत्रकार के घर पहुंचे और परिवार से मुलाकात की। उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा—
“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है कि हर गरीब के सिर पर छत हो, लेकिन यहां उल्टा हो रहा है। बेगुनाहों के घर उजाड़ना गलत है।”
इस दुख की घड़ी में पत्रकार के हिंदू पड़ोसी राजेश कुमार ने इंसानियत का बड़ा उदाहरण पेश किया। उन्होंने अराफाज के नाम एक प्लॉट गिफ्ट कर दिया और कहा:
“यह मेरा भाई है। यदि आज उसका घर टूट गया है तो हम साथ खड़े हैं। मेरा प्लॉट इसका है, और हम सब मिलकर इसे नए घर में बसाएंगे।”
स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन की कार्रवाई को अमानवीय और मनमानी बताया है। कई सामाजिक संगठनों ने मांग की कि प्रशासन इस कार्रवाई का कारण स्पष्ट करे और पीड़ित परिवार को न्याय मिले।
इस घटना ने जम्मू–कश्मीर में बुलडोजर नीति, सरकारी कार्रवाई की पारदर्शिता और सांप्रदायिक एकता जैसे मुद्दों को फिर से चर्चा में ला दिया है। फिलहाल पत्रकार परिवार अस्थाई रूप से रिश्तेदारों के घर में रह रहा है, जबकि मामले की जांच की मांग तेज हो गई है।