Bharat Bandh: 10 किसान संगठनों और ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल, US ट्रेड डील और नए लेबर कोड के खिलाफ सड़कों पर उतरे किसान-मजदूर
Bharat Bandh: 10 किसान संगठनों और ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल, US ट्रेड डील और नए लेबर कोड के खिलाफ सड़कों पर उतरे किसान-मजदूर
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और देश की कई केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल और ‘भारत बंद’ का आह्वान किया है। इस बंद को पंजाब की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) समेत कई विपक्षी दलों का समर्थन प्राप्त है। किसान संगठनों और मजदूर यूनियनों का कहना है कि केंद्र सरकार की नई आर्थिक नीतियां, भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता, नए श्रम कानून, बिजली विधेयक 2025, बीज विधेयक 2025 और VB-G RAM G एक्ट-2025 आम जनता, किसानों और श्रमिकों के हितों के खिलाफ हैं।
एसकेएम ने बयान जारी कर कहा कि यह आंदोलन केवल प्रतीकात्मक विरोध नहीं, बल्कि किसानों और मजदूरों की आजीविका की रक्षा की लड़ाई है। संगठनों की मुख्य मांगों में चारों नए लेबर कोड वापस लेना, बिजली विधेयक-2025 और बीज विधेयक-2025 को रद्द करना, विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G एक्ट-2025 को निरस्त करना, पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करना और सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी लागू करना शामिल है।
ट्रेड यूनियनों का दावा है कि इस हड़ताल में संगठित और असंगठित क्षेत्रों के लाखों मजदूर शामिल हो सकते हैं। कृषि मजदूर यूनियनों का मंच और एनआरईजीए संघर्ष मोर्चा (NSM) भी देशभर में प्रदर्शन में भागीदारी कर रहे हैं। एसकेएम ने किसानों से बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरकर औद्योगिक श्रमिकों के साथ एकजुटता दिखाने की अपील की है। उनका आरोप है कि सरकार की नीतियां कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बनाई जा रही हैं, जिससे किसानों और मजदूरों की आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है।
बिजली विधेयक 2025 को लेकर किसान संगठनों ने गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि नया कानून बिजली दरों में बढ़ोतरी करेगा और स्मार्ट मीटर लागू कर किसानों व घरेलू उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालेगा। किसान 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने की मांग कर रहे हैं। वहीं बीज विधेयक 2025 को लेकर आशंका जताई जा रही है कि इससे बहुराष्ट्रीय कंपनियों का दबदबा बढ़ेगा, बीजों की कीमतों पर नियंत्रण खत्म होगा और कालाबाजारी को बढ़ावा मिल सकता है।
VB-G RAM G एक्ट-2025 को लेकर भी विरोध तेज है। किसान संगठनों का दावा है कि यह कानून मनरेगा की जगह लाने की कोशिश है और इससे ग्रामीण रोजगार की गारंटी कमजोर हो जाएगी। प्रदर्शनकारी मनरेगा को मजबूत करने, सभी फसलों पर C2+50 प्रतिशत फॉर्मूले के आधार पर MSP की कानूनी गारंटी देने और पूर्ण कर्जमाफी की भी मांग कर रहे हैं।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर एसकेएम ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। संगठन ने इसे ‘आर्थिक उपनिवेशवाद’ की दिशा में कदम बताते हुए आरोप लगाया कि इससे भारतीय कृषि और डेयरी क्षेत्र को भारी नुकसान हो सकता है। उनका कहना है कि सस्ते अमेरिकी आयात से घरेलू बाजार प्रभावित होगा और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) पर भी असर पड़ सकता है। एसकेएम ने इस समझौते को ‘गुप्त’ बताते हुए इसके खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पुतले जलाने की अपील की है।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी इस हड़ताल का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि मजदूरों को डर है कि नए लेबर कोड उनके अधिकारों को कमजोर करेंगे, जबकि किसानों को आशंका है कि व्यापार समझौते और मनरेगा में बदलाव से उनकी आजीविका पर चोट पहुंचेगी। उन्होंने सरकार पर किसानों और मजदूरों की आवाज अनसुनी करने का आरोप लगाया।
पंजाब की आम आदमी पार्टी ने भी भारत बंद का समर्थन करते हुए कहा है कि उसके कार्यकर्ता देशभर में किसानों और मजदूरों के साथ खड़े रहेंगे। पार्टी का आरोप है कि नए श्रम कानूनों ने श्रमिकों की नौकरी की सुरक्षा कम कर दी है और मालिकों को अधिक छूट दे दी है।
एसकेएम ने 2020-21 के किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि उस आंदोलन में 736 किसानों ने जान गंवाई थी, लेकिन सरकार ने अब तक सभी वादे पूरे नहीं किए। संगठन का कहना है कि यह भारत बंद मजदूर-किसान एकता का बड़ा मंच है और सरकार की नीतियों के खिलाफ जनाक्रोश का प्रतीक है।