Kharge Remark Controversy: पीएम मोदी पर बयान से घिरे मल्लिकार्जुन खरगे, बीजेपी पहुंची चुनाव आयोग
Kharge Remark Controversy: पीएम मोदी पर बयान से घिरे मल्लिकार्जुन खरगे, बीजेपी पहुंची चुनाव आयोग
कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge अपने एक विवादित बयान को लेकर सियासी घमासान के केंद्र में आ गए हैं। प्रधानमंत्री Narendra Modi को लेकर की गई टिप्पणी के बाद भारतीय जनता पार्टी ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है। मामले ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है और दोनों दलों के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।
दरअसल, एक जनसभा के दौरान मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर ऐसी टिप्पणी कर दी, जिसे भाजपा ने बेहद आपत्तिजनक और अपमानजनक बताया। बयान में ‘आतंकवादी’ जैसे शब्द के इस्तेमाल को लेकर विवाद खड़ा हो गया और भाजपा नेताओं ने इसे देश के प्रधानमंत्री का अपमान करार दिया।
इस मुद्दे पर भाजपा का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग पहुंचा और औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। केंद्रीय मंत्री Kiren Rijiju ने आयोग से मुलाकात के बाद कहा कि पार्टी गहरे आक्रोश और दुख के साथ यह शिकायत लेकर आई है। उन्होंने कहा कि इस तरह की भाषा लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है और देश में स्वीकार्य नहीं हो सकती।
भाजपा ने मांग की है कि मल्लिकार्जुन खरगे अपने बयान के लिए सार्वजनिक रूप से देशवासियों से माफी मांगें और चुनाव आयोग इस मामले में सख्त कार्रवाई करे। पार्टी नेताओं का कहना है कि इस तरह के बयान राजनीतिक विमर्श को दूषित करते हैं और लोकतंत्र की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं।
वहीं विवाद बढ़ने के बाद मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने बयान पर सफाई भी दी है। उन्होंने कहा कि उनका इरादा प्रधानमंत्री को व्यक्तिगत रूप से ‘आतंकवादी’ कहना नहीं था, बल्कि वे उनकी कार्यशैली की आलोचना कर रहे थे। खरगे के मुताबिक, उनका आशय यह था कि प्रधानमंत्री विपक्षी दलों और नेताओं पर दबाव बनाने और उन्हें डराने का काम करते हैं।
खरगे ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है और उनका उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं था। हालांकि भाजपा इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं है और मामले में कार्रवाई की मांग पर अड़ी हुई है।
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर देश की राजनीति में भाषा और मर्यादा को लेकर बहस छेड़ दी है। चुनावी माहौल में इस तरह के बयान न केवल राजनीतिक तापमान बढ़ाते हैं, बल्कि जनमानस पर भी गहरा प्रभाव डालते हैं। अब सबकी नजर चुनाव आयोग की कार्रवाई पर टिकी है कि वह इस मामले में क्या रुख अपनाता है।