CBI Raid: भगवंत मान के कैंप ऑफिस पर CBI की छापेमारी, OSD राजबीर घुमन से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में कई ठिकानों पर कार्रवाई
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के चंडीगढ़ स्थित कैंप ऑफिस पर मंगलवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने छापेमारी की। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री के OSD राजबीर सिंह घुमन से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में की गई है। CBI की टीम ने चंडीगढ़ के सेक्टर-2 स्थित कैंप ऑफिस के अलावा राजबीर घुमन के संगरूर स्थित घर और उनके करीबी रिश्तेदार से जुड़े मोहाली के फेज-11 स्थित ठिकाने पर भी तलाशी ली। एजेंसी ने पंजाब के कई शहरों में एक साथ कार्रवाई की।
CBI की यह कार्रवाई पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश के एक दिन बाद हुई है, जिसमें अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की ओर से पंजाब के डीजीपी को भेजे गए पत्रों में लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच CBI को सौंपने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट ने CBI को आपराधिक मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाने और दो महीने के भीतर स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा था।
जांच का केंद्र मुख्यमंत्री के OSD राजबीर सिंह घुमन और उनसे जुड़े कुछ अन्य लोगों पर लगे गंभीर आरोप हैं। ED की ओर से लगाए गए आरोपों के मुताबिक, सरकारी अधिकारियों की पोस्टिंग और ट्रांसफर को प्रभावित करने, सरकारी नीतियों और प्रशासनिक फैसलों में कथित तौर पर हस्तक्षेप करने, टेंडर और लाइसेंस से जुड़े मामलों में फायदा पहुंचाने तथा कुछ गोपनीय सरकारी दस्तावेजों की जानकारी निजी लोगों तक पहुंचाने जैसी गतिविधियों की जांच की जा रही है।
CBI की कार्रवाई में राजबीर घुमन के अलावा नितिन गोहल, जितिन गोहल उर्फ राजा, रोमी राजा महाजन, बीर देविंदर और आरएस नागरा समेत कुछ अन्य लोगों के नाम भी जांच के दायरे में बताए गए हैं। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सरकारी कामकाज में कथित प्रभाव का इस्तेमाल किस तरह किया गया और इसके बदले किसी तरह का आर्थिक लाभ लिया गया या नहीं।
आरोपों के मुताबिक, नितिन गोहल कथित तौर पर सरकारी काम करवाने के इच्छुक लोगों और राजबीर घुमन के बीच संपर्क का काम करता था। जांच एजेंसियों के सामने ट्रांसफर-पोस्टिंग, गोपनीय सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच, हथियार लाइसेंस और जमीन से जुड़े मामलों में कथित मदद के आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों की पुष्टि अभी जांच के जरिए होनी है और किसी भी आरोपी को अदालत द्वारा दोषी ठहराया जाना बाकी है।
CBI ने कार्रवाई के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों को भी अपने कब्जे में लिया है। अधिकारियों की ओर से जब्त किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल सामग्री की जांच की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि आरोपों से जुड़े लेन-देन, बातचीत या सरकारी फैसलों को प्रभावित करने के लिए किसी नेटवर्क का इस्तेमाल हुआ था या नहीं।
मामले की शुरुआत ED की ओर से पंजाब के डीजीपी को भेजे गए पत्रों से हुई थी। ED ने कथित भ्रष्टाचार से जुड़े इनपुट के आधार पर कार्रवाई और FIR दर्ज करने की मांग की थी। पंजाब पुलिस की ओर से तत्काल FIR दर्ज नहीं किए जाने के बाद मामला पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचा। इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले में स्वतंत्र जांच की जरूरत मानते हुए CBI को जांच सौंप दी।
हालांकि पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। राज्य सरकार का कहना है कि मामले की जांच को लेकर हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है और सरकार ने इस मामले में अपना पक्ष सर्वोच्च अदालत के सामने रखा है।
वहीं मुख्यमंत्री भगवंत मान ने CBI की छापेमारी को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। मान ने आरोप लगाया कि पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल उनकी सरकार और उन्हें बदनाम करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि पंजाब में आम आदमी पार्टी को मिल रहे समर्थन से भाजपा घबराई हुई है। मुख्यमंत्री के ये आरोप राजनीतिक हैं और भाजपा की ओर से इस कार्रवाई को लेकर अलग पक्ष रखा जा सकता है।
दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे और आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने भी कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे राजनीतिक दबाव से जोड़कर देखा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा चुनावी मुकाबले में CBI और ED का सहारा ले रही है। दूसरी ओर, विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाओं के बीच जांच एजेंसी का फोकस फिलहाल कथित भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़े दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच पर है।
CBI की छापेमारी चंडीगढ़, मोहाली, गुरदासपुर, लुधियाना, पटियाला, संगरूर और जालंधर समेत कई स्थानों पर की गई। जांच आगे बढ़ने के साथ एजेंसी यह स्पष्ट करने की कोशिश करेगी कि सरकारी पदों और फैसलों को प्रभावित करने के आरोपों में कितनी सच्चाई है, कथित आर्थिक लेन-देन का कोई सबूत है या नहीं और इस पूरे मामले में किन-किन लोगों की भूमिका रही है।
यह मामला अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण हो गया है। एक तरफ CBI हाईकोर्ट के आदेश के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है, वहीं पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी है। ऐसे में आने वाले दिनों में जांच की प्रगति और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई दोनों पर नजर रहेगी।