Parliament Big Reform: संसद में ऐतिहासिक बदलाव की तैयारी, महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पेश

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Parliament Big Reform: संसद में ऐतिहासिक बदलाव की तैयारी, महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पेश

संसद में आज एक ऐतिहासिक और बड़े बदलाव की दिशा में अहम कदम उठाए जाने की तैयारी है, जहां महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाएंगे। सरकार लोकसभा और देशभर की विधानसभाओं की सीटों में संभावित बढ़ोतरी के लिए संविधान संशोधन के जरिए नए ढांचे की नींव रखने जा रही है। इस कदम को देश की संसदीय व्यवस्था में अब तक का सबसे बड़ा संरचनात्मक बदलाव माना जा रहा है।

सरकार की योजना के तहत लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ महिला आरक्षण को भी इसी बड़े ढांचे का हिस्सा बनाया जाएगा। प्रस्तावित संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के जरिए संसद और विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व को नए स्तर पर ले जाने की कोशिश की जाएगी। इसके साथ ही केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े कानूनों में भी संशोधन का प्रस्ताव पेश किया जाएगा।

इस मुद्दे पर संसद में भारी राजनीतिक टकराव की संभावना जताई जा रही है। जहां सरकार इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने और लंबे समय से लंबित सुधारों को लागू करने की दिशा में कदम बता रही है, वहीं विपक्ष खासकर कांग्रेस के नेतृत्व में कई दल परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि इससे क्षेत्रीय संतुलन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है।

विशेषकर दक्षिण भारतीय राज्यों में परिसीमन को लेकर चिंता जताई जा रही है। इन राज्यों का मानना है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन के कारण उनकी लोकसभा सीटों में संभावित कमी हो सकती है। हालांकि सरकार ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी राज्य की सीटों में कटौती नहीं की जाएगी और नया परिसीमन संतुलित तरीके से लागू किया जाएगा।

सरकारी सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित योजना में लोकसभा की अधिकतम सीट सीमा 850 तक तय की गई है और किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। सभी राज्यों में सीटों में औसतन समान अनुपात में वृद्धि का प्रस्ताव है। इसके अलावा यह भी स्पष्ट किया गया है कि 1976 के बाद पहली बार इस स्तर पर परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।

परिसीमन प्रक्रिया अंतिम प्रकाशित जनगणना यानी 2011 के आंकड़ों के आधार पर की जाएगी। इसके तहत हर राज्य में अलग-अलग परिसीमन आयोग गठित किए जाएंगे, जो सभी राजनीतिक दलों से चर्चा के बाद अंतिम सीट संरचना तय करेंगे। सरकार का दावा है कि यह कदम लोकतंत्र को अधिक प्रतिनिधित्व आधारित और समावेशी बनाएगा।

इस पूरे घटनाक्रम के साथ संसद का मौजूदा सत्र देश के संसदीय इतिहास में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जहां आने वाले समय में राजनीतिक और संवैधानिक दोनों स्तरों पर बड़े बदलाव संभव हैं।

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