आपकी आवाज़, आपकी खबर|
BREAKING NEWS
Poland Shooting: क्राकोव के मुख्य बाजार में कार से अंधाधुंध फायरिंग, छह लोगों की मौत, 15 घायल; हमलावर गिरफ्तारIND vs NZ: छोटे लक्ष्य का पीछा करने में छूटे भारत के पसीने, दूसरे वनडे में चार रन से जीतकर सीरीज में 2-0 की बढ़तSharad Pawar Health Update: शरद पवार की सेहत में सुधार, तीन दिन बाद मुंबई के अस्पताल से मिली छुट्टी; घर पर जारी रहेगा इलाजSonia Gandhi Memoir: मोदी सरकार पर लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने का आरोप, आपातकाल और राजीव गांधी से रिश्ते पर भी बोलीं सोनिया; भाजपा का पलटवारBismillah Khan House: पुश्तैनी मकान पर बुलडोजर चलने के अखिलेश यादव के दावे को परिवार ने नकारा, खुद करा रहा पुनर्निर्माण; भूतल पर बनेगा संग्रहालयPM Modi Diwali Message: प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को दीं दीपावली की शुभकामनाएं, जवानों के साथ त्योहार मनाने की परंपरा रखेंगे जारीIndiGo Flight Hijack Threat: विमान के शौचालय में मिली अपहरण की धमकी वाली पर्ची, बेंगलुरु लौटी लखनऊ जा रही फ्लाइट; एयरपोर्ट पर फुल इमरजेंसी
देश

Sonia Gandhi Memoir: मोदी सरकार पर लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने का आरोप, आपातकाल और राजीव गांधी से रिश्ते पर भी बोलीं सोनिया; भाजपा का पलटवार

पढ़ने के विकल्प

Sonia Gandhi Memoir: मोदी सरकार पर लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने का आरोप, आपातकाल और राजीव गांधी से रिश्ते पर भी बोलीं सोनिया; भाजपा का पलटवार

नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपने संस्मरण ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ के विमोचन से पहले दिए साक्षात्कारों में निजी जीवन, गांधी परिवार, आपातकाल और मौजूदा राजनीति पर अपनी बात रखी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में देश के लोकतंत्र, संस्थाओं और सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचा है। भाजपा ने उनके आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस के शासनकाल और आपातकाल को लेकर पलटवार किया है।

सोनिया गांधी की पुस्तक दस नवंबर को प्रकाशित होने वाली है। इसमें राजीव गांधी से उनकी मुलाकात, विवाह, भारत में जीवन और परिवार से जुड़े अनुभवों का वर्णन है। साथ ही इंदिरा गांधी तथा राजीव गांधी की हत्या जैसी व्यक्तिगत त्रासदियों और बाद में सक्रिय राजनीति में आने के घटनाक्रम भी शामिल हैं। पुस्तक के प्रकाशन से पहले उनके साक्षात्कारों ने राजनीतिक बहस तेज कर दी है।

‘द हिंदू’ को दिए साक्षात्कार में सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में लोकतांत्रिक व्यवस्था और संस्थाओं को गहरी क्षति पहुंची है। उनका कहना है कि सरकार बदलने के बाद भी इन व्यवस्थाओं को फिर स्वस्थ स्थिति में लाने के लिए समय और राजनीतिक दलों के सामूहिक प्रयास की जरूरत होगी। यह सोनिया गांधी का राजनीतिक आकलन है, जिसका भाजपा ने विरोध किया है।

उन्होंने विपक्ष को समान अवसर नहीं मिलने का आरोप भी लगाया। सोनिया का कहना है कि संस्थाओं, मुख्यधारा के मीडिया, आर्थिक संसाधनों और धर्म के राजनीतिक इस्तेमाल ने विपक्ष के सामने कठिन परिस्थितियां खड़ी की हैं। हालांकि, उन्होंने कांग्रेस और समान विचारधारा वाले दलों के भविष्य को लेकर उम्मीद जताई। उनके अनुसार, लोग परिस्थितियों को समझ रहे हैं और बेहतर शासन का स्वागत करेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक उभार से कांग्रेस क्या सीख सकती है, इस सवाल पर सोनिया गांधी ने कहा कि राजनीति में आगे बढ़ने के कई रास्ते होते हैं। उन्होंने कांग्रेस में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के उदाहरण दिए। साथ ही उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि कांग्रेस को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से बहुत कुछ सीखने की आवश्यकता है।

वर्ष 2004 में प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं करने के निर्णय पर सोनिया गांधी ने कहा कि उन्हें इस फैसले को लेकर कोई अफसोस नहीं है। उन्होंने मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार के साथ अपने अनुभव को सकारात्मक बताया। उनका कहना था कि दोनों की भूमिकाएं स्पष्ट थीं—मनमोहन सिंह सरकार का नेतृत्व कर रहे थे और वह पार्टी की जिम्मेदारी संभाल रही थीं।

आपातकाल पर भी सोनिया गांधी ने विस्तार से अपनी राय रखी। ‘द गार्जियन’ से बातचीत में उन्होंने इसे लागू करने के फैसले को गलती बताया। उन्होंने यह विश्वास भी व्यक्त किया कि इंदिरा गांधी बाद में स्वयं ऐसा महसूस करने लगी थीं। सोनिया के अनुसार, उनकी सास मूल रूप से लोकतांत्रिक सोच रखती थीं और आपातकाल की परिस्थितियों से सहज नहीं थीं।

वहीं, ‘द हिंदू’ को दिए साक्षात्कार में उन्होंने स्वीकार किया कि आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकार सीमित हुए थे। उन्होंने तत्कालीन परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इंदिरा गांधी व्यापक अशांति और तेजी से बिगड़ते हालात से निपटने का प्रयास कर रही थीं। सोनिया ने उस फैसले की प्रक्रिया को संवैधानिक प्रावधानों से जोड़ा और इंदिरा गांधी द्वारा बाद में ज्यादतियों पर सार्वजनिक खेद जताने का भी उल्लेख किया।

संजय गांधी की भूमिका के सवाल पर सोनिया ने कहा कि उस दौर के सभी फैसलों की जिम्मेदारी केवल उन्हीं पर नहीं डाली जा सकती। उनके मुताबिक, इंदिरा गांधी के कुछ वरिष्ठ सहयोगियों का भी दबाव था। उन्होंने राजीव गांधी का उल्लेख उन लोगों में किया, जिनका दृष्टिकोण अलग था और जो शिकायतों तथा लोगों से मिलने वाली प्रतिक्रिया को अपनी मां तक पहुंचाते थे।

निजी जीवन के बारे में सोनिया गांधी ने कहा कि उनकी पुस्तक केवल राजीव गांधी के साथ प्रेम कहानी नहीं है। इसमें उस परिवार और देश के साथ उनके बढ़ते लगाव की यात्रा भी दर्ज है, जिसका वह बाद में हिस्सा बनीं। उन्होंने बचपन से मिले परिवार और मित्रों के प्रति निष्ठा, दूसरों के लिए संवेदना तथा जिम्मेदारी जैसे मूल्यों का उल्लेख किया।

पुस्तक में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने से जुड़ी उनकी आशंकाओं का भी वर्णन है। सोनिया ने उस समय पति की सुरक्षा को लेकर गहरे भय और इस जिम्मेदारी को स्वीकार नहीं करने के अपने आग्रह को याद किया है। ये विवरण परिवार की त्रासदी और सार्वजनिक जिम्मेदारी के बीच उनके व्यक्तिगत अनुभव सामने रखते हैं।

भाजपा ने सोनिया गांधी के राजनीतिक आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। वरिष्ठ नेता तरुण चुघ ने कहा कि वह देश की प्रगति और विकास को अनदेखा कर रही हैं। उन्होंने कांग्रेस के शासनकाल, विभिन्न विवादों और 1984 की सिख विरोधी हिंसा का उल्लेख करते हुए पार्टी के रिकॉर्ड पर सवाल उठाए। भाजपा ने आपातकाल से संबंधित उनकी व्याख्या की भी आलोचना की।

भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने संस्मरण की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इसमें निजी अनुभवों की तुलना में राजनीतिक विरोध अधिक दिखाई देता है। पार्टी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी सोनिया गांधी पर आपातकाल को उचित ठहराने की कोशिश करने का आरोप लगाया। ये भाजपा नेताओं की प्रतिक्रियाएं हैं; सोनिया ने अपने साक्षात्कारों में आपातकाल की ज्यादतियों को स्वीकार करने और इंदिरा गांधी के बाद के खेद का उल्लेख किया है।

‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ भारत में हार्परकॉलिन्स प्रकाशित कर रहा है। पुस्तक को सोनिया गांधी के निजी जीवन और भारत से उनके जुड़ाव के संस्मरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसके विमोचन से पहले सामने आए बयानों ने निजी स्मृतियों के साथ आपातकाल की विरासत, कांग्रेस की राजनीतिक भूमिका और वर्तमान सरकार पर विपक्ष के आरोपों को फिर चर्चा में ला दिया है।

ये खबर शेयर करें

0 टिप्पणियाँ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *