Maha Kumbh 2025: भगदड़ के चश्मदीदों ने बताया भयावह सच, ट्रैक्टर और JCB से हटाया मलबा, हजारों की भीड़ हो गई थी जमा

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Maha Kumbh Stampede: महाकुंभ में मौनी अमावस्या के दिन सिर्फ संगम नोज़ में ही नहीं झूंसी के सेक्टर 21 में भी भगदड़ हुई थी, जिसे लेकर प्रशासन ने अब तक चुप्पी साध रखी है. लेकिन इस घटना के कई चश्मदीद सामने आए हैं. उन्होंने इस भगदड़ को लेकर जो बात बताई है उसे सुनकर आपकी भी रुह कांप जाएंगी. ये भगदड़ संगम नोज पर हुई भगदड़ के एक दो घंटे बाद ही हुई थी. चश्मदीदों ने बताया कि वक्त यहा 4-5 हजार लोग चारों तरफ एक जगह इकट्ठा हो दे थे हर कोई अपनी जान बचाने कोशिश में लगा था.

जिस जगह पर भगदड़ मची वहां एक खाने-पीने की दुकान भी थी. इस दुकान पर काम करने वाले चश्मदीदों ने एबीपी न्यूज को बताया कि झूंसी में भगदड़ की घटना रात तीन बजे के आसपास हुई. उस वक्त यहां कोई पुलिस वाला मौजूद नहीं थी. दो बजे से ही भीड़ इकट्ठा होने लगी थी. सिर्फ एक पुलिस अधिकारी ही भीड़ को कंट्रोल कर रहे थे. सुबह छह बजे के बाद इसे रेस्क्यू सेंटर घोषित किया गया. क्योंकि जो लोग बेहोश हो रहे थे या उन्हें पैनिक अटैक हो रहा था उन्हें अंदर किया जा रहा था.

जेसीबी से हटाया गया लोगों का सामान
उन्होंने बताया कि हम रात तीन बजे से ही पानी दे रहे थे, सुबह तक हमारे पास पानी खत्म हो गया था. लोग पानी के लिए तरस रहे थे. लोगों की हालत इतनी खराब थी कि हमने गंगाजल लेकर कई लोगों के मुंह में डाला. लोग हमारे पैर पकड़कर कह रहे थे हमें अंदर ले लो. हमने कई बच्चों को ऊपर से लेकर आए ताकि उन्हें बचाया जा सके. भीड़ में 40-50 बच्चे थे.

यहां पर इतना समान था वो इतना दर्दनाक था जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां क्या हुआ होगा. रात से सुबह तक छह बजे तक ट्रैक्टर ट्रॉली से भरकर सामान को हटाया गया. लोग जान बचाने के लिए टॉवर के ऊपर तक चढ़ गए थे.

एक और चश्मदीद ने बताया कि हमने ऊपर से देखा लोग एक दूसरे को धक्का दे रहे थे. फिर हमने गेट खोला और कम से कम पांच से दस हजार बच्चों और महिलाओं को अंदर लिया. सब रो रहे थे कि हमें अंदर जाने दीजिए. इतने लोग आ रहे थे कि हमें लग रहा था कि हमारी जान चली जाएगी. हम लोगों को बचा रहे थे यहां पर पुलिस नहीं थी. यहां सिर्फ एक पुलिसवाले थे, उन्होंने भी बड़े अधिकारी को आर्मी भेजने के लिए फोन किया. कोई भीड़ को संभालने वाला नहीं था.

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