The Buckingham Murders Review: करीना कपूर और हंसल मेहता की ये फिल्म चौंकाती है और एक अलग तरह का करती है एंटररेनमेंट

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The Buckingham Murders First Review: करीना कपूर की 'द बकिंघम मर्डर्स' है  'मस्ट वॉच'! कहा- फिल्म पावरफुल - the buckingham murders first review  kareena kapoor khan starrer is a must watch -

The Buckingham Murders Review: हंसल मेहता एक ऐसा नाम है जो अगर कुछ बनाते हैं तो उम्मीदें जगती हैं की कुछ तो अलग और अच्छा होगा, और अगर साथ में करीना कपूर जैसी परफॉर्मर हों तो सोने पे सुहागा. यही इस फिल्म में हुआ है, ये फिल्म एक अच्छी मर्डर मिस्ट्री है जो आपका दिमाग घुमाती है और आप एंड तक सिनेमा हाल को सीट से चिपके रहते हैं लेकिन एक दिक्कत है, एक सेकंड भी मोबाइल देखा या ध्यान भटका तो कहानी मिस कर देंगे.

कहानी
जसमीत भामरा यानी करीना कपूर ब्रिटेन पुलिस मैं है, वो अपना बच्चा को चुकी है. वो अपने घर से दूर बकिंघम में ट्रांसफर ले लेती है, यहां उसे एक 10 साल के बच्चे के मर्डर की जांच सौंपी जाती है. वो पहले केस लेने से मना करती है और फिर इस केस के सुलझ जाने के बाद भी इसकी और तह तक जाती है. एक के बाद एक खुलासे होते हैं, ट्विस्ट आते हैं, ड्रग्स से लेकर समलैंगिक रिश्तों और दो अलग समुदायों के बीच के टेंशन, काफी कुछ है इस कहानी में जो आपकी दिलचस्पी बनाए रखता है.

कैसी है फिल्म
ये एक अच्छी थ्रिलर है, एक के बाद एक चौंकाने वाली चीजें होती हैं. फिल्म 2 घंटे से भी कम टाइम की है और इस वजह से कहीं खिंची नहीं लगती. कहानी को दिलचस्प तरीके से पेश किया गया है, जो आप सोचते हैं वैसा नहीं होता और एंड तक आप बस सोचते रह जाते हैं कि कातिल कौन होगा. फिल्म के ज्यादातर डायलॉग इंग्लिश में हैं और ये इस फिल्म की बहुत बड़ी दिक्कत है. थिएटर में हिंदी फिल्म देखने आने वाला दर्शक शायद ये पसंद न करे लेकिन फिल्म अच्छी है.

एक्टिंग
करीना कपूर ने जबरदस्त परफॉर्म किया है. अपने बच्चे को खो चुकी मां हो, जासूसी करना हो , अपने सीनियर से भिड़ जाना, बेगुनाह को बचाने के लिए सब कुछ कर गुजरना, हर तरह के शेड में करीना जबरदस्त हैं. बड़े कमाल तरीके से वो ये किरदार निभा गई हैं. रणवीर बराड़ का काम शानदार है, एक बेटे को को चुके बाप के किरदार के साथ उन्होंने पूरा न्याय किया है. एश टंडन, कपिल रेडकर और बाकी सब कलाकारों का काम अच्छा है.

डायरेक्शन 
हंसल मेहता का डायरेक्शन अच्छा है. वो फिल्म पर पूरी तरह पकड़ बनाए रखते हैं, है थोड़ी देर में चौंकाते है. इसके लिए असीम अरोड़ा की कहानी को भी बड़ा क्रेडिट जाता है क्योंकि असली हीरो तो कहानी ही होती है.

कुल मिलाकर अगर इंग्लिश डायलॉग से दिक्कत नहीं है तो ये फिल्म जरूर देखिए.

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