भारत हमेशा मालदीव के…’, विदेश मंत्री एस जयशंकर का बयान सुन चीन को लग जाएगी मिर्ची

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India Maldives Bilateral Ties: भारत और मालदीव के लंबे वक्त से रिश्ते की कड़वाहट कम होती दिख रही है. भारत और मालदीव ने शुक्रवार (3 जनवरी 2025) को सरहद पार व्यापार के लिए स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर सहमति दी है और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत हमेशा मालदीव के साथ खड़ा है. जयशंकर ने दिल्ली में मालदीव के अपने समकक्ष अब्दुल्ला खलील के साथ बैठक में यह टिप्पणी की है.

एस जयशंकर और अब्दुल्ला खलील के बीच समुद्री सुरक्षा, व्यापार और निवेश समेत कई प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने के तरीकों पर चर्चा हुई है. मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला खलील तीन दिनों के दौरे पर आए हुए हैं.

जयशंकर ने कहा, “सीमा पार लेनदेन के लिए स्थानीय मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा देने की रूपरेखा पर हस्ताक्षर किए गए हैं. हमने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी भागीदारी बढ़ाई है और मैं यह कहना चाहता हूं कि भारत हमेशा मालदीव के साथ खड़ा रहा है. आप हमारी नेबरहुड फर्स्ट की नीति में बहुत महत्व रखते हैं.”

मालदीव ने कहा- Thanku

मालदीव के विदेश मंत्री  डॉ खलील ने अपनी ओर से भारत द्वारा जरूरत के समय मालदीव को दी गई आपातकालीन वित्तीय सहायता की सराहना की, जो मालदीव के “First Responders” के रूप में भारत की भूमिका को दर्शाता है. विदेश मंत्री डॉ. खलील ने भारत-मालदीव व्यापक आर्थिक और समुद्री सुरक्षा साझेदारी के लिए संयुक्त दृष्टिकोण को साकार करने में भारत सरकार के साथ मिलकर काम करने के लिए राष्ट्रपति डॉ. मुइज्जू और मालदीव सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता की पुष्टि की.

भारत और मालदीव विवाद

साल 2023 के आखिर में मालदीव में सत्ता परिवर्तन हुआ था. चुनाव के बाद देश के नए राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जु बने थे. अपना पद संभालते ही मुइज्जु ने भारत के उन सैनिकों को वापस भेजने की बात कह दी जो मालदीव में तैनात थे और मालदीव की सहायता कर रहे थे. इसके बाद भारत में भी मालदीव को लेकर विरोध शुरू हो गया था. सोशल मीडिया पर बॉयकॉट मालदीव का ट्रेंड चला था और लोगों ने मालदीव की जगह लक्ष्यद्वीप जाने की बात कही थी. प्रधानमंत्री मोदी ने भी लक्ष्यद्वीप को प्राथमिकता देने का आह्वान किया था.

फरवरी 2024 में भारत सरकार ने अपनी बजट में मालदीव को दी जाने वाली सहायता को कम कर दिया था. हालांकि दोनों देशों के बीच कड़वाहट कम होने की शुरूआत तब हुई जब मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जु 4 दिनों के दौरे पर भारत आए थे और कई समझौते पर सहमति जाहिर की थी.

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