Iran protest: सड़कों पर ताबूतों की कतारें, ईरान में विरोध प्रदर्शनों के शहीदों के अंतिम संस्कार में उमड़ा जनसैलाब

0

Iran protest: सड़कों पर ताबूतों की कतारें, ईरान में विरोध प्रदर्शनों के शहीदों के अंतिम संस्कार में उमड़ा जनसैलाब

ईरान में सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के शासन के खिलाफ पिछले दो सप्ताह से जारी व्यापक विरोध प्रदर्शन अब देशव्यापी आंदोलन का रूप ले चुके हैं। यह आंदोलन लगभग 200 शहरों तक फैल चुका है और हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार समूहों के दावों के मुताबिक अब तक 544 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 10 हजार से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। मृतकों में प्रदर्शनकारी ही नहीं, बल्कि सुरक्षाबलों के जवान भी शामिल बताए जा रहे हैं।

राजधानी तेहरान से सामने आई तस्वीरें इस संकट की भयावहता को साफ तौर पर उजागर करती हैं। सड़कों पर ताबूत ही ताबूत नजर आ रहे हैं और हजारों की संख्या में लोग अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए उमड़ पड़े हैं। जिन सड़कों पर कभी रोजमर्रा की जिंदगी की चहल-पहल रहती थी, वहीं अब शोक, गुस्सा और इंसाफ की मांग साफ दिखाई दे रही है। लोग अपने कंधों पर शव उठाए हुए हैं और अपने प्रियजनों को आखिरी विदाई देने के साथ-साथ न्याय की गुहार लगा रहे हैं।

इन अंतिम यात्राओं का दृश्य बेहद दर्दनाक है। मातम मनाते परिवार, आंसुओं में डूबे लोग और ताबूतों के साथ उठते नारे यह दर्शाते हैं कि यह आंदोलन केवल सत्ता विरोध तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह आम जनता की पीड़ा, आक्रोश और साहस की प्रतीक बन चुका है। तेहरान के काहरीज़क फोरेंसिक मेडिकल सेंटर के बाहर भी दिल दहला देने वाला मंजर देखने को मिला, जहां कई शवों को बॉडी बैग में बंद कर जमीन पर रखा गया था और लोग खामोशी से उस भयावह दृश्य को देख रहे थे।

ईरान में जारी इस आंदोलन ने पूरी दुनिया का ध्यान देश की आंतरिक राजनीति और मानवाधिकार स्थिति की ओर खींच लिया है। सरकार की ओर से की जा रही सख्त कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की लगातार बढ़ती हिम्मत के बीच टकराव और तेज होता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के बीच जुबानी जंग भी तेज हो गई है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि प्रदर्शनकारियों पर हमले जारी रहे तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जबकि खामेनेई ने भी किसी भी दबाव के खिलाफ जवाबी कदम उठाने की बात कही है।

ईरान की सड़कों पर ताबूतों के साथ उठती इंसाफ की आवाजें यह सवाल खड़ा कर रही हैं कि आने वाले समय में यह आंदोलन किस दिशा में जाएगा और क्या इसके जरिए ईरानी जनता को उनकी मूलभूत आज़ादी, अधिकार और सम्मान मिल पाएगा या नहीं।

Leave A Reply

Your email address will not be published.