Jwala Gutta Statement: भारतीय बैडमिंटन सिस्टम पर ज्वाला गुट्टा का बड़ा हमला, बोलीं- सब समझौता कर रहे हैं लेकिन कोई आवाज नहीं उठा रहा

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Jwala Gutta Statement: भारतीय बैडमिंटन सिस्टम पर ज्वाला गुट्टा का बड़ा हमला, बोलीं- सब समझौता कर रहे हैं लेकिन कोई आवाज नहीं उठा रहा

भारतीय बैडमिंटन की पूर्व स्टार खिलाड़ी Jwala Gutta ने एक बार फिर खेल व्यवस्था और बैडमिंटन प्रशासन को लेकर तीखी टिप्पणी की है। अपने बेबाक बयानों के लिए मशहूर ज्वाला गुट्टा ने कहा कि भारतीय बैडमिंटन में अब “समझौते और चुप्पी” का माहौल बन गया है, जहां सिस्टम की कमियों पर खुलकर बोलने से लोग बच रहे हैं।

एक इंटरव्यू के दौरान ज्वाला गुट्टा ने कहा कि खिलाड़ियों से लेकर पूर्व खिलाड़ी और खेल संघ तक, सभी हालात से समझौता कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सबसे चिंताजनक बात यह है कि जो पूर्व खिलाड़ी अब प्रशासनिक भूमिकाओं में हैं, वे भी भारतीय बैडमिंटन में मजबूत बेंच स्ट्रेंथ की कमी को गंभीर समस्या नहीं मान रहे।

ज्वाला ने भारतीय बैडमिंटन की तुलना चीन से करते हुए कहा कि वहां किसी बड़े खिलाड़ी के चोटिल होने पर तुरंत दूसरा विश्वस्तरीय खिलाड़ी तैयार मिल जाता है। उनके मुताबिक चीन का सिस्टम लगातार नए खिलाड़ियों को तैयार करता है, जबकि भारत में यह व्यवस्था कमजोर दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि भारत में जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को पर्याप्त मौके और सही समर्थन नहीं मिल पा रहा, जिसकी वजह से लगातार नए चैंपियन सामने नहीं आ रहे।

Jwala Gutta ने अपनी अकादमी चलाने के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि हैदराबाद में गैर-लाभकारी अकादमी शुरू करने के बावजूद उन्हें आर्थिक सहयोग और CSR फंड हासिल करने में काफी संघर्ष करना पड़ रहा है। ज्वाला ने इशारों में कहा कि खेलों में कई बार प्रतिभा से ज्यादा पहचान और संपर्क मायने रखते हैं।

उन्होंने कहा कि उनका स्पष्ट और बेबाक रवैया भी सिस्टम को पसंद नहीं आता। ज्वाला के मुताबिक खेल प्रशासन में बैठे कई लोग उनके विचारों से असहज रहते हैं क्योंकि वह खुलकर अपनी बात रखती हैं।

पूर्व कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट ज्वाला गुट्टा ने अपने पुराने विवादों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा खिलाड़ियों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई कभी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं रही, बल्कि खिलाड़ियों को निष्पक्ष अवसर दिलाने के लिए थी।

ज्वाला ने कहा कि वह हाई कोर्ट तक सिर्फ इसलिए गई थीं क्योंकि उन्हें खेलने से रोका जा रहा था। उनके अनुसार खेलों में पारदर्शिता और निष्पक्ष व्यवस्था जरूरी है, ताकि प्रतिभाशाली खिलाड़ी बिना किसी दबाव के आगे बढ़ सकें।

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