Solar Energy : होर्मुज संकट के बीच भारत के लिए बड़ी राहत, सोलर एनर्जी ग्रोथ में अमेरिका को छोड़ा पीछे
Solar Energy : होर्मुज संकट के बीच भारत के लिए बड़ी राहत, सोलर एनर्जी ग्रोथ में अमेरिका को छोड़ा पीछे
ईरान और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण एनर्जी कॉरिडोर होर्मुज स्ट्रेट से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है। इसका असर एशिया से लेकर यूरोप तक देखने को मिल रहा है और कई देशों में ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई है। भारत में भी LPG, पेट्रोल और डीजल की सप्लाई तथा कीमतों को लेकर चिंता जताई जा रही है। इसी बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत और खुशखबरी सामने आई है।
भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए वर्ष 2025 में वार्षिक सौर ऊर्जा क्षमता वृद्धि के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है। केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने जानकारी देते हुए बताया कि भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर ग्रोथ मार्केट बन चुका है।
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि भारत की सौर ऊर्जा विकास गाथा वैश्विक स्तर पर नए मानक स्थापित कर रही है। उन्होंने कहा कि मजबूत सरकारी नीतियों, टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की बदौलत भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता प्रमुख सौर ऊर्जा बाजार बनकर उभरा है।
अंतरराष्ट्रीय रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी (IRENA) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत ने 37 गीगावाट से अधिक नई सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ी, जबकि इसी अवधि में अमेरिका ने 34 गीगावाट सौर क्षमता का विस्तार किया। इस उपलब्धि के साथ भारत ने अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए वैश्विक रैंकिंग में दूसरा स्थान हासिल कर लिया।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने भी इस सफलता पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा बाजार बन गया है और यह उपलब्धि देश में स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र की तेज प्रगति को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि इससे देश में अधिक भरोसेमंद, टिकाऊ और आधुनिक ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण को मजबूती मिलेगी।
भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में लगातार हो रही वृद्धि का असर वैश्विक स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। अप्रैल 2026 में जारी IRENA के आंकड़ों के अनुसार, कुल स्थापित रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता के मामले में भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंच चुका है। इस सूची में चीन पहले और अमेरिका दूसरे स्थान पर हैं। भारत ने इस मामले में ब्राजील को पीछे छोड़ दिया है।
दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, चीन के पास 2258.02 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता है। अमेरिका 467.92 गीगावाट के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि भारत 250.52 गीगावाट क्षमता के साथ तीसरे नंबर पर पहुंच गया है। इसके बाद ब्राजील 228.20 गीगावाट और जर्मनी 199.92 गीगावाट क्षमता के साथ क्रमशः चौथे और पांचवें स्थान पर हैं।
प्रह्लाद जोशी ने यह भी बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत ने 55.3 गीगावाट नॉन-फॉसिल फ्यूल बेस्ड क्षमता जोड़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत का सोलर और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर देश को बड़ी राहत देने में अहम भूमिका निभा सकता है।