Delhi HC News इंजीनियर राशिद को AIIMS में पिता से मिलने की अनुमति, 10 मई तक राहत
Delhi HC News इंजीनियर राशिद को AIIMS में पिता से मिलने की अनुमति, 10 मई तक राहत
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बारामूला के सांसद Engineer Rashid को अपने बीमार पिता से मिलने की इजाजत देते हुए मानवीय दृष्टिकोण का परिचय दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि राशिद 10 मई तक रोजाना सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक दिल्ली के AIIMS Delhi में अपने पिता से मुलाकात कर सकते हैं, लेकिन इसके बाद उन्हें वापस तिहाड़ जेल लौटना होगा। इस आदेश ने एक ओर जहां कानूनी प्रक्रिया को बनाए रखा, वहीं दूसरी ओर पारिवारिक संवेदनाओं को भी महत्व दिया।
यह आदेश जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और मधु जैन की बेंच ने सुनाया, जिन्होंने पहले दिए गए अंतरिम जमानत के आदेश में संशोधन करते हुए यह नई व्यवस्था तय की। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि राशिद की सुरक्षा और निगरानी के लिए कम से कम दो पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में उनके साथ मौजूद रहेंगे और अस्पताल के वार्ड के बाहर तैनात रहेंगे। अदालत ने कहा कि मुलाकात का उद्देश्य केवल बीमार पिता के साथ समय बिताना है और इस दौरान सभी सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य होगा।
इस मामले में एनआईए की ओर से कई आपत्तियां भी उठाई गई थीं, जिनमें मोबाइल फोन के उपयोग को लेकर चिंता जताई गई थी। हालांकि अदालत ने इस दलील को खारिज करते हुए इसे अव्यावहारिक बताया और कहा कि राशिद को सीमित परिस्थितियों में मोबाइल उपयोग की अनुमति दी जा सकती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि आवश्यकता हो तो वह अपने पिता या परिवार के किसी सदस्य के फोन का इस्तेमाल कर सकते हैं।
सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि राशिद ने दिल्ली में रहने के लिए एक किराए का आवास लेने की बात कही थी, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा कारणों से उन्हें किसी आवास में रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती और केवल तय समय के लिए अस्पताल जाकर वापस जेल लौटना होगा। इससे पहले अदालत ने सांसद आवास में रहने की अनुमति भी इसी आधार पर खारिज कर दी थी।
गौरतलब है कि इंजीनियर राशिद 2019 से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं और उन पर आतंकवादी फंडिंग से जुड़े गंभीर आरोप हैं। एनआईए द्वारा दर्ज मामले में उन पर अलगाववादी संगठनों और आतंकी गतिविधियों को फंडिंग करने का आरोप है। इस मामले में उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत कई धाराएं लगाई गई हैं।
अदालत के इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कानून अपनी जगह कायम रहते हुए भी मानवीय पहलुओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। राशिद को दी गई यह सीमित राहत जहां उनके परिवार के लिए महत्वपूर्ण है, वहीं सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश तय करती है।